24 News Update जयपुर। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सरकारी भर्तियों को प्रभावित करने वाले एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश किया है। फायरमैन और लाइब्रेरियन परीक्षाओं में इस्तेमाल की जा रही फर्जी शैक्षणिक डिग्रियों के मामले में SOG ने चेन्नई स्थित भारत सेवक समाज (BSS) यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। SOG टीम ने बुधवार को चेन्नई से आरोपी डायरेक्टर SAG मोएसन को हिरासत में लिया और उसे जयपुर लाया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा रैकेट डिजिटल माध्यमों, खासतौर पर व्हाट्सऐप के जरिए संचालित किया जा रहा था, जहां डिग्री उपलब्ध कराने से लेकर सत्यापन तक का नेटवर्क सक्रिय था।
बिना मान्यता चल रही थी यूनिवर्सिटी
जांच में बड़ा खुलासा यह हुआ है कि संबंधित यूनिवर्सिटी न तो किसी सरकारी मान्यता के तहत संचालित हो रही थी और न ही इसका वैध रजिस्ट्रेशन था। इसके बावजूद यहां 100 से अधिक प्रोफेशनल कोर्स संचालित किए जा रहे थे। इन्हीं कोर्सों की आड़ में बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियां जारी की गईं, जिनका इस्तेमाल विभिन्न भर्तियों और सेवाओं में किया गया।
7 हजार से अधिक संस्थानों को दी गई फर्जी संबद्धता
SOG की जांच में यह भी सामने आया है कि यूनिवर्सिटी ने देशभर में करीब 7 हजार संस्थानों को फर्जी एफिलिएशन (संबद्धता) दे रखी थी। इन संस्थानों के जरिए डिग्री वितरण का जाल फैलाया गया। राजस्थान के दौसा जिले में संचालित एक ऐसे ही संस्थान के संचालक को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
हजारों डिग्रियां जांच के दायरे में
इस फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद अब हजारों डिग्रियां संदेह के घेरे में आ गई हैं। SOG इन डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों, रैकेट से जुड़े एजेंटों, संस्थान संचालकों और अन्य सहयोगियों की गहन जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। SOG का फोकस अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने और फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्तियों में सेंध लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर है।
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