उदयपुर। सुविवि में प्रशासनिक स्तर पर बहुत ही गजब का खेल चल रहा है। खेल मैदानों पर पहला हक वहां के स्टूडेंट खिलाडियों का है मगर उनको किराए पर देकर टूर्नामेंट खेलने जा रही टीमों के खिलाड़ियों को दर दर भटकने पर छोड़ दिया गया है। ये मजाक नहीं, सरासर अन्याय है और इसका तत्काल संज्ञान राज्यपाल के स्तर पर लिया जाना जरूरी है। खेल मैदानों से आखिर इतनी कितनी कमाई हो रही है कि खुद अपनी ही प्रतिष्ठा दांव पर लगाने पर तुले हुए हैं। आपको बता दें कि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर का नाम जब खेलों में उपलब्धियों के लिए लिया जाता है, तो गर्व होना चाहिए। सब श्रेय लेने के लिए आगे आ जाते हैं। खिलाड़ियों के बीच प्रशासनिक चेहरे चमकते हैं मगर अब तो उल्टा हो रहा है। जब खेलों के लिए जीत की तैयारी की बात आ रही है तो यही चहरे खिलाड़ियों के ही दुश्मन जैसे बनकर सामने खड़े हो गए हैं। यही विश्वविद्यालय अपने ही खिलाड़ियों के साथ अन्याय और उपेक्षा करता नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय के खिलाड़ी अभ्यास के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि विश्वविद्यालय का स्पोर्ट्स बोर्ड खेल मैदानों को बाहरी लोगों को किराए पर देकर कमाई में जुटा हुआ है।सबसे चिंताजनक और संवेदनशील मामला विश्वविद्यालय की महिला क्रिकेट टीम का है, जिसने गत वर्ष पश्चिमी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय महिला क्रिकेट प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया था। आज वही टीम अपने ही विश्वविद्यालय में प्रैक्टिस के लिए मैदान से वंचित है। आदेश तो निकला, लेकिन मैदान नहीं मिला सूत्रों के अनुसार स्पोर्ट्स बोर्ड द्वारा महिला क्रिकेट टीम के लिए प्रैक्टिस टेम्प (अभ्यास शिविर) का आदेश तो जारी कर दिया गया है, लेकिन व्यवहारिक रूप से टीम को अभ्यास के लिए कोई मैदान उपलब्ध नहीं कराया गया। स्थिति यह है कि— प्रतियोगिता की तिथियां घोषित हो चुकी हैं, खिलाड़ी अभ्यास के लिए तैयार हैं, लेकिन मैदान बाहरी लोगों को किराए पर दिया जा चुका है। यह सवाल स्वाभाविक है कि जब विश्वविद्यालय की अधिकृत टीम अभ्यास से वंचित है, तब बाहरी तत्वों को खेलने की अनुमति किस अधिकार से दी जा रही है? अब यह मामला केवल अव्यवस्था का नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के मौलिक और शैक्षणिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले खिलाड़ी न केवल छात्र हैं, बल्कि वे विश्वविद्यालय के आधिकारिक प्रतिनिधि भी और उसका गौरव हैं। ऐसे में यह प्रश्न गंभीर हो जाता है कि— क्या स्पोर्ट्स बोर्ड को यह अधिकार है कि वहविश्वविद्यालय के खिलाड़ियों के लिए आरक्षित खेल मैदानों को पैसे लेकर बाहरी लोगों को सौंप दे? क्या यह खेल नीति और विश्वविद्यालय अधिनियम की भावना के विपरीत नहीं है? क्या महिला खिलाड़ियों के साथ यह प्रत्यक्ष भेदभाव नहीं माना जाएगा?महिला खिलाड़ियों के साथ दोहरा अन्यायमहिला क्रिकेट टीम के पास न तो समुचित अभ्यास सुविधा है, न वैकल्पिक व्यवस्था। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब यह टीम पहले ही अपनी क्षमता और प्रतिभा साबित कर चुकी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि महिला खिलाड़ियों को पर्याप्त संसाधन न देना सीधे तौर पर उनके भविष्य और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। तो फिर जवाबदेही तय होगी या नहीं?? यदि शीघ्र ही इस मामले में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर विश्वविद्यालय की खेल साख, खिलाड़ियों के मनोबल और भविष्य की प्रतिभाओं पर पड़ेगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय अतिथि संकाय संगठन की कार्यकारिणी का पुनर्गठन, डॉ. मोहित नायक सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित अवैध खनन पर प्रशासन का कड़ा प्रहार, देवलिया में सवा सौ टन क्वार्ट्ज जब्त, कुराबड़ में फेल्सपार व मेसनरी स्टोन पकड़ा, ईसवाल में अवैध खनन के दो प्रकरण दर्ज, खनन माफिया में हड़कंप