– आराधना भवन में मेहंदी सांची कार्यक्रम में गूंजे भजन, हुई कई धार्मिक आयोजन-तपस्वियों को उपरणा, माला व स्मृति चिह्न भेंट कर किया सम्मान 24 News Update उदयपुर, 4 सितम्बर। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज, मुनिराज नीतिप्रभ विजयजी महाराज एवं साध्वी श्रुतवर्धना श्रीजी महाराज आदि ठाणा की पावन निश्रा में 45 दिवसीय सिद्धि तप आराधना श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जारी है। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रवचन हो रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं सहभागी बनकर धर्मलाभ ले रहे हैं।श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि सिद्धि तप आराधना के पावन अवसर पर शुक्रवार को आराधना भवन में सुबह 9 बजे भक्ति, साधना और उल्लास से सराबोर मेहंदी सांची का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। उदयपुर के प्रमुख महिला मंडलों एवं आमंत्रित संगीतकारों ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों की स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। इस अवसर पर 26 तपस्वियों की कठिन तपस्या एवं साधना की भावपूर्ण अनुमोदना की गई। सभी तपस्वियों का उपरणा, माला एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। समाजजनों ने तपस्वियों की सुख-साता पूछते हुए उनके तप की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान गुरु महाराज ने सभी तपस्वियों एवं श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। गुरुदेव के आशीर्वाद संदेश के दौरान पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।जावरिया ने बताया कि श्वेताम्बर समाज के आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व आगामी 8 सितम्बर से शुरु होंगे जिसमें प्रतिदिन तप, प्रतिक्रमण, ध्यान, प्रवचन सहित विविधि धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन होंगे।धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज ने कहा कि जगत के सभी जीव सुख चाहते हैं और दु:ख से दूर भागते हैं, लेकिन जीवन में सुख-दु:ख की प्राप्ति के पीछे प्रकृति का अटल नियम कार्य करता है। आप जीवों को जो देते हैं, वही बदलकर आपको प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन में जो बीज बोता है, वही फसल के रूप में हजारों गुना होकर प्राप्त करता है। आम बोने पर आम, गेहूं बोने पर गेहूं और बबूल बोने पर बबूल के कांटे ही प्राप्त होते हैं। ऐसा कभी नहीं होता कि बबूल बोने पर आम की फसल मिले अथवा आम बोने पर बबूल के कांटे प्राप्त हों। आचार्यदेव ने कहा कि इसी प्रकार यदि हमने अन्य जीवों को सुख-साता, प्रसन्नता और शांति दी है तो हमारे जीवन में भी खुशहाली आती है। इसके विपरीत यदि हम अन्य जीवों को दु:ख, तकलीफ और अशाता देते हैं तो जीवन में दु:ख ही दु:ख प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जिसने दूसरों को दु:ख दिया हो, उसके जीवन में वर्तमान में थोड़ा सुख और सुख देने वाले के जीवन में थोड़ा दु:ख दिखाई दे सकता है। यह पूर्व जन्म के कर्मों का परिणाम हो सकता है, लेकिन कर्मों का फल बदलने में देर नहीं लगती। कुदरत के आगे किसी का नहीं चलता। कुदरत के यहां देर हो सकती है, लेकिन अंधेर कभी नहीं होती।इस अवसर पर श्रीसंघ के डॉ. शैलेन्द्र हिरण, कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया, राजकुमार बापना, नरेंद्र सिंघवी, भोपाल सिंह सिंघवी, मनीष दोशी, अभिषेक हुमड़, अशोक सेठ, प्रकाश गांधी, राकेश चेलावत, अशोक जैन, राजेंद्र कोठारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मोक्ष के सफर के लिए ब्रह्मांड को जानना जरूरी : आचार्य मुक्तिसागर सूरीश्वर अगर परिस्थितियां नहीं बदलती है तो नजर को बदल दो, नजारा ही बदल जाएगा : मुनि अरहसागर महाराज