24 News Update उदयपुर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के संघटक एग्रीकल्चर महाविद्यालय के सभागार में महिलाओं के लिए “ऑयल-बेस्ड ब्यूटी एंड स्किन केयर प्रोडक्ट मेकिंग” विषय पर पाँच दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। महाविद्यालय द्वारा आयोजित यह चौथा प्रशिक्षण है, जिसमें 30 महिलाएं तेल बीज आधारित उत्पादों को मूल्यवर्धित कर सौंदर्य एवं त्वचा-देखभाल उत्पादों के रूप में विकसित करने का व्यावहारिक कौशल सीखेंगी।कार्यक्रम ICAR-Indian Institute of Oilseeds Research (आईआईओआर) की अनुसूचित जाति उपयोजना परियोजना के अंतर्गत प्रायोजित है। उद्देश्य है—तिलहन फसलों से प्राप्त तेलों को घरेलू स्तर पर उद्यम में बदलने योग्य, बाज़ारोन्मुख उत्पादों में रूपांतरित करना, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भरता की ठोस राह पकड़ सकें।‘फार्म टू ब्यूटी’ बनेगा मेवाड़ मॉडलकुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल उत्पाद निर्माण का पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नवाचार का सेतु है। “हम ‘फार्म टू ब्यूटी’ की अवधारणा को व्यवहार में उतार रहे हैं। खेतों में विकसित तकनीक, अनुसंधान और तिलहन की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग को सीधे ऐसे उत्पादों में बदला जाए जो बाज़ार में प्रतिस्पर्धी हों। इससे किसान, शोधकर्ता और उद्यमी—तीनों एक मूल्य-श्रृंखला में जुड़ेंगे। हमारा लक्ष्य है कि दक्षिणी राजस्थान की महिलाएं कच्चे माल की आपूर्तिकर्ता नहीं, ब्रांड-सर्जक बनें। गुणवत्ता, मानकीकरण और पैकेजिंग के साथ स्थानीय संसाधनों से राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच बनाई जा सकती है।” उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय तकनीकी परामर्श, लैब-समर्थन और उद्यम स्थापना मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा, ताकि प्रशिक्षण के बाद भी हैंडहोल्डिंग जारी रहे। विशेषज्ञों के विचारनिदेशक, आईआईओआर डॉ. रवि माथुर ने प्रशिक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तिलहन क्षेत्र में कृषि-आधारित उद्यमिता महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन सकती है। यह पहल ग्रामीण आय बढ़ाने और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अधिष्ठाता प्रो. गजेन्द्र कुमार माथुर ने बताया कि संस्थान मेवाड़ क्षेत्र के कृषक समुदाय को नवीनतम तकनीक से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं कृषि सलाहकार प्रो. इन्द्रजीत माथुर ने कहा कि विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण समाज को ज्ञान और व्यावहारिक कौशल देकर आजीविका एवं करियर निर्माण के अवसर सृजित करना है। ऐसे कार्यक्रम उसी सोच को साकार करते हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation होली फाइल्स : पंजाब के राज्यपाल कटारिया 1 मार्च से उदयपुर प्रवास पर, किसका उड़ेगा रंग, किसका जमेगा!! अर्पण सेवा संस्थान के राष्ट्रीय सम्मेलन में ग्रामीण परिवर्तन की गूँज