उदयपुर. चर्चित दो करोड़ रुपए की रिश्वत मामले में गिरफ्तार एसओजी के एएसपी मुकेश कुमार सोनी और कथित दलाल सज्जन सिंह जैन से जुड़े मामले में परिवादी निरंजन मोगरा ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। मोगरा के अनुसार, दलाल सज्जन सिंह ने पहले एक करोड़ रुपए की मांग की थी, लेकिन बाद में दो करोड़ रुपए की डिमांड बताई। इसके बाद वह उसे फतहसागर झील किनारे रानी रोड पर कार में एएसपी सोनी से मिलवाने ले गया। परिवादी का दावा है कि मुलाकात के दौरान रिश्वत की रकम कम करने की बात कही गई, लेकिन एएसपी सोनी चुप रहा। करीब पांच मिनट बाद उसने अपने मोबाइल की स्क्रीन पर ‘2CR’ लिखकर कथित तौर पर संकेत दिया कि दो करोड़ रुपए की मांग ही अंतिम है। मोगरा के अनुसार, मुलाकात के दौरान जाते समय एएसपी सोनी ने उससे कहा था कि 30 सितंबर को चार्जशीट पेश कर दूंगा, इससे पहले व्यवस्था कर देना। हालांकि, ये सभी आरोप परिवादी के बयान पर आधारित हैं और मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तथा अदालत में सामने आने वाले तथ्यों से इनकी पुष्टि होना बाकी है। घर से जब्त सामान रिकॉर्ड में नहीं दिखाने का आरोप निरंजन मोगरा ने आरोप लगाया कि 4 अगस्त को एसओजी ने उसे और उसकी पत्नी, सेवानिवृत्त अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया को गिरफ्तार किया था। इस दौरान उनके घर से जमीन से जुड़े दस्तावेज, करीब दो किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए जब्त किए गए थे। मोगरा का कहना है कि घर से सोने की घड़ी, बैंगल और डीवीआर भी लिए गए थे, लेकिन इन्हें जब्ती के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। उसके अनुसार इन सामान की कीमत करीब 6 से 7 लाख रुपए थी। मोगरा ने बताया कि 25 अगस्त को जमानत के बाद जब वह घर पहुंचा तो ये सामान वहां नहीं मिला। जब एसओजी के स्टाफ से इसके बारे में पूछा गया तो कथित तौर पर जवाब मिला कि ‘एएसपी साहब बताएंगे।’ उसने यह भी आरोप लगाया कि एसओजी कार्यालय में जसवंत राव नाम के रीडर ने उसकी पत्नी से एसबीआई के खाली चेक पर हस्ताक्षर करवाए थे। पहले एक करोड़, फिर दो करोड़ की मांग का आरोप मोगरा के मुताबिक, जब्त सोना छुड़ाने और मामले को हल्का करवाने के लिए सज्जन सिंह जैन ने उससे संपर्क किया था। मोगरा का कहना है कि सज्जन सिंह ने खुद को एएसपी का परिचित बताते हुए कहा था कि वह जब्त सामान छुड़वा सकता है और केस को भी हल्का करवा सकता है। इसके बदले पहले एक करोड़ रुपए मांगे गए। कुछ दिन बाद सज्जन सिंह ने कथित तौर पर कहा कि साहब ने अब दो करोड़ रुपए मांगे हैं। मोगरा के अनुसार उसने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई और एएसपी से सीधे मुलाकात कराने को कहा। इसके बाद सज्जन सिंह उसे अपनी कार में फतहसागर की रानी रोड ले गया। कुछ देर बाद एएसपी मुकेश सोनी वहां निजी कार से पहुंचे। मोगरा का दावा है कि सज्जन सिंह एएसपी की कार की आगे वाली सीट पर बैठा, जबकि उसे पीछे बैठाया गया। यहीं दोनों के बीच कथित रिश्वत की डील को लेकर बातचीत हुई। ‘100 प्रतिशत काम होने’ की गारंटी देने का आरोप परिवादी के अनुसार, सज्जन सिंह ने उसे भरोसा दिलाया था कि ‘100 प्रतिशत काम हो जाएगा।’ साथ ही केस को पूरी तरह हल्का करवाने की बात भी कही थी। मोगरा का आरोप है कि सज्जन सिंह बार-बार उसे फोन कर कहता था कि साहब के फोन आ रहे हैं और जल्दी व्यवस्था करनी होगी। कथित तौर पर वह यह भी कहता था कि ‘काम फ्री में नहीं होगा, पैसे दोगे तो ही काम होगा।’ शराब केस के दौरान हुई थी दोनों की पहचान मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, सज्जन सिंह जैन पहले शराब व्यवसाय से जुड़ा रहा है। शराब से जुड़े एक मामले के दौरान उसकी मुलाकात तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी से हुई थी। इसी दौरान दोनों के बीच परिचय हुआ और बाद में मेलजोल बढ़ा। 272 प्लॉट से शुरू हुआ था मामला यह पूरा मामला उदयपुर के बहुचर्चित 272 प्लॉट घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 2012 में यूआईटी से नगर निगम को हस्तांतरित की गई कॉलोनियों में खाली पड़े करोड़ों रुपए के भूखंडों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार कराए गए। कथित तौर पर फर्जी लोगों के नाम नामांतरण खोलकर इन भूखंडों को आगे बेच दिया गया। इस मामले में नगर निगम की ओर से वर्ष 2022 में सूरजपोल थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अप्रैल 2022 से एसओजी इसकी जांच कर रही है। इसी जांच के तहत 4 अगस्त को हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया गया था। मामले में आरोप है कि केस में एफआर लगाने और जब्त सामान वापस दिलाने के नाम पर दो करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई। एसीबी उदयपुर ने शनिवार को कथित तौर पर दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेते सज्जन सिंह जैन को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रविवार को एसओजी के एएसपी मुकेश कुमार सोनी को भी गिरफ्तार किया गया। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। वर्ष 2022 में कांग्रेस पार्षद रहे अजय पोरवाल ने 272 प्लॉट के मामले को प्रमुखता से उठाया था। जांच के बाद नगर निगम ने 48 पट्टे निरस्त किए थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया तथा उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन भी इस मामले को अलग-अलग मौकों पर उठा चुके हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation गवरी को पाखंड बताने वाली टिप्पणी पर बवाल, कलेक्ट्री पर प्रदर्शन, सोशल मीडिया वीडियो में गवरी के पात्रों के श्रृंगार और पुरुषों के महिला स्वरूप पर उठाए थे सवाल, बाद में मांगी माफी 3 लाख 55 हजार लीटर से अधिक वाॅश नष्ट, 416 हुए गिरफ्तार