24 News Update उदयपुर । नारायण सेवा संस्थान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रेम और सहयोग से कोई सपना अधूरा नहीं रहता। शनिवार को लियों का गुड़ा स्थित सेवा महातीर्थ में संस्थान का 44वां नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह गणपति पूजन और मंगल वंदना के साथ प्रारंभ हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन में 25 दिव्यांग और 26 सकलांग सहित 51 जोड़े जीवनसाथी बनेंगे। सुबह 10:15 बजे पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, पलक अग्रवाल, जगदीश आर्य और देवेंद्र चौबीसा ने गणेश पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच पर प्रस्तुत गणेश वंदना, शिव-पार्वती विवाह और राधा-कृष्ण नृत्य-नाटिकाओं ने वातावरण को भक्ति और आनंद से सराबोर कर दिया।हल्दी-मेहंदी रस्मों में छलकी भावनाएँदुल्हनों की हल्दी और मेहंदी की रस्में उत्साह से संपन्न हुईं। ढोलक की थाप पर गूंजते पारंपरिक गीतों से महातीर्थ गूंज उठा। दुल्हनों ने भावुक होकर कहा, “यह दिन हमारे लिए सपने जैसा है, जिसे हम सोच भी नहीं सकते थे।”विशिष्ट अतिथियों ने दिया आशीर्वादसमारोह में मुंबई से महेश अग्रवाल और सतीश अग्रवाल, कोयंबटूर से वेंकटेश्वर, दिल्ली से प्रवीण गौतम व एस.पी. कालरा सहित कई भामाशाह और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर कन्यादानियों और भामाशाहों का सम्मान भी किया गया। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा, “जिन्होंने कभी निःशक्तता और निर्धनता को नियति मान लिया था, वे अब जीवन साथी संग नई शुरुआत कर रहे हैं। यह समाज और भामाशाहों के सहयोग का प्रतिफल है।”अब तक संस्थान के 43 सामूहिक विवाहों में 2459 जोड़ें अपने जीवन की नई राह पर अग्रसर हो चुके हैं। इनमें से कई पूर्व जोड़े इस बार अपने बच्चों के साथ आकर नवविवाहितों को आशीर्वाद दे रहे हैं।रंगारंग प्रस्तुतियों से महोत्सव यादगारशाम को महिला संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह की रौनक बढ़ा दी। दूल्हा-दुल्हनों और परिजनों ने पारंपरिक गीतों पर झूमते हुए इस क्षण को अविस्मरणीय बनाया। इस बार राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार से आए जोड़ों ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। संस्थान संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’ और कमला देवी ने जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि “जीवन में सबसे बड़ा धन प्रेम और साथ है, जो हर कठिनाई को आसान बना देता है।” वास्तव में, यह आयोजन केवल विवाह का नहीं, बल्कि सेवा, आशा और नए जीवन की शुरुआत का महोत्सव है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भारतीय संस्कृति द्वारा ज्ञान का प्रचार किया जाता है-संत तिलकराम महाराज डूंगरपुर: बुजुर्ग महिला से दिनदहाड़े चेन स्नैचिंग, पीछा करने पर स्कूटी छोड़कर फरार हुए बदमाश; ग्रामीणों का पुलिस गश्त पर सवाल