- आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मासिक प्रवचन की धूम जारी
24 News Update उदयपुर। तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन मंदिर में श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्तवावधान में कला पूर्ण सूरी समुदाय की साध्वी जयदर्शिता श्रीजी, जिनरसा श्रीजी, जिनदर्शिता श्रीजी व जिनमुद्रा श्रीजी महाराज आदि ठाणा की चातुर्मास सम्पादित हो रहा है। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि शुक्रवार को आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे साध्वियों के सानिध्य में ज्ञान भक्ति एवं ज्ञान पूजा, अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। सभी श्रावक-श्राविकाओं ने जैन ग्रंथ की पूजा-अर्चना की।
आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में साध्वी जयदर्शिता श्रीजी ने प्रवचन में बताया कि मिथ्यात्व परम रोग है, मिथ्यात्व घोर अंधकार है, मिथ्यात्व भयंकर शत्रु है और मिथ्यात्व तीव्र जहर है। हिंसा आदि अठारह पाप स्थानक है। उसमें से सबसे भयंकर यदि कोई पाप है तो वह मिध्यात्व है। जब तक मिध्यात्व जीवित है, तब तक अन्य सभी पाप पुष्ट रहते हैं और यदि मिथ्यात्व मेर जाय तो सभी पाप कमजोर हो जाते है। जैसे कि जब तक आहार ग्रहण की क्रिया चालू रहती है तब तक शरीर के सभी अवयव बराबर काम करते हैं और जब आहार लेना बंद कर देते है तो शरीर कमजोर पडऩे लगता है। इसी प्रकार जब तक आत्मा मिध्यात्व के पाप का सेवन करती है तब तक हिंसा आदि सभी पाप मजबूत बनते जाते है और जैसे ही मिथ्यात्व का पाप नष्ट हो जाता है वैसे ही सभी पाप धीरे-धीरे क्षीण होता जाता है। इसलिए आत्मा को शुद्ध करने के लिए मिध्यात्व को जड़मूल से दूर करना अत्यंत ही जरूरी है।
इस अवसर पर कुलदीप नाहर, भोपाल सिंह नाहर, अशोक जैन, राजेन्द्र जवेरिया, प्रकाश नागोरी, दिनेश बापना, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, चतर सिंह पामेच, गोवर्धन सिंह बोल्या, सतीश कच्छारा, दिनेश भण्डारी, रविन्द्र बापना, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता आदि मौजूद रहे।
Discover more from 24 News Update
Subscribe to get the latest posts sent to your email.