-2014-15 में 135 परिणामी दुर्घटनाएं दर्ज की गई, जबकि 2025-26 में 28 फरवरी तक मात्र 14 दुर्घटनाएं दर्ज हुई-कवच प्रणाली विकसित कर रेलकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया24 News update उदयपुर। भारतीय रेल में सुरक्षा उपायों को लेकर पिछले कुछ वर्षों में किए गए विभिन्न उपायों के परिणामस्वरूप रेल दुर्घटनाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। आंकडों के अनुसार जहां वर्ष 2014-15 में 135 परिणामी दुर्घटनाएं दर्ज की गई, जबकि 2025-26 में 28 फरवरी तक मात्र 14 दुर्घटनाएं दर्ज हुई। इस लिहाज से दुर्घटनाओं में 90 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूरे देश भर में कई सारी उपाय रेल मंत्रालय की ओर से किए जा रहे हैं।सांसद डॉ मन्नालाल रावत द्वारा संसद में इस संबंध में किए गए अतारांकित प्रश्न पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी।रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेल में पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर व्यय को बढ़ाया गया है। वर्ष 2013-14 में यह व्यय 39,200 करोड रुपए था जो वर्ष 2026-27 तक यह बढकर 1,20,389 करोड रुपए हो गया है। मानवीय चूक के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए, 28 फरवरी .2026 की स्थिति के अनुसार 6,665 रेलवे स्टेशनों पर कांटों एवं सिगनलों के केंद्रीकृत परिचालन के साथ विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक अंतर्पाशन प्रणाली की व्यवस्था की गई है। समपार रेलफाटकों पर सुरक्षा का संवर्धन करने के लिए, 28 फरवरी 2026 की स्थिति के अनुसार 10,153 समपार रेलफाटकों पर अंतर्पाशन की व्यवस्था की गई है। 6,669 रेलवे स्टेशनों पर विद्युत साधनों द्वारा रेलपथ अभियोग के सत्यापन द्वारा रेलवे स्टेशनों के पूर्ण रेलपथ परिपथन की व्यवस्था की गई है। सिग्नल प्रणाली की संरक्षा से संबंधित मुद्दों जैसे अनिवार्य समरूपता जांच, परिवर्तन कार्य प्रोटोकॉल, समापन आरेखण तैयार करने आदि के संबंध में विस्तृत अनुदेश जारी किए गए हैं। प्रोटोकॉल के अनुसार सिग्नल एवं दूरसंचार उपस्करों के लिए डिस्कनेक्शन और रिकनेक्शन प्रणाली पर पुनः बल दिया गया है। लोको पायलटों की सतर्कता में सुधार लाने के लिए सभी रेलइंजनों में सतर्कता नियंत्रण लगाए गए हैं।कोहरे के दौरान विशेष सतर्कतासांसद डॉ रावत के प्रश्न पर रेल मंत्री ने बताया कि मास्ट पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड उपलब्ध कराए जाते हैं, जो विद्युतीकृत क्षेत्रों में सिग्नलों से दो शिरोपरि उपस्कर मास्ट से पहले मौजूद होता है, ताकि कोहरे के मौसम के कारण दृश्यता कम होने पर चालक दल को आगे मौजूद सिग्नल के बारे में सचेत किया जा सके।कोहरे से प्रभावित क्षेत्रों में लोको पायलटों के लिए जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस (एफएसडी) उपलब्ध कराया जाता है जो लोको पायलटों को अगले थलचिह्नों यथा सिगनल, समपार रेलफाटकों आदि की दूरी जानने में समर्थ बनाते हैं।आधुनिक रेल पथ का निर्माणरेल मंत्री ने बताया कि प्राथमिक रेलपथ नवीकरण करते समय आधुनिक रेलपथ संरचना इस्तेमाल की जा रही है। मानवीय त्रुटियों को कम से कम करने के लिए पीक्यूआरएस, टीआरटी, टी-28 आदि जैसी रेलपथ मशीनों के उपयोग द्वारा रेलपथ बिछाने का काम किया जा रहा है। दोष का पता लगाने और दोषपूर्ण पटरियों को समय पर हटाने के लिए आधुनिक प्रणाली से काम किया जा रहा है। रेलपथ परिसंपतियों की वेब आधारित ऑनलाइन निगरानी प्रणाली अर्थात युक्तिसंगत अनुरक्षण आवश्यकता का निर्णय लेने और साधन सामग्री को इष्टतम बनाने के लिए रेलपथ डेटाबेस और निर्णय सहायता प्रणाली को अपनाया गया है।पुलों का नियमित निरीक्षणरेल मंत्री ने बताया कि पुलों का नियमित निरीक्षण करके रेल पुलों की संरक्षा सुनिश्चित की जाती है। इन निरीक्षणों के दौरान आंकी गई दशाओं के आधार पर पुलों की मरम्मत व पुनर्स्थापन कार्य किया जाता है।यात्रियों को भी जागरुक किया जा रहाइसके साथ ही भारतीय रेल ने सभी सवारी डिब्बों में यात्रियों की व्यापक सूचना के लिए सांविधिक अग्नि सूचनाएं प्रदर्शित की गई हैं। प्रत्येक सवारी डिब्बे में आग संबंधी पोस्टर लगाए गए हैं ताकि यात्रियों को आग लगने की रोकथाम करने के लिए क्या करें और क्या न करें के बारे में शिक्षित और सचेत किया जा सके। इसमें सवारी डिब्बों के भीतर ज्वलनशील वस्तुएँ, विस्फोटकों को नहीं ले जाने, धूमपान नहीं करने, जुर्माना आदि से संबंधित संदेश शामिल हैं।कवच प्रणाली विकसित की गईकवच 4.0 संस्करण में विविध रेल नेटवर्क के लिए आवश्यक सभी प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं। यह भारतीय रेल की संरक्षा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अल्प अवधि के भीतर, भारतीय रेल ने स्वचालित रेलगाड़ी संरक्षण प्रणाली विकसित की गई, परीक्षण किया गया और उसे संस्थापित करना शुरू कर दिया है। व्यापक और विस्तृत परीक्षणों के बाद, कवच संस्करण 4.0 को उच्च घनत्व वाले दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्गों को कवर करते हुए 1452 मार्ग किलोमीटर पर निम्नानुसार सफलतापूर्वक चालू किया गया है।55 हजार कर्मियों को कवच का प्रशिक्षणसभी संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय रेल के केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थानों में कवच पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक 55,000 से अधिक तकनीशियनों, ऑपरेटरों और इंजीनियरों को कवच प्रौद्योगिकी के विषय पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसमें लगभग 47,500 लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट सम्मिलित हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... 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