24 News Update उदयपुर। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराणा भूपाल चिकित्सालय (एमबी हॉस्पिटल) में पिछले आठ वर्षों से गरीब मरीजों और उनके परिजनों की भूख मिटाने वाली निःशुल्क भोजनशाला पिछले 38 दिनों से बंद पड़ी है। 25 मई को शॉर्ट सर्किट के कारण गैस सिलेंडर में आग लगने की मामूली घटना के बाद सुरक्षा कारणों से भोजनशाला पर ताला लगा दिया गया था। तब से प्रतिदिन सैकड़ों जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को भोजन के लिए अस्पताल परिसर से बाहर भटकना पड़ रहा है, जबकि भोजनशाला में रखा राशन और खाद्य सामग्री भी खराब होने की कगार पर पहुंच गई है।भोजनशाला संचालित करने वाले संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि यहां प्रतिदिन करीब 600 लोगों को दोनों समय निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता था। मरीजों के लिए पौष्टिक दलिया की भी व्यवस्था रहती थी। इस सेवा का लाभ दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों, उनके परिजनों, वृद्धजनों, मजदूर वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिलता था। अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों पर पहले ही दवाइयों, जांच, यात्रा और ठहरने का आर्थिक बोझ रहता है। ऐसे में यह भोजनशाला उनके लिए सबसे बड़ा सहारा थी। बाहर खाना खरीदने की मजबूरी, कई परिवार एक समय भोजन पर निर्भरभोजनशाला बंद होने के बाद जरूरतमंद परिवारों को मजबूरी में बाहर होटलों, ढाबों और ठेलों पर पैसे खर्च कर भोजन करना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर कई परिवार एक समय का भोजन कर दिन गुजारने को विवश हैं। सुबह से देर शाम तक अस्पताल में मरीजों की सेवा में लगे परिजनों के सामने भोजन की व्यवस्था सबसे बड़ी समस्या बन गई है। प्रशासन से कई बार गुहार, समाधान अब तक नहींसंस्थान के अनुसार घटना के तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन ने भोजनशाला को सील कर दिया था। इसके बाद से संस्थान ने कई बार अस्पताल प्रशासन से वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का आग्रह किया ताकि सेवा बाधित न हो, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इस बीच भोजनशाला में रखा राशन, खाद्य सामग्री और अन्य सामान लंबे समय तक बंद रहने के कारण खराब होने लगा है। जनप्रतिनिधियों तक पहुंची बात, फिर भी नहीं निकला रास्ताभोजनशाला को दोबारा शुरू कराने के लिए संस्थान के पदाधिकारियों ने शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा तथा जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल को भी स्थिति से अवगत कराया है। संस्थान का कहना है कि अस्पताल प्रशासन यदि वैकल्पिक स्थान उपलब्ध करा दे तो सेवा तुरंत पुनः शुरू की जा सकती है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय नहीं हुआ है। केवल भोजन नहीं, मानव सेवा का अभियानसंस्थान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल भोजन वितरण नहीं बल्कि मानव सेवा का निरंतर चलने वाला अभियान है। पिछले आठ वर्षों में इस भोजनशाला ने हजारों गरीब और जरूरतमंद मरीजों व उनके परिजनों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया है। यहां किसी की जाति, धर्म, क्षेत्र या पहचान नहीं पूछी जाती, केवल उसकी जरूरत देखी जाती है। यही कारण है कि आज भी अनेक लोग भोजनशाला के बाहर पहुंचकर पूछते हैं कि सेवा दोबारा कब शुरू होगी। रोज खाली रह रही हैं 600 थालियांजिस रसोई से प्रतिदिन लगभग 600 लोगों के लिए भोजन तैयार होता था, वहां पिछले 38 दिनों से ताला लटका हुआ है। इस अवधि में हजारों जरूरतमंद भोजन से वंचित रह चुके हैं। सबसे अधिक प्रभावित वे परिवार हैं जो सीमित आय के बावजूद गांवों से इलाज के लिए उदयपुर आते हैं और जिनके लिए यह भोजनशाला दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण सहारा थी। भूख इंतजार नहीं करतीअस्पताल में भर्ती मरीज की पीड़ा जितनी बड़ी होती है, उससे कम चिंता उसके परिजनों की नहीं होती। इलाज, दवाइयों और जांचों के बीच कई परिवारों के पास भोजन खरीदने तक के पैसे नहीं बचते। ऐसे समय यह निःशुल्क भोजनशाला केवल भोजन नहीं परोसती, बल्कि यह भरोसा भी देती है कि संकट की घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है। पिछले 38 दिनों से यह सहारा बंद होने से प्रतिदिन सैकड़ों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर सेवा, समर्पण एवं संघर्ष का हुआ सम्मान, यूआरडीए द्वारा एनएलटी सभागार, आरएनटी मेडिकल कॉलेज में गरिमामय आयोजन सम्पन्न 30 वर्षों तक एक ही विद्यालय में शिक्षा की अलख जगाते रहे शिक्षक सतीश जैन, बिना तबादले और पदोन्नति के यहीं से हुए सेवानिवृत्त