24 News Update उदयपुर। निर्माण हो रहा था अवैध रूप से। अफसर जागे, नोटिस दिया। उसके बाद मिलीभगत हो गई, सेटिंग हो गई। इतना बड़ा निर्माण हो गया। अब अचानक अफसरों को किसी उपरी शक्ति के आदेश पर आत्मज्ञान हुआ कि अवैध निर्माण तो पहाड़ काट कर पहाड़ जैसा हो गया है, तो अमला भेज कर सील करवा दिया। इस निर्माण को देख कर कोई बच्चा भी कह सकता है कि यहां मिलीभगत का खेल खुलकर चला है। वरना एक नोटिस के बाद किसी की ईंट रखने तक की हिम्मत ना हो। यहां तो लाखों का निर्माण दिखाई दे रहा है। बड़ा सवाल है कि हर बार इस तरह की कार्रवाई में ना तो अतिक्रमण करने वाले का नाम सार्वजनिक किया जाता है ना जिम्मेदार अफसरों का। याने दोनों की मिलीभगत दिखाई देती है। एकलिंगजी (कैलाशपुरी) तालाब के पास पहाड़ी भूमि को काटकर किए जा रहे व्यावसायिक निर्माण पर यूडीए ने कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया, लेकिन कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतना बड़ा निर्माण आखिर कई दिनों तक चलता कैसे रहा? यूडीए की ओर से बताया गया कि राजस्व ग्राम मूणवास की आराजी संख्या 1944/427 स्थित पहाड़ी भूमि पर बिना सक्षम अनुमति के निर्माण किया जा रहा था। प्राधिकरण ने पहले ही निर्माण रुकवाकर संबंधित पक्ष को पाबंद किया था, इसके बावजूद काम जारी रहा। बाद में यूडीए अधिनियम-2023 की धारा 32 के तहत नोटिस जारी किया गया और जवाब में भी कोई वैध स्वीकृति पेश नहीं की गई। इसके बाद निर्माण को सील कर दिया गया।
लेकिन सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था का है। पहाड़ी को काटकर इतना बड़ा व्यावसायिक निर्माण खड़ा हो गया और जिम्मेदार विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। मौके की स्थिति देखकर लगता है कि यह काम एक-दो दिन में नहीं हुआ होगा। कई दिनों तक मजदूर, मशीनें और निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचती रही होगी। ऐसे में यूडीए के निगरानी तंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एक बार नोटिस जारी कर देने भर से विभाग अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। अवैध निर्माणों पर नजर रखना और दोबारा काम शुरू होने पर तुरंत कार्रवाई करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी का हिस्सा है। अगर पाबंदी के बाद भी निर्माण चलता रहा तो यह व्यवस्था की कमजोरी को दिखाता है।
उदयपुर में अरावली के पहाड़ और तालाब शहर की पहचान और पर्यावरण की धरोहर हैं। ऐसे क्षेत्रों में अवैध निर्माण लंबे समय तक चलते रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। कार्रवाई के बाद अब यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि निर्माण शुरू होने से लेकर सील होने तक जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी कहां थी। अगर नहीं थी तो वे अफसर और कर्मचारी कौन हैं जिन्होंने मोट माल बना कर इतना बड़ा निर्माण होने दिया। यूडीए कमिश्नर अभिषेक खन्ना ने आमजन से अपील की है कि बिना अनुमति निर्माण नहीं करें। वहीं कार्रवाई तहसीलदार डॉ. अभिनव शर्मा के निर्देशन में भू-अभिलेख निरीक्षक राजेंद्र सेन, बाबूलाल तेली, पटवारी दीपक जोशी और होमगार्ड जाब्ते की मौजूदगी में की गई।


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By desk 24newsupdate

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