24 न्यूज अपडेट. जयपुर। सेशन शुरू होते ही अभिभावकों सहित कई संगठन बार-बार शिकायत कर-कर के थक गए कि फीसें बढ़ा दी हैं, किताबों में मनमानी रेट ले रहे हैं, ड्रेस बार-बार बदल रहे हैं, एक ही शॉप से खरीदने को बाध्य कर रहे है। हालत ये है कि शर्ट की बटन तक पर स्कूल का लागो जरूरी कर दिया है। जूते-मोजे भी पसंदीदा कमिशन वाली दुकान से लेना जरूरी है। याने जेब कट रही है। तब सरकारी स्तर पर अधिकारियों व नेताओं की नींद नहीं उड़ी। अब प्राइवेट स्कूलों में सेशन का पहला महीना शुरू होकर खत्म होने वाला है, अभिभावक पूरी तरह से लुटे जा चुके हैं, चुनाव हो चुके हैं, तब जाकर अचानक सरकारी स्तर पर शिक्षा विभाग एक्टिव हो रहा है और सख्त गाइड लाइन जारी कर रहा है, निजी स्कूलों को कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। लगभग सभी अभिभावक इसे ढकोसला बता रहे हैं क्योंकि जब शिकायतें की गईं तो कार्रवाई नहीं हुई। कलेक्टरों से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक सोए रहे, अब जब चिड़िया चुग गई खेत वाली हालत है तो नियम याद आ रहे है।ं बहरहाल आपको बताते हैं कि आखिर हुआ क्या है। राजस्थान में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले ही शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों में बढ़ती फीस और पेरेंट्स की समस्याओं को दूर करने के लिए 10 सूत्री गाइडलाइन तैयार की है। पालन नहीं करने पर प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग राजस्थान के निदेशक आशीष मोदी ने मीडिया को बताया कि गाइडलाइन की शत प्रतिशत पालन करवाना शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद किसी स्कूल में इन नियमों की पालना नहीं होती है तो वहां का शिक्षा विभाग का संबंधित अधिकारी और स्कूल इसके लिए जिम्मेदार होगा और उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। याने अब यदि कोई स्कूल नियम नहीं मानें तो जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के अधिकारियें की भी होगी।यह जारी की शिक्षा विभाग की गाइडलाइनपेरेंट्स टीचर्स मीटिंग का आयोजन किया जाए। स्कूल स्तरीय फीस कमेटी बनेगी, सदस्यों का नाम, पता और उनके मोबाइल नंबर पीएसपी पोर्टल पर चस्पा होंगे। स्कूल स्तरीय फीस कमेटी द्वारा अनुमोदित फीस को पीएसपी पोर्टल पर सालाना और मासिक मद में पीडीएफ बनाकर दर्शाना होगा। फीस के अलावा किसी भी तरह का शुल्क वसूलना फीस एक्ट के खिलाफ है। निर्धारित फीस तीन शैक्षणिक सत्रों के लिए होगी के लिए होगी। सिर्फ कुछ वक्त के लिए नहीं। पुस्तकों के मामले में लेखक का नाम, किताब की कीमत के साथ शैक्षणिक सत्र शुरू होने से एक महीने पहले स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होग ताकि पेरेंट्स उन्हें बाजार से भी खरीद सके। अब यहां पेच ये है कि बाजार से कैसे खरीदेगा अभिभावक। किताब तो उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे पब्लिशरों की किताबों दी गईं हैं जो ऑनलाइन भी नहीं मिल रही हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation चमत्कार : जयपुर में 23 महीने के बच्चे को लगाया 17.50 करोड़ का इंजेक्शन, अमेरिका से मंगवाया अकादमिक उत्कृष्टता के साथ उच्च शिक्षा में निम्स की अग्रणी भूमिका : प्रो.अमेरिका सिंह,सलाहकर