24 News Update उदयपुर। राजस्थान विद्यापीठ की मेजबानी में “स्वदेशी, आर्थिक एवं तकनीकी राष्ट्रवाद” विषय पर दो दिवसीय वेस्ट जोन वाइस चांसलर्स सम्मेलन का समापन जोरदार मंथन के साथ हुआ। देशभर से आए करीब 150 कुलपति और शिक्षाविदों ने विश्वविद्यालयों को डिग्री देने वाले केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार और स्वदेशी तकनीक की प्रयोगशालाएं बनाने पर जोर दिया।मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट कहा—अब “मेक इन इंडिया” से आगे बढ़कर “डिज़ाइन एंड डेवलप इन इंडिया” की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध और स्वदेशी तकनीक के समन्वय को आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत बताया और “लोकल फॉर वोकल” को आर्थिक राष्ट्रवाद की नींव बताया।विशिष्ट अतिथि डॉ. अतुल कोठारी ने शिक्षा और अर्थव्यवस्था को राष्ट्र की उन्नति का आधार बताते हुए भारतीय चिंतन, एकात्म मानववाद और नई शिक्षा नीति के समन्वय से संतुलित विकास की बात कही। वहीं राजेन्द्र सिंह शेखावत ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए स्वदेशी क्षमताओं को देश की असली ताकत बताया।कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अतिथियों का स्वागत करते कहा कि स्वदेशी सोच, आर्थिक राष्ट्रवाद और तकनीकी आत्मनिर्भरता में शिक्षा तथा शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूर्ण रूप से लागू किया जाए, तो इसके दूरगामी और सकारात्मक परिणाम देश के विकास पथ को नई दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए स्वदेशी भावना के साथ अनुसंधान और नवाचार के समन्वय को अत्यंत आवश्यक बताया। प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि स्वदेशी हमारे लिए केवल एक विचार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का प्रतीक है, जिसे वर्तमान समय में और अधिक सशक्त करने की जरूरत है।उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बदलते समय के साथ स्थानीय उत्पादकों को बढ़ावा देते हुए आधुनिक तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधारभूत ढांचे, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे नवीन क्षेत्रों में कार्य करना समय की मांग है। इस दिशा में सतत प्रयास कर हम आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।AIU अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक और महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने पाठ्यक्रम, शोध और उपयोग में स्वदेशी को प्राथमिकता देने पर बल दिया। रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली ने सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।तकनीकी सत्र में प्रो. अल्पना कटेजा की अध्यक्षता में “आर्थिक देशभक्ति से स्वदेशीकरण” पर चर्चा हुई, जिसमें प्रो. एस.पी. सिंह, प्रो. नीलम मिश्रा और प्रो. जी.आर. सिशा ने विचार रखे। AIU के बिजनेस सेशन में भावी योजनाओं पर विमर्श हुआ।बेस्ट प्रैक्टिसेस अवार्ड में डॉ. डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी, पुणे प्रथम, आईसी यूनिवर्सिटी जयपुर द्वितीय और राजस्थान विद्यापीठ तृतीय रहा।संयोजन डॉ. अनिता राठौड़, डॉ. सोनिया श्रीवास्तव ने किया, संचालन में विभिन्न शिक्षाविदों की सक्रिय भूमिका रही और आभार डॉ. विजेंद्र कुमार ने व्यक्त किया। आयोजन सचिव प्रो. युवराज सिंह राठौड़ ने बताया कि यह सम्मेलन स्वदेशी सोच को नीति और व्यवहार में उतारने की दिशा में अहम कदम साबित हुआ। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation नवोदय प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित भींडर में रंग तेरस पर नृसिंह दरबार में 5 क्विंटल फूलों की होली, भजनों से झूम उठा नगर