24 न्यूज़ अपडेट उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर एवं सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर द्वारा संयुक्त तत्वावधान में चल रही पंद्रह दिवसीय नाट्य कार्यशाला का समापन मंगलवार को दर्पण सभागार में संपन्न हुआ। पन्द्रह दिवसीय कार्यशाला रंगमंच के अंतिम दिन कार्यशाला में तैयार की गयी दो नाट्य प्रस्तुतियों लॉलीपॉप और अनदेखी अनकही की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने बहुत सराहा।पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक फ़ुरकान खान ने बताया की केन्द्र द्वारा नित नए नवाचारों के तहत इस पन्द्रह दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के लिए चुने गए विषय सामाजिक और राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में समसामयिक हैं और आम जन के जीवन से जुड़े हैं। इसमें करीब 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया।इस नाटक के लेखक एवं निर्देशक विशाल भट्ट थे। स्टेज मैनेजर आसिफ शेर अली खान थे। कलाप्रेमियों ने इस नाटक तथा उसके पात्रों द्वारा किए गए अभिनय को सराहा। अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, सिद्धांत भटनागर, कार्यशाला की आयोजन सचिव डॉ भानुप्रिया रोहिला, विश्वविद्यालय के फैक्टली सदस्य, विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश चांदवानी ने किया। नाटक की कहानीःप्रथम नाटक लॉलीपॉप वर्तमान राजनैतिक एवं सामाजिक परिस्थिति पर एक सटीक कटाक्ष करता है। इस नाटक में राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त बांटी जा रही रेवड़ी एवं प्रलोभनों की प्रवृति और समाज पर उसके पड़ रहे प्रभाव को एक लोक कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। मुफ्त में मिल रही चीजों को लेने को आदत और सोच से समाज में बढ़ रहे मुफ्तखोरी की प्रवृति और आलस्य और कामचोरी, अपराध दर में वृद्धि आदि भी जुड़े हुए हैं! यह नाटक सामाजिक न्याय और मानसिकता को समसामयिक रूप से परिभाषित करता है तथा हमें मुफ्तखोरी और उस से जनित परिस्थितियों को समझाने की कोशिश की है। दूसरा नाट्य अनदेखी अनकही समाज में स्थापित लिंग भेद की अवधारणा को एक नए एवं गैर पारंपरिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। नारी के गृहस्थी संभालने और पुरुष के कमाने जाने की अवधारणा, पुरुष के सपने, शक्ति, इच्छा, त्याग और भावनाओं को पारिवारिक दृष्टिकोण में नए तरीके से देखने दिखाने का प्रयास किया गया है। पुरुष की समाज में स्थापित अवधारणा जो कि संवेदना शून्य एवं भावना शून्य की है उसे चुनौती देते हुए पुरुष की मानसिक एवं भावनात्मक एकात्मकता को समझने की अपील करता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation इनकम के चक्कर में गांधी ग्राउंड का कमर्शियल यूज, खिलाड़ी कहां खेलें, क्रीड़ा परिषद को देने की मांग बेसहारा लोगों की अस्थियों का हरिद्वार में करेंगे विसर्जन, 10 अप्रैल को अशोक नगर श्मशान गो शाला से रवाना होगा दल