24 News Update उदयपुर: दुर्घटना के शिकार लोगों की जान बचाने के लिए समय पर मेडिकल मदद और मल्टीडिसिप्लिनरी देखभाल की बहुत ज़रूरी बात पर ज़ोर देते हुए पारस हेल्थ उदयपुर ने एक पॉलीट्रॉमा प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी। यहां जाने-माने स्पेशलिस्ट ने कई जानलेवा चोटों वाले मरीज़ों का इलाज़ करने में आने वाली मुश्किलों और इमरजेंसी तथा ट्रॉमा केयर में हुए नए आविष्कारों पर चर्चा की।एक्सपर्ट पैनल में डॉ. नितिन कौशिक, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट; डॉ. एस. आर. चौधरी, कंसल्टेंट, न्यूरोसर्जरी; डॉ. राहुल खन्ना, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स; डॉ. सी. के. अमेटा, डायरेक्टर और HOD, ऑर्थोपेडिक्स; डॉ. आशीष सिंघल, कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स; डॉ. तरुण माथुर, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी; डॉ. मनीष कुलश्रेष्ठ, कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी; डॉ. अजीत सिंह, डायरेक्टर और HOD, न्यूरोसर्जरी; डॉ. अभिषेक व्यास, कंसल्टेंट, जनरल और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी; और प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुमित सिंघल शामिल थे। एक्सपर्ट्स ने बताया कि पॉलीट्रॉमा ऐसी गंभीर स्थिति होती है, जिसमें शरीर के कई अंग एक साथ गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। ऐसे मामले अक्सर तेज रफ्तार सड़क दुर्घटनाओं, ऊंचाई से गिरने या औद्योगिक हादसों में देखने को मिलते हैं। ऐसे मरीजों की जान बचाने और उन्हें बेहतर तरीके से स्वस्थ करने में केवल चोट की गंभीरता ही नहीं, बल्कि समय पर उपलब्ध स्पेशलाइज्ड ट्रॉमा केयर भी अहम भूमिका निभाती है।मीडिया को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि पॉलीट्रॉमा वाले मरीज़ों को अक्सर ब्रेन, स्पाइन, छाती, पेट, पेल्विस और हाथ-पैरों में एक साथ चोटें लगती हैं, जिससे इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीज़ों का इलाज़ करने के लिए इमरजेंसी डॉक्टरों, ट्रॉमा सर्जनों, न्यूरोसर्जनों, ऑर्थोपेडिक सर्जनों, क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्टों, एनेस्थिसियोलॉजिस्टों, रेडियोलॉजिस्टों और रिहैबिलिटेशन एक्सपर्ट्स के बीच मिलकर काम करने की ज़रूरत होती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जल्दी से डायग्नोसिस, स्टैंडर्ड ट्रॉमा प्रोटोकॉल का पालन, ज़रूरत पड़ने पर तुरंत सर्जिकल इंटरवेंशन, और गोल्डन आवर, यानी चोट लगने के बाद पहले घंटे में पूरी क्रिटिकल केयर से बचने की दर और फंक्शनल रिकवरी में काफ़ी सुधार होता है।पारस हेल्थ उदयपुर के फैसिलिटी डॉयरेक्टर श्री अनुभव सुखवानी ने इस अवसर पर कहा, “ट्रॉमा केयर समय के ख़िलाफ़ एक लड़ाई जैसा होता है क्योंकि इसमें हर एक सेकेंड मायने रखता है। पॉलीट्रॉमा को सफलतापूर्वक मैनेज करने के लिए न केवल एडवांस्ड मेडिकल टेक्नोलॉजी की ज़रूरत होती है, बल्कि कई फील्ड के स्पेशलिस्ट के बीच करीबी तालमेल की भी ज़रूरत होती है, जो मरीज़ को स्टेबल करने और उसका इलाज करने के लिए एक साथ काम करते हैं। पारस हेल्थ उदयपुर में हम व्यापक ड्रामा केयर प्रदान करने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। हमारे यहां ड्रामा केयर अनुभव क्लीनिकल टीम, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और साक्ष्य आधारित प्रोटोकॉल द्वारा समर्थित होती है। इस पहल के जरिए हम समय पर मेडिकल मदद के महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं और स्पेशल ट्रॉमा केयर में भरोसा बढ़ाना चाहते हैं।”पैनल ने भारत में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या पर भी ही जोर दिया और जनता के बीच सड़क सुरक्षा नियमों, तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स और बिना देर किए एक अच्छी तरह से इक्विप्ड ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचने के महत्व को लेकर जागरूकता का भी आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मल्टीडिसिप्लिनरी एक्सपर्टीज़, एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स और क्रिटिकल केयर इंफ्रास्ट्रक्चर से सपोर्टेड इंटीग्रेटेड ट्रॉमा सिस्टम, गंभीर रूप से घायल मरीज़ों में मौत की दर और लंबे समय तक चलने वाली विकलांगता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस में पारस हेल्थ उदयपुर के स्पेशलिस्ट की टीम के ज़रिए एडवांस्ड इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर देने के वादे पर ज़ोर दिया गया। हॉस्पिटल ने कहा कि गंभीर और कई चोटों वाले मरीज़ों को बचने और ठीक होने की संभावना बढ़ाने के लिए जल्दी और एक्सपर्ट इलाज की ज़रूरत होती है। हॉस्पिटल ने लोगों से किसी भी बड़े एक्सीडेंट के बाद तुरंत मेडिकल मदद लेने की भी अपील की, क्योंकि स्पेशल ट्रॉमा सेंटर में जल्दी इलाज से जान बच सकती है और लंबे समय तक विकलांगता का खतरा कम हो सकता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation आदि वात्सल्य तीर्थ धाम बस्सी में धर्मालंकार आचार्य रयण सागर गुरु मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 5-6 जुलाई को