24 News Update सागवाड़ा, 4 सितम्बर (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदासधाम रामद्वारा में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत कीर्तिराम ने सत्संग के दौरान कहा कि इस सृष्टि के सभी जीव, पदार्थ और वस्तु उपयोगी और महत्वपूर्ण हैं। कुछ भी अनुपयोगी और अपात्र नहीं है। सत्संग के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।संत ने कहा, हम जिन पदार्थों को हेय और त्यागने योग्य मानते हैं, उनमें भी कहीं कोई विशिष्टता छिपी हुई है, इसलिए सकारात्मक दृष्टिकोण रखें, सभी का आदर करें। सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन को वास्तविक प्रसन्नता। सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन को जहाँ आनंदित करता है, कुछ अनूठा एवं विलक्षण करने की पात्रता भी प्रदान करता है। सकारात्मकता नैतिक साहस को बढ़ाती है। आमतौर पर युगों को बदलने वाले नायकों में ऐसे ही लक्षण देखने को मिलते हैं।परमात्मा के बनाए सभी दिन समान रूप से शुभ एवं पवित्र हैं, जिसमें शुभ-अशुभ का आरोप मनुष्य स्वयं अपने विचारों से कर लेता है। जिस दिन, जिस क्षण किसी में बुरा विचार आए अथवा कोई अपकार्य करने की प्रवृत्ति हो, मानना चाहिए कि वह दिन, वह क्षण मनुष्य के लिए अशुभ है। इसके विपरीत जिस दिन, जिस क्षण शुभ विचार एवं पवित्र प्रवृत्ति उदय होती है, वह दिन, क्षण शुभ तथा कल्याणकारी है। यह बात भिन्न है कि परिस्थिति, संयोग अथवा अवसर के कारण कोई वार अथवा तिथि किसी के लिए असुविधाजनक हो जाए। इससे उसकी पवित्रता में किसी प्रकार का अंतर नहीं पड़ता। विद्वानों का कहना है कि शुभ कार्यों के लिए हर दिन शुभ और अशुभ कामों के लिए मान्यता रखने में हर प्रकार से हित है।संत ने कहा, परमार्थ के कार्यों में निवेश करने से जीवन सिद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। परोपकारी और उदारमना जीवन में आगे बढ़ने के सबसे बड़े मार्ग हैं। अनुशासन जीवन सिद्धि और सफलता का मूल मंत्र है। जीवन सिद्धि का प्रथम सोपान सत्संग है। जीवन की श्रेष्ठता और उच्चता के लिए सहजता, सरलता और विनम्रता आवश्यक है। सरलता ही धर्म है और कुटिलता ही अधर्म है। जिसने सरलता अपनाई, वही अध्यात्म पथिक हो सकता है। आप भजनानंदी विद्वान हो, जानकार हो, लेकिन सरल नहीं तो प्रभु की समीपता का अनुभव, उस परमतत्व का अनुभव कर पाना संभव नहीं। प्रभु श्रीराम ने शबरी मैया से कहा कि मेरी नौवीं भक्ति है-सरल बनो। भगवान भक्त की सरलता पर ही रीझते हैं।उन्होंने कहा कि जीवन बहुत सरल है, इसे पेचीदा न बनाओ, धर्म, जाति के नाम पर इसे और न उलझाएं। जीवन भगवान का वरदान है। इसे ईर्ष्या, द्वेष, छल-कपट से नष्ट न करें। सरलता से ही मनुष्य का जीवन गौरवपूर्ण बनता है। किसी से राग, द्वेष की भावना नहीं रखनी चाहिए। सरलता आ जाए तो प्रभु को पाना सरल है। अज्ञानता, आत्म-विस्मृति और अविवेक ही समस्त दुःखों की मूल जड़ है।संत प्रसाद लोकेश सेवक परिवार का रहा। सत्संग के दौरान शुक्रवार प्रातः संत के सानिध्य में जन्माष्टमी उत्सव परंपरा अनुसार मनाया गया एवं प्रसाद वितरण भी किया। कृष्ण जन्मोत्सव पर संत ने ‘गिरधारी गाजतो जो आवे..’ सहित भजन प्रस्तुत किए, जिस पर भक्त झूमने लगे।सत्संग एवं जन्माष्टमी उत्सव में समिति अध्यक्ष सुधीर वाडेल, प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा, मयंक दोसी, तेज प्रकाश, दामोदर दलाल, जगदीश टेलर, जिग्नेश भावसार, प्रहलाद भावसार, प्रभुलाल बुनकर, शिवराम मोची, गिरीश सोमपुरा, भारत शर्मा, विजय पंचाल के अतिरिक्त कई महिलाएं एवं पुरुष भक्त उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation महावीर इंटरनेशनल की एपेक्स की पहल, विद्यालय में अध्यापकों को किया जीवनरक्षक किट वितरित जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में 9 से प्रतिष्ठाचार्य कार्यशाला प्रारंभ, चलेगी विद्वत संगोष्ठी