- मंत्रिपरिषद की बैठक में घोषणा : अशांत घोषित क्षेत्रों में सक्षम अधिकारी ही कर सकेगा संपत्ति हस्तांतरण का फैसला, सुरक्षा, एयरोस्पेस व सेमीकंडक्टर में निवेश को बढ़ावा
24 News Update जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक निवेश और तकनीकी नीतियों को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में विशेष रूप से अशांत घोषित क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की संपत्तियों की सुरक्षा, एयरोस्पेस एवं डिफेंस उद्योगों का विकास और राज्य की पहली सेमीकंडक्टर नीति के क्रियान्वयन पर ध्यान दिया गया।
अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की संपत्तियों और किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण के लिए कैबिनेट ने “The Rajasthan Prohibition of Transfer of Immovable Property and Provision for Protection of Tenants from Eviction from Premises in Disturbed Areas Bill, 2026” को मंजूरी दी। इस विधेयक के अनुसार, अशांत घोषित क्षेत्रों में संपत्ति का कोई भी हस्तांतरण सक्षम प्राधिकारी की पूर्वअनुमति के बिना अवैध माना जाएगा। उल्लंघन करने पर तीन से पांच वर्ष तक का कारावास और अर्थदंड का प्रावधान है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि इस विधेयक से न केवल स्थायी निवासियों की संपत्तियों की सुरक्षा होगी बल्कि इन क्षेत्रों में सामुदायिक सद्भावना और सामाजिक संरचना भी कायम रहेगी। विधेयक को अब विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा।
औद्योगिक और तकनीकी विकास को गति देने के लिए कैबिनेट ने राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी को भी अनुमोदित किया। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि नीति के तहत एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। नीति में निवेश वर्गीकरण, टर्नओवर लिंक्ड प्रोत्साहन, फ्लेक्सिबल लैंड मॉडल, बिजली और स्टाम्प शुल्क में छूट, कैप्टिव पावर प्लांट निवेश को स्थायी पूंजीगत निवेश में शामिल करने जैसे कई लाभ शामिल हैं। नीति के उद्देश्य के अनुसार राजस्थान को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाएगा।
राज्य की पहली सेमीकंडक्टर नीति-2025 को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली। राठौड़ ने बताया कि इस नीति के माध्यम से राजस्थान में स्वदेशी सेमीकंडक्टर उत्पादन, फैबलेस डिजाइन और उच्च तकनीक आधारित रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। नीति में विद्युत शुल्क, स्टाम्प और रूपांतरण शुल्क में छूट, 25% पुनर्भरण, रोजगार सृजन प्रोत्साहन, कौशल विकास और पर्यावरणीय परियोजनाओं में 50% लागत प्रतिपूर्ति जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर पार्कों में अक्षय ऊर्जा और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
मंत्रिपरिषद ने आरपीएससी में उप सचिव पद पर पदोन्नति अनुपात को भी 10:1 के हिसाब से संशोधित किया। इसके अलावा सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में संशोधन कर बाल विवाह में शामिल सरकारी कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान लागू किया गया। अब बालक की आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष से कम होने पर इसे बाल विवाह माना जाएगा।
कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी बड़े फैसले लिए गए। ग्राम उत्थान शिविर 23 जनवरी से दो चरणों में पूरे राज्य में आयोजित होंगे। इन शिविरों में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, जल संसाधन, ग्रामीण विकास सहित 12 विभागों की योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा। बीकानेर और जैसलमेर में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन भी मंजूर किया गया, जिससे राज्य की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
शिक्षा क्षेत्र में भी कदम उठाए गए। बसंत पंचमी 23 जनवरी को मेगा पीटीएम आयोजित किया जाएगा, जिसमें लगभग 65 लाख अभिभावकों की सहभागिता होगी। इसी दिन निपुण राजस्थान कार्यक्रम के तहत कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की पढ़ाई, लेखन और गणना क्षमता प्रदर्शित की जाएगी।
इस प्रकार मंत्रिपरिषद की बैठक ने सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक निवेश, तकनीकी प्रोत्साहन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राज्य की दिशा तय कर दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक के बाद कहा, “राजस्थान की प्रगति के लिए सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक निवेश का संतुलन जरूरी है, ताकि हर क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर सृजित हों।”
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