24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदास दास धाम बड़ा रामद्वारा में चातुर्मास में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत तिलकराम ने सत्संग में बताया कि भारतीय संस्कृति द्वारा ज्ञान का प्रचार किया जाता है ।
संत ने कहा रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामचरण महाराज थे । उनका प्रादुर्भाव विक्रम संवत 1776 में हुआ था । इन्होंने वि.सं. 1808 भाद्रपद शुक्ल 7 गुरुवार को 31 वर्ष की उम्र में दीक्षा ली थी तथा नाम रामकृष्ण श्री राम चरण हुआ । स्वामी श्री रामचरण जी महाराज का जन्म विक्रम संवत 1776 सन 1720 (20 फरवरी 1720 ) मारघ शुक्ल चतुर्दशी शनिवार को बखतराम जी ग्राम बनवाड़ा में शिला पूज्य माता देऊजी की कोख से हुआ । संत ने कहा कि दान और त्याग से जीवन धन्य होता है इससे जीवन में प्रसन्नता सदैव बनी रहती है । ऐसा करने से हमें साधना में सफलता मिलती है । दान केवल धन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उचित समय पर सद्भाव से दिया गया छोटा- सा दान भी अनंत पुण्य का संचय करता है । जल, अन्न अथवा औषधि का अल्प दान भी असंख्य पुण्य का कारण बनता है । त्याग से आत्मा निर्मल होती है और दान से पुण्य की वर्षा होती है । दान से जीव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है । दान निर्मल मन से करना चाहिए, जो मनुष्य धन-धन करता रहता है, वह धन कब तक है, जब तक निधन नहीं हो जाता । सत्संग में कुमति का नाश होता है और सद्बुद्धि का आगमन होता है । सत्संग में जाने वाले का परिचय उसकी जाति, पेशा या धन से नहीं होता, बल्कि उसे सत्संगी कहा जाता है व भक्त भी कहते हैं । संसार की सभी समस्याओं का हल सत्संग में है । सत्संग में दया है ,संतोषी, सच है जो दुनिया में कहीं नहीं मिलता । प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के जन्मदाता अध्धाचार्य श्री 1008 स्वामीजी श्री रामचरण जी महाराज का 275 वॉ दीक्षा दिवस संत तिलकराम महाराज के के सानिध्य में मनाया गया । इस अवसर पर संत एवं भक्तों द्वारा स्वामी रामचरण जी महाराज की तस्वीर का पूजन, पादुका पूजन, वाणीजी पाठ, प्रवचन ,आरती एवं प्रसाद वितरण ( निलेश हलवाई द्वारा ) का कार्यक्रम किया गया । कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष सुधीर वाडेल, विजय पंचाल, सुरेंद्र शर्मा, अनूप परमार, बंसीलाल दर्जी ,प्रेमलता सुथार ,राजेश्वरी शर्मा ,विमला ठाकुर ,भानु सेवक, नाथू परमार ,विष्णु भासरिया, सुभाष शर्मा ,जिग्नेश भावसार, रमेश सोनी, मन्जुला भावसार, मंजुला भावसार ,गुलाब भावसार उपस्थित रहे। संत प्रसाद संगीता सेवक परिवार का रहा।
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