24 News update राजसमंद। राजसमंद में घुटनों के दर्द से परेशान एक रिटायर्ड प्रिंसिपल से घर पर इलाज करने के नाम पर 17.30 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, ठगी में तीन लोगों के शामिल होने की आशंका है। आरोपियों ने पहले एक युवक के जरिए पीड़ित परिवार से संपर्क किया। इसके बाद युवक ने अपनी मां के जरिए भरोसा कायम किया और फिर एक व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर बताते हुए घर पर इलाज किया।परिजनों के मुताबिक, कथित डॉक्टर ने घुटने की स्थिति गंभीर बताते हुए कैंसर होने और पैर काटने तक की आशंका जताकर परिवार को डराया। इसके बाद घुटने में चीरा लगाकर विशेष उपकरण से पस निकालने का दावा किया गया। परिवार से करीब 210 बार इस प्रक्रिया के नाम पर 10.50 लाख रुपए और दवाइयों, जांच, उपकरण व अन्य इलाज के नाम पर 6.80 लाख रुपए लिए गए।पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े बैंक खातों को खंगाला और संबंधित बैंकों के सहयोग से ठगी की रकम में से 7 लाख 25 हजार 499 रुपए पीड़ित परिवार को वापस दिलाए हैं। पुलिस अब आरोपियों की तलाश कर रही है। उदयपुर में हुई थी युवक से मुलाकातपीड़ित के बेटे ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2025 में उसकी मां घुटनों के दर्द से परेशान थीं और चलने में भी परेशानी होती थी। जनवरी 2025 में परिवार उन्हें उदयपुर के एक निजी अस्पताल में दिखाने लेकर गया था। लौटते समय चेतक सर्किल के पास एक युवक मिला। उसने अपना नाम नितिन अग्रवाल और निवासी उदयपुर बताया। युवक ने बातचीत के दौरान बताया कि उसकी मां भी घुटनों की इसी तरह की समस्या से परेशान थीं और दिल्ली के एक डॉक्टर से इलाज के बाद ठीक हो गईं। भरोसा दिलाने के लिए उसने अपनी कथित मां से भी पीड़ित की बातचीत करवाई। इसके बाद उसने एक व्यक्ति से फोन पर बात कराई, जिसे दिल्ली का डॉक्टर बताया गया। घर आकर इलाज करने का दिया भरोसापरिजनों के अनुसार, 4 फरवरी को कथित डॉक्टर ने फोन कर बताया कि वह महीने में एक बार उदयपुर आता है और जरूरत पड़ने पर घर पर ही मरीज को देख सकता है। अगले दिन उसने बताया कि वह अजमेर आया हुआ है और वहां से उदयपुर आने वाला है। इसी दौरान राजसमंद आकर इलाज कराने की बात हुई। 5 फरवरी को दोपहर करीब 12:13 बजे एक व्यक्ति टैक्सी से पीड़ित के घर पहुंचा। परिजनों के मुताबिक, उसने खुद को डॉक्टर बताया और घुटना देखने के बाद स्थिति बेहद गंभीर बताई। कैंसर और पैर काटने का डर दिखाने का आरोपपरिजनों का आरोप है कि कथित डॉक्टर ने घुटने में मवाद जमा होने और समय पर इलाज नहीं कराने पर कैंसर होने की बात कही। उसने दोनों पैर काटने तक की आशंका जताई। इससे परिवार घबरा गया और तत्काल इलाज शुरू करने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद कथित डॉक्टर ने घुटने पर चीरा लगाया और एक पीतलनुमा उपकरण घाव पर लगाया। परिवार के मुताबिक, घाव पर किसी रसायन जैसा पदार्थ भी लगाया गया था। इसके बाद कथित डॉक्टर ने उपकरण के जरिए घाव से मवाद जैसा पदार्थ निकालने का दावा किया। 210 बार प्रक्रिया के नाम पर मांगे 10.50 लाखपरिजनों के अनुसार, कथित डॉक्टर ने एक बार मवाद निकालने की फीस 5 हजार रुपए बताई। इसके बाद करीब 210 बार ऐसी प्रक्रिया करने की बात कहते हुए 10.50 लाख रुपए मांगे। इसके अलावा दवाइयों, जांच, उपकरण और अन्य उपचार के नाम पर 6.80 लाख रुपए अलग से मांगे गए। इस तरह कुल रकम करीब 17.30 लाख रुपए बताई गई। परिवार ने 2.30 लाख रुपए नकद दिए। बाकी रकम के लिए देवगढ़ स्थित एसबीआई शाखा पहुंचे, लेकिन पूरी नकदी नहीं निकल सकी। इसके बाद कथित डॉक्टर ने 15 लाख रुपए के दो चेक ले लिए और दिल्ली पहुंचकर संपर्क करने तथा दवाइयां भेजने की बात कही। पस की फोटो और डॉक्टर के साथ सेल्फी लेने से भी किया इनकारपरिजनों ने बताया कि जब उन्होंने कथित डॉक्टर द्वारा निकाले गए पदार्थ की फोटो लेने की इच्छा जताई तो उसने मना कर दिया। उसने इसे गंदगी बताते हुए फोटो नहीं लेने की बात कही। परिवार ने भावुक होकर उसके साथ सेल्फी लेने की कोशिश की तो उसने अपनी फोटो लेने से भी इनकार कर दिया। इन घटनाओं को परिवार ने बाद में संदिग्ध माना। दवा मांगने पर विदेश जाने का बताया बहाना12 फरवरी को जब पीड़ित परिवार ने कथित डॉक्टर से संपर्क कर दवा मांगी तो उसने करीब एक महीने के लिए बाहर जाने की बात कही और दवा उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिजनों को इलाज के नाम पर ठगी किए जाने का संदेह हुआ। परिवार ने 20 मार्च 2025 को देवगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने बैंक लेनदेन के आधार पर जांच शुरू की। दमन-दीव के खाते में पहुंची रकम, कई खातों में ट्रांसफरदेवगढ़ थाना प्रभारी मुकेश चौधरी के अनुसार, परिवार के पास आरोपियों की स्पष्ट तस्वीर या अन्य पहचान संबंधी जानकारी नहीं थी। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम दमन-दीव के एक एक्सिस बैंक खाते में जमा कराई गई थी। इसके बाद रकम को कई अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस जांच में कुछ खाते संदिग्ध/डमी पाए गए। संबंधित बैंकों से समन्वय कर पुलिस ने 5 अगस्त 2026 को 7,25,499 रुपए पीड़ित परिवार को वापस दिलाए। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation एमएलएसयू के प्रो. ढाका से जुड़े सेवा विवाद में हाईकोर्ट का आदेश, 27 मई के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक