दो दिन पहले कानून मंत्री ने भरी सभा में भेजी पर्ची और सीजेआई चंद्रचूड ने कर दी बीकानेर के नाम की घोषणा 24 न्यूज अपडेट.उदयपुरdesk24newsupdate@gmail.comरिपोर्ट- सुशील जैनउदयपुर। उदयपुर के वकीलों ही नहीं आमजन में भी आज जबर्दस्त गुस्सा है। दो दिन पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की मौजूदगी में केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भरी सभा में पर्ची भेजी और सीजेआई चंद्रचूड़सिंह ने हाथों हाथ बीकानेर को राजस्थान की पहली वर्चुअल हाई कोर्ट बेंच देने की घोषणा कर दी। जैसे ही इस घोषणा की खबर उदयपुर तक पहुंची, यहां के 42 साल पुराने आंदोलन पर पानी फिर गया। क्योंकि विधानसभा चुनावों से पहले मंत्रीजी ने उदयपुर के अधिवक्ताओं को दिल्ली बुला कर उदयपुर को सबसे पहले वर्चुअल बैंच देने की मीठी गोली थी दी। तब दिल्ली से फोटो सेशन हुए थे और उदयपुर में पटाखे फोड कर जश्न तक मना लिया गया था कि अब तो वर्चुअल बैंच का सपना पूरा होने वाला है। लेकिन चुनाव बीतते ही पैंतरे बदल गए, डबल इंजन की सरकार आने के बावजूद उदयपुर से धोखा हो गया। हमारे हिस्से का वर्चुअल बैंच बीकानेर लेकर चला गया। बीकानेर को इस बात का फायदा मिल गया कि कानून मंत्री वहीं के रहेन वाले हैं। हमारे हिस्से में मायूसी इसलिए आ गई क्योंकि हमारे नेताओं ने इस मामले में फॉलोअप नहीं किया। यह मानकर बैठ गए कि मंत्रीजी की मीठी गोली एक न एक दिन हमें जरूर वर्चुअल बैंच दिला देगी। जनजाति बहुल क्षेत्र के लोगों के साथ हुए इस वर्चुअल पक्षपात के चलते आज अधिवक्ताओं ने कार्य का बहिष्कार कर दिया और तीखे तेवरों के साथ बैठक में आलोचना करते हुए फरमान सुना दिया कि अब एक प्रतिनिधिमंडल फिर से कानून मंत्री और सीजेआई से मिलने जाएगा ओैर अबकी बार यदि उदयपुर के नाम की पर्ची नहीं खोली गई तो आंदोलन आर या पार का किया जाएगा।चुनावों में भारी पड़ सकता हैहाईकोर्ट की वर्चुअल बैंच का मुद्दा भाजपा की डबल इंजन सरकार को भारी पड़ सकता हैं। मेवाड़ बगड़ हाई कोर्ट बेंच संघर्ष समिति का आंदोलन 42 साल पुराना है। विधि मंत्री की छह महीने पहले हुई घोषणा के बाद उदयपुर में 42 वर्षों से चल रहे हाई कोर्ट बेंच आंदोलन को पहली सफलता प्राप्त हुई थी मगर इस सफलता के जमीन पर उतरने से पहले ही खुशियां छीन ली गई। मंत्रीजी ने पूरे भारत में 10 जगह वर्चुअल हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की बात कही थी जिसमें राजस्थान में तीन जगह उदयपुर कोटा व बीकानेर में स्थापना की बात कही थी मगर पर्ची बीकानेर के नाम की खुलवा दी। अब यह मुद्दा भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव में गलफांस बन सकता है। यदि समय रहते वर्चुअल बैंच की घोषणा उदयपुर के लिए नहीं की गई तो लोगों में आक्रोष फैल सकता है और चुनावी गणित गड़बड़ा सकता हैं। इस मसले पर लोगों में इस बात पर भी आक्रोष है कि उदयपुर के नेता हमेशा ढिलाई से क्यों पैरवी करते हैं। यदि करते भी हैं तो उसका फॉलोअप करने में कंजूसी क्यों बरतते हैं। जानकारों का कहना है कि चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, नेताओं को अपने जिलों व लोकसभा क्षेत्रों के हितों की पैरवी के लिए संघर्ष करना ही होगा।इनका कहना हैआज अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। दोपहर में जो महत्वपूर्ण बैठक हुई उसमें तय किया गया कि विधि मंत्री और सीजेआई चंद्रचूड़सिंह जी से मिलने का समय मांगा जाएगा। बैठक में अध्यक्ष भरत जोशी, सभी पूर्व अध्यक्ष, सभी पूर्व महासचिवों सहित वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौजूदी रही। मीटिंग में कल भी हड़ताल रखने व पेन डाउन का निर्णय लिया गया। वर्चुअल बैंच नहीं मिलने से पूरे संभाग में आक्रोश की लहर है। यह हमारे साथ धोखा हुआ है। वर्चुअल बैंच पर उदयपुर का पहला हक था, मगर नहीं दी गई। उदयपुर मेंं हाईकोर्ट के लिए 42 साल से आंदोलन चल रहा है। आदिवासी क्षेत्रों के हितों को सर्वोपरि समझ कर उदयपुर को तत्काल वर्चुअल बैंच की सौगात दी जाए। राजेश शर्मा,महासचिव, उदयपुर बार एसोसिएशन Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation हड़ताल टूटी मगर हर एक लीटर पेट्रोल पर 13 रूपए का फटका बरकरार जानलेवा हमले में महिला सहित चार आरोपी गिरफ्तार