— बच्चों को तैराकी सिखाने आए पिता की गंगु कुंड में डूबने से दुखद मौत 24 News Update उदयपुर। उदयपुर में एक बार फिर पानी ने जान ले ली… और प्रशासन ने हमेशा की तरह सिर्फ हादसे के बाद पहुंचकर औपचारिकताएं निभाईं। भाई, ये क्या चल रहा है, खुला मजाक चल रहा है। गर्मी में झीलों की नगरी वाले शहर में लोग पानी में डूब रहे हैं और नेता—अफसर जल स्रोतों के पास बैठ कर पूजन की नौटंकी कर रहे हैं। दूसरी तरफ दूध तलाई, फतह सागर, गंगू कुण्ड सहित अन्य जलाशयों पर सैंकड़ों की संख्या में लोग बच्चों को लेकर तैरने आ रहे हैं। मजे की बात ये है कि प्रशासनिक अधिकारी खुद फतहसागर पर वॉक करते नजर आ रहे हैं और उसी फतहसागर पर जान जोखिम में डाल कर लोग स्विमिंग कर रहे हैं। लेकसिटी के जलाशयों की क्या सुरक्षा है, केवल बोर्ड लगाने की नौटंकी से काम नहीं चलने वाला है, ठोस कदम तत्काल उठाने होंगे वरना जल पूजन के तमाशे और जान जाने के दिल दहला देने वाले हादसे साथ साथ होते रहेंगे। शहर के भूपालपुरा थाना क्षेत्र स्थित महासतिया के गंगु कुंड में गुरुवार सुबह अपने बच्चों को तैराकी सिखाने आए 41 वर्षीय दुर्गाशंकर सालवी की डूबने से मौत हो गई। दर्दनाक बात यह रही कि युवक करीब 10 मिनट तक पानी में छटपटाता रहा, वहां 20 से 30 लोग मौजूद थे, लेकिन कोई उसे बचाने पानी में नहीं उतरा। दुर्गाशंकर सालवी ठोकर चौराहा क्षेत्र के निवासी थे। वह अपने दो बच्चों—10 और 14 साल के बेटों—को तैराकी सिखाने गंगु कुंड लेकर पहुंचे थे। यह सच किसी से छिपा नहीं है कि स्विमिंग पूलों की फीस महंगी होने से शहर के दर्जनों परिवार हर साल गंगू कुंड पर बच्चों को तैराकी सिखाने आते हैं। बच्चे पानी में तैर रहे थे और दुर्गाशंकर सीढ़ियों पर बैठे थे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसला और वे गहरे पानी में चले गए।मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार एक व्यक्ति ने उनका हाथ पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन पकड़ नहीं पाया। दुर्गाशंकर पानी में संघर्ष करते रहे, हाथ-पांव मारते रहे, लेकिन वहां मौजूद लोग सिर्फ तमाशबीन बने रहे। सूचना पर पहुंची सिविल डिफेंस टीम ने उन्हें बाहर निकालकर सीपीआर दिया, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गंगु कुंड में तैराकी की कोई अधिकृत अनुमति नहीं है, बावजूद इसके रोजाना 30 से 40 लोग स्विमिंग करने पहुंचते हैं। जब प्रशासन को पता है कि यहां रोज लोग आते हैं, हर साल हादसे होते हैं, तो फिर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए जाते?इनका ध्यान जल पूजने में, लोगों को बचाने में नहींविडंबना देखिए… शहर में जल स्रोतों की पूजा के बड़े-बड़े आयोजन हो रहे है। नेता मंचों से जल संरक्षण के भाषण दे रहे हैं। नारियल फोड़ते हैं, दीपदान करते हैं… मंत्र तक पढ़ रहे हैं। लेकिन उन्हीं जल स्रोतों पर हर साल किसी न किसी घर का चिराग बुझ जाता है। तो फिर सवाल ये है कि जीवन का मंत्र कौन पढ़ेगा। लाखों रुपए आयोजनों और प्रचार पर खर्च हो सकते हैं, तो क्या कुछ प्रशिक्षित लाइफगार्ड, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा रस्सियां और प्राथमिक बचाव उपकरण नहीं लगाए जा सकते? गंगु कुंड में पहला हादसा नहीं है। हर साल यहां कोई ना कोई डूबता है, लेकिन हर मौत के बाद सिर्फ अफसोस जताया जाता है, स्थायी समाधान नहीं खोजा जाता। प्रशासन की उदासीनता अब सवालों के घेरे में है। आखिर कब तक गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को तैरना सिखाने की कीमत जान देकर चुकाते रहेंगे? जहां जल स्रोतों की पूजा तो होती है, लेकिन वहां इंसानी जिंदगी की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है वहां की राजनीति और प्रशासन पर लानत है। एक और खास बात ये है कि गंगू कुण्ड को गंगाजी का चौथा पाया कहा जाता है। यहां पर कोई दिन ऐसा नहीं जाता कि कोई धार्मिक आयोजन नही हो। ऐसे महत्वपूर्ण् प्लेस पर भी अगर सुरक्षा नहीं है तो क्या सुरक्षा केवल नेताओं के लिए लालबत्ती लेकर घूमने के लिए है। कहां हैं सामाजिक संगठन, धार्मिक संगठनों से राजनीति करने वाले नेता??? गंगू कुण्ड की सुरक्षा का एक छोटा सा काम उनसे नहीं हो रहा है उन पर भी लानत है। हम खुद सोचें कि क्या हम सब तमाशबीन भीड़ में बदल तो नहीं गए हैं जिनके पास संवदेनाओं के नाम पर अपने पुरखों का दिया कुछ भी नहीं बचा है, सब कुछ केवल शो ओफ करने में रह गया है। अगर ऐसा नहीं है उम्मीद है कि इस हादसे के सबक सख्त होंगे,,,बहुत ज्यादा सख्त,,,नहीं तो हो सकता है अगला नंबर हम और आप में से ही किसी का हो…। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation 21 जून को महारुद्र, 22 जून को बहुमंजिला भवन का भूमि पूजन: श्री त्रिवेदी मेवाड़ा ब्राह्मण समाज की बैठक में तैयारियों को अंतिम रूप यूडी टेक्स पर गजब का खेल, रसूखदारों के आगे निगम के अफसर नतमस्तक, बिना एप्रोच वाले बकायदारों की खुलेआम कर रहे’मानहानि’