उदयपुर/जयपुर। कन्हैयालाल हत्याकांड में आतंकवाद की धाराओं को हटवाने की आरोपियों की कोशिश को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मोहम्मद रियाज अत्तारी, गौस मोहम्मद समेत आठ आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत तय आरोपों से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरोपियों की दोनों अपीलें खारिज करते हुए एनआईए की विशेष अदालत के आरोप तय करने संबंधी आदेशों में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इसका सीधा मतलब है कि आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और आतंकवाद से जुड़ी धाराओं में मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने 5 नवंबर को दिए फैसले में स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के स्तर पर अदालत को मिनी ट्रायल करने या साक्ष्यों की बारीकी से जांचकर उनकी विश्वसनीयता का अंतिम आकलन करने की जरूरत नहीं है। इस चरण पर अदालत को यह देखना होता है कि अभियोजन की ओर से पेश सामग्री प्रथम दृष्टया अपराध का मामला बनाती है या नहीं। यदि उपलब्ध सामग्री से गंभीर संदेह पैदा होता है तो आरोप तय किए जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपियों की ओर से उठाए गए कई सवाल साक्ष्यों के मूल्यांकन से जुड़े हैं, जिनका परीक्षण मुकदमे के दौरान होना चाहिए। सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद, साजिश के आरोप तक पहुंची जांचयह मामला 28 जून 2022 को उदयपुर के मालदास स्ट्रीट स्थित सुप्रीम टेलर्स में कन्हैयालाल की निर्मम हत्या से जुड़ा है। एनआईए की जांच के अनुसार, नूपुर शर्मा की टेलीविजन बहस में की गई टिप्पणी से जुड़े सोशल मीडिया विवाद के बाद कन्हैयालाल को धमकियां मिली थीं। अभियोजन का आरोप है कि इसी पृष्ठभूमि में हत्या की साजिश रची गई। दो मुख्य हमलावरों ने दुकान में घुसकर कन्हैयालाल की हत्या की और वारदात का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। एनआईए ने मामले को व्यापक साजिश और आतंक फैलाने की कोशिश के रूप में जांचा। जांच के बाद आरोपपत्र पेश किया गया और विशेष अदालत ने 12 जनवरी तथा 13 फरवरी 2024 को आरोप तय किए थे। इन्हीं आदेशों को आठ आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।बचाव पक्ष की दलील- आतंकी संगठन से संबंध नहीं, वीडियो में भी ऐसा कुछ नहींआरोपियों की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद सलीम, सैयद सआदत अली और अन्य वकीलों ने दलील दी कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे साबित हो कि आरोपी किसी प्रतिबंधित या आतंकवादी संगठन के सदस्य थे अथवा उसके निर्देश पर काम कर रहे थे। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कन्हैयालाल की ओर से सोशल मीडिया पर टिप्पणी साझा किए जाने से पैदा हुआ विवाद अपने आप में यूएपीए जैसे कठोर कानून को लागू करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। बरामद वीडियो की सामग्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि उसमें ऐसा कुछ नहीं है, जिससे सार्वजनिक शांति या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की बात साबित हो। एनआईए का जवाब- साजिश केवल संगठन की सदस्यता से साबित नहीं होतीएनआईए की ओर से इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा गया कि यूएपीए की धारा 18 के तहत आपराधिक साजिश का दायरा व्यापक है। इसमें केवल आतंकवादी वारदात को अंजाम देना ही नहीं, बल्कि उसकी योजना बनाना, तैयारी करना, उकसाना और सहायता करना भी शामिल है। जांच में सामने आई कथित धमकियों, वीडियो, आरोपियों के आपसी संपर्क और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अलग-अलग देखने के बजाय समग्र रूप से परखना जरूरी है। एनआईए का कहना था कि किसी आतंकवादी संगठन की औपचारिक सदस्यता नहीं होना अपने आप में आरोपों से मुक्ति का आधार नहीं बन सकता। साजिश का प्रत्यक्ष प्रमाण जरूरी नहीं, परिस्थितियों की कड़ी भी अहमहाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को आरोपों से मुक्ति का निर्णायक आधार मानने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि आपराधिक साजिश का प्रत्यक्ष प्रमाण हर मामले में उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। परिस्थितियों की सामूहिक कड़ी से भी साजिश के समझौते का अनुमान लगाया जा सकता है। वीडियो में कौन से शब्द हैं, आरोपियों का किसी संगठन से संबंध था या नहीं और अन्य साक्ष्यों का वास्तविक महत्व क्या है, इन सभी पहलुओं का परीक्षण मुकदमे के दौरान होगा। अदालत ने यह भी माना कि आरोप तय करने के आदेशों में ऐसी कोई स्पष्ट अवैधता, विकृति या अधिकार क्षेत्र संबंधी त्रुटि नहीं है, जिसके आधार पर उनमें हस्तक्षेप किया जाए।आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहींहाईकोर्ट ने दोनों अपीलें खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश बरकरार रखे। हालांकि खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अपीलों के निस्तारण के दौरान की गई टिप्पणियों को आरोपियों के दोषी होने का निष्कर्ष नहीं माना जाएगा। ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेगा और मुकदमे की सुनवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी। यानी आठों आरोपियों को फिलहाल यूएपीए की धाराओं से राहत नहीं मिली है, लेकिन उनकी दोषसिद्धि का फैसला अभी होना बाकी है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation दीपावली पर रेलवे का भीड़ प्रबंधन प्लान तैयार, उदयपुर-अजमेर समेत तीन स्टेशन हाई अलर्ट पर, 24 घंटे CCTV से निगरानी और यात्रियों के लिए होल्डिंग एरिया