उदयपुर, 22 अक्टूबर। राजस्थान में दीपावली से पहले सरकारी स्कूलों को चमकाने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रदेशव्यापी अभियान शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश में विद्यालयों की साफ-सफाई, रंग-रोगन, मरम्मत और रोशनी की व्यवस्था करने को कहा गया है, लेकिन इन कामों के लिए अलग से बजट आवंटित करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अतिरिक्त राशि की व्यवस्था नहीं की गई तो स्कूलों के सौंदर्याकरण पर होने वाला खर्च कहां से आएगा? निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर ललित कुमार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, ‘विद्यालय सौंदर्याकरण एवं दीपोत्सव 2026’ अभियान 22 अक्टूबर से दीपोत्सव तक संचालित किया जाना है। विभाग ने सभी संयुक्त निदेशकों को अपने क्षेत्राधिकार में आदेशों की पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 3 नवंबर तक सफाई का काम पूरा करने और 6 नवंबर से दीपोत्सव तक विद्यालयों में लाइटिंग की व्यवस्था करने को कहा गया है। जनसहयोग पर जोर, खर्च की व्यवस्था स्पष्ट नहींविभागीय आदेश में विद्यालय परिसर, कक्षाओं, खेल मैदान, शौचालयों और पेयजल स्थलों के आसपास सफाई कराने के लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, ग्रामीणों, स्काउट-गाइड, एनएसएस, एनसीसी तथा स्थानीय सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने की बात कही गई है। मरम्मत और रंग-रोगन के काम भी यथासंभव जनसहयोग से कराने के निर्देश हैं। विद्यालयों में अनुपयोगी फर्नीचर और अन्य बेकार सामग्री को नियमानुसार नष्ट करने अथवा नीलाम करने को कहा गया है। वहीं, शौचालयों सहित जरूरी मरम्मत के लिए समग्र शिक्षा अभियान (समसा) की कम्पोजिट ग्रांट से नियमानुसार राशि खर्च करने का विकल्प दिया गया है। हालांकि, आदेश में सभी स्कूलों के लिए अलग से कोई निश्चित राशि निर्धारित नहीं की गई है। न ही लाइटिंग, रंग-रोगन और सामान्य मरम्मत पर होने वाले खर्च के लिए किसी अतिरिक्त बजट मद का स्पष्ट उल्लेख है। ऐसे में जिन विद्यालयों के पास उपलब्ध अनुदान में पर्याप्त राशि नहीं है, उनके सामने अभियान की अपेक्षाओं को पूरा करना चुनौती बन सकता है। समयसीमा तय, संसाधनों का सवाल बरकरारविभाग ने अभियान को केवल भवनों के भौतिक सुधार तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों और समुदाय में अपनत्व बढ़ाने की पहल बताया है। साथ ही सभी कार्य विभागीय निर्देशों, राजस्थान लोक उपापन पारदर्शिता अधिनियम-2012, इसके नियम-2013 तथा सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियमों के अनुरूप कराने को कहा है। जिला स्तर पर संबंधित एडीपीसी और बीआरसीएफ के समन्वय से अभियान पूरा कराया जाना है। लेकिन आदेश के सामने सबसे बड़ा व्यावहारिक सवाल संसाधनों का है। जिन स्कूलों में सफाई के अलावा मरम्मत, रंग-रोगन और बिजली की सजावट पर वास्तविक खर्च होना है, वहां केवल जनसहयोग के भरोसे सभी काम पूरे हो पाएंगे या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। विभाग ने समयसीमा तो तय कर दी है, लेकिन अतिरिक्त बजट के अभाव में विद्यालयों को इन निर्देशों की पालना के लिए उपलब्ध संसाधनों और जनसहयोग पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इनका कहना है विद्यालय सौंदर्यीकरण एवं दीपोत्सव 2026 अच्छी योजना है परन्तु इसके लिए विद्यालयों को समय पर उचित बजट जारी करना चाहिए क्योंकि आदिवासी अंचल में जनसहयोग से यह कार्य सम्भव नहीं है।— शेरसिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation महापौर पारस सिंघवी और आयुक्त अभिषेक खन्ना ने दी अंतिम मोहलत, बिना अतिरिक्त नोटिस हटाए जाएंगे लटकते तार कम बारिश से जल संकट की आशंका, छतों का पानी सहेजने और भूजल रिचार्ज के सुझाव