जयवंत भैरविया

उदयपुर। दिल्ली में आरटीआई से सीसीटीवी फुटेज मांगने पर पुलिस कह रही है कि पेन ड्राइव लेकर आ जाइये, फुटेज ले जाइये। मगर उदयपुर पुलिस से थाने के सीसीटीवी के फुटेज मांगते ही पुलिस हजारों बहाने बनाने लग जाती है। कभी सुरक्षा का बहाना, कभी गोपनीयता का तो कभी जांच का। तो कभी—कभी आपका क्या हित है?? आपको क्यों चाहिए आदि सवाल पूछने लगती है, बहाने बनाने लगती है। अब सवाल यह उठ रह है कि पुलिस—पुलिस के बर्ताव में आखिर इतना फर्क क्यों?? पत्रकार जयवंत भैरविया ने इस मुद्दे पर कई आरटीआई लगा कर पुलिस के बर्ताव का गहन अध्ययन किया तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। उनके अध्ययन से पता चला कि सीसीटीवी के मुद्दे पर राजस्थान की उदयपुर पुलिस और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली में जमीन—आसमान का अंतर है। जो बात दिल्ली में सुलभ है वो उदयपुर में दुर्लभ है।
द्वारका नॉर्थ पुलिस का सकारात्मक जवाब


RTI के तहत दिल्ली के द्वारका नॉर्थ पुलिस थाने से 25 फरवरी 2026 की सीसीटीवी फुटेज मांगी गई। जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा कि किसी भी कार्य दिवस पर सुबह 10 से शाम 4 बजे के बीच ACP/द्वारका के माध्यम से SHO/द्वारका नॉर्थ से पूर्व अनुमति लेकर थाने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से संबंधित अभिलेख देख सकते हैं। आवेदक को पेन ड्राइव साथ लाकर संबंधित फुटेज प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश, राजस्थान सरकार का 75 करोड़ का हलफनामा

थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का उद्देश्य हिरासत में होने वाली घटनाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करना और आम नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा करना भी है। सुप्रीम कोर्ट ने परमवीर सिंह बनाम बलजीत सिंह मामले में ऐतिहासिक निर्देश जारी करते हुए देशभर के पुलिस थानों और जांच एजेंसियों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। राजस्थान में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और थानों में सीसीटीवी कैमरों के बंद रहने संबंधी शिकायतों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। घटनाओं और प्रकाशित खबरों के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस विषय से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई, जो वर्तमान में भी जारी है। इसी मामले में राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत कर राज्य के पुलिस थानों में 16-16 सीसीटीवी कैमरे लगाने और इसके लिए लगभग 75 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी थी। लेकिन थानों में सीसीटीवी व्यवस्था पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं और मुख्य उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा तथा पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है, तो जरूरत पड़ने पर कैमरों की रिकॉर्डिंग आम नागरिकों को उपलब्ध कराने में परेशानी क्यों आ रही है?

राजस्थान SCRB के आदेश भी फाइलों में सिमटे?
राजस्थान स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (SCRB) के तत्कालीन महानिरीक्षक पुलिस शरत कविराज ने 16 नवंबर 2023 को सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए थे। निर्देशों में आपराधिक प्रकरणों, परिवादों तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई पुलिस थानों की सीसीटीवी फुटेज जिला स्तर पर संबंधित आवेदकों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद उदयपुर में फुटेज उपलब्ध नहीं कराने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई मामलों में आवेदकों को कैमरे बंद होने, जांच लंबित होने, गोपनीयता, मुखबिरों की पहचान उजागर होने और पुलिस थाने की सुरक्षा जैसे कारण बताकर फुटेज देने से इनकार किए जाने के आरोप हैं। पिछले कुछ सालों में पुलिस हिरासत में हुई मौतों के मामलों में भी जो कुछ हुआ वह हैरान करने वाला है। एक भी मामले में सीसीटीवी फुटेज नहीं दिए गए। बार—बार मांगने पर बहाने बना दिए गए। इससे संदेह और गहरा हो जाता है कि हर बार कहीं कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा है।

सूचना आयोग के आदेशों के बावजूद फुटेज के लिए संघर्ष
राजस्थान राज्य सूचना आयोग भी पुलिस थानों की सीसीटीवी फुटेज को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित कर चुका है। 18 सितंबर 2023 को आरुषि जैन बनाम राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उदयपुर प्रकरण में आयोग ने सरकारी कार्यालयों और पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के उद्देश्य तथा पारदर्शिता के महत्व पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। फुटेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे तथा सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8(1) के तहत छूट के दावे को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद 6 सितंबर 2024 को शारदा देवी बनाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सीकर तथा 18 नवंबर 2024 को लक्ष्मी देवी बनाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उदयपुर प्रकरणों में भी आयोग ने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने संबंधी आदेश पारित किए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदयपुर गोपाल स्वरूप मेवाड़ा द्वारा भी राज्य सरकार के निर्देशों की पालना में RTI के तहत सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने के संबंध में आदेश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
आदेशों और निर्देशों के बावजूद यदि आवेदकों को फुटेज नहीं मिल रही है, तो यह व्यवस्था के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

गोपनीयता के नाम पर पूरी फुटेज रोकना कितना उचित?
दिल्ली पुलिस का RTI जवाब, राजस्थान SCRB के निर्देश और राज्य सूचना आयोग के आदेश उदयपुर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं। उदयपुर के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगातार चालू रहते हैं? क्या RTI के तहत फुटेज मांगने वाले नागरिकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई जा रही है? क्या जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में फुटेज उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू है? क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सभी थानों में सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने की प्रक्रिया संबंधी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं? सीसीटीवी कैमरे दीवारों पर लगे उपकरण नहीं, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनकी सार्थकता तभी है, जब रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहे और कानून के दायरे में जरूरतमंद नागरिकों को उपलब्ध भी हो।


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By desk 24newsupdate

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