उदयपुर, 17 अक्टूबर। नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी के करीब चार दशक पुराने मामले में उदयपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 43 साल से फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी विजय कुमार यादव को हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि भारत सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान में नौकरी लगवाने का झांसा देकर उसने अन्य साथियों के साथ मिलकर लोगों से रकम वसूली थी। मामला दर्ज होने के बाद उसके नौ साथी गिरफ्तार हो चुके थे, लेकिन विजय कुमार यादव पहचान छिपाकर लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। पुलिस के अनुसार, वह हिमाचल प्रदेश के नाहन में फुटबॉल कोच बनकर रह रहा था। उदयपुर पुलिस की विशेष टीम ने खिलाड़ी बनकर उससे संपर्क किया और चौगान खेल मैदान से उसे पकड़ लिया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देश पर वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उमेश ओझा और वृत्ताधिकारी नगर पश्चिम राजेश यादव के सुपरविजन में धानमंडी थानाधिकारी गजवीर सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने तकनीकी सहायता और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर आरोपी की वर्तमान लोकेशन का पता लगाया। 1984 में नौकरी का झांसा देकर 32 हजार रुपये ठगने का आरोप पुलिस के अनुसार, 5 मार्च 1984 को कनावड़ा निवासी भंवर सिंह ने धानमंडी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि किनारा ग्रुप/अग्रवाल सेल्स के मैनेजर नरेन्द्र सिंह यादव और अन्य कर्मचारियों ने भारत सरकार की मान्यता का हवाला देकर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। इसके नाम पर परिवादी से 3,000 रुपये लिए गए। पुलिस के मुताबिक, इसी तरह अलग-अलग लोगों से कुल 32,000 रुपये वसूले गए और बाद में कार्यालय बंद कर आरोपी फरार हो गए। इस मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में प्रकरण संख्या 27/1984 दर्ज किया था। मामले में पहले ही नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। विजय कुमार यादव के लगातार फरार रहने के कारण उसे उद्घोषित अपराधी घोषित किया गया था। घटना के समय उसकी उम्र करीब 26 वर्ष थी, जबकि अब वह 69 वर्ष का है। पैतृक दस्तावेजों से नाम हटवाया, अलग-अलग राज्यों में रहा पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए विजय कुमार यादव ने अपने पैतृक निवास रूपगढ़, जिला भिवानी (हरियाणा) से जुड़े दस्तावेजों से अपना नाम हटवा दिया था। इसके बाद वह पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में रहा और फुटबॉल कोच के रूप में काम करता रहा। वर्तमान में वह हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर स्थित नाहन के चौगान खेल मैदान में फुटबॉल कोच था। उदयपुर पुलिस ने उसकी पहचान और ठिकाने की पुष्टि के लिए तकनीकी संसाधनों के साथ मुखबिरों की मदद ली। इसके बाद टीम के सदस्य खिलाड़ी बनकर कोचिंग लेने के बहाने उसके पास पहुंचे। संपर्क स्थापित होने पर पुलिस ने उसे खेल मैदान से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पुराने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। कार्रवाई में ये पुलिसकर्मी रहे शामिल कार्रवाई थानाधिकारी गजवीर सिंह के नेतृत्व में की गई। टीम में सहायक उप निरीक्षक राकेश कुमार, हेड कांस्टेबल दिनेश कुमार (2389), कांस्टेबल मनोज कुमार (2538), साइबर सेल के हेड कांस्टेबल कुलदीप सिंह (2014), साइबर टीम के सहायक उप निरीक्षक संग्राम सिंह, कांस्टेबल प्रकाश डांगी (356) और कांस्टेबल दिनेश कुमार (1238) शामिल रहे। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में धानमंडी थाना पुलिस और साइबर टीम ने समन्वय से काम किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर में मंदिरों को निशाना बनाने वाले गिरोह से 22 लाख की चांदी बरामद, 8.9 किलो मूर्तियां और छत्र मिले जंगल में 10 किलोमीटर तक नेटवर्क नहीं, रास्ता भी नहीं; ओगणा पुलिस पैदल पहुंची तो खेत में मिली गांजे की फसल