24 News Update उदयपुर। उदयपुर जिले में अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच कुराबड़ थाना पुलिस ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि “फरारी” कोई स्थायी समाधान नहीं, बस गिरफ्तारी की तारीख टालने का एक अस्थायी बहाना है। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशों में चल रही कार्रवाई के तहत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और पुलिस उप अधीक्षक गोपाल चंदेल के सुपरविजन में थानाधिकारी तेजु सिंह ने अपनी टीम के साथ मिलकर दो इनामी अपराधियों को आखिरकार कानून के शिकंजे में ले ही लिया।ये दोनों आरोपी—नरेश पुत्र मोहनलाल निवासी भंवरासिया घाटी थाना डबोक, जिला उदयपुर एवं मुकेश पुत्र गमेरलाल निवासी भंवरासिया थाना डबोक, जिला उदयपुर—पिछले चार महीनों से पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए फरार थे, जिन पर 5000-5000 रुपये का इनाम भी घोषित था। लेकिन तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र के संयोजन ने उनकी “आज़ादी” का रास्ता ट्रांसपोर्ट नगर, प्रतापनगर में ही बंद कर दिया। गिरफ्तारी के बाद अब दोनों को उस मामले में शामिल किया गया है, जो पहले ही नशीले पदार्थों की अवैध सप्लाई के जाल को उजागर कर चुका है। मामले की जड़: कोडीन की खेप और ट्रांसपोर्ट का नेटवर्कयह पूरा घटनाक्रम 27 दिसंबर 2025 से शुरू होता है, जब गोवर्धन विलास थाना पुलिस को सूचना मिली कि पुष्करराज पुत्र भंवरलाल निवासी ढिमड़ा, वल्लभनगर ने पुण्या ट्रान्सपोर्ट कॉर्पोरेशन, ब्लॉक-डी, 29 ट्रांसपोर्ट नगर, बलीचा, उदयपुर के माध्यम से प्रतिबंधित कोडीन युक्त नशीली दवाइयों की खेप मंगवाई है और वह खुद उसे लेने पहुंचा हुआ है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए न सिर्फ दवाइयों को जब्त किया बल्कि मौके से आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। इस पर प्रकरण संख्या 391/2025 धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज हुआ।यहीं से खुला वह जाल, जिसमें सप्लाई, परिवहन और वितरण की पूरी श्रृंखला शामिल थी। इस प्रकरण का अनुसंधान उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार थानाधिकारी तेजु सिंह द्वारा शुरू किया गया। हालांकि, नेटवर्क के अन्य सदस्य फरार हो गए, जिनमें से दो—अब गिरफ्तार—पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने हुए थे। टीमवर्क का असर: जमीनी पुलिसिंग से साइबर ट्रैकिंग तकइस कार्रवाई में थानाधिकारी तेजु सिंह के नेतृत्व में टीम के सदस्य—भगवत सिंह (स.उ.नि.), राजेन्द्र कुमार (कानि. 2997), माधुसिंह (कानि. 319), लोकेन्द्र सिंह (कानि. 1708), मुराराम (कानि. 3108), लीलाराम (कानि. 2751, अभय कमांड) और लोकेश रायकवाल (कानि. 2252, साइबर सेल)—ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तकनीकी सहायता और सूचनाओं के समन्वय ने इस ऑपरेशन को सफलता तक पहुंचाया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation म्यूल अकाउंट गिरोह पर साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 42 लाख की ठगी से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार 7 साल से फरार दो महिला वारंटी गिरफ्तार, ऋषभदेव पुलिस की सटीक कार्रवाई