– वीतराग प्रभु से उत्तर पाने के लिए स्वयं को योग्य बनाना जरूरी24 News Update उदयपुर, 8 अगस्त। अरिहंत और सिद्ध हमारे साध्य हैं और वंदित्ता सूत्र उस साध्य को साधने की साधना है। ‘इच्छामि पडिक्कमिउं’ कहकर श्रावक पंच परमेष्ठी की साक्षी में श्रावक धर्म में लगे अतिचारों से पीछे हटने के लिए प्रतिक्रमण करता है। भूलों के लिए क्षमा मांगने हेतु मन का निर्मल होना अत्यंत आवश्यक है। जब मन निर्मल होता है, तब ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहने के लिए हमारे हाथ स्वत: ही नमस्कार मुद्रा में आ जाते हैं। यह उद्गार मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चल रही 45 दिवसीय सिद्धि तप आराधना के दौरान आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वीतराग प्रभु से सभी प्रश्नों के उत्तर हमें अपने मन में ही प्राप्त हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए सच्ची श्रद्धा के साथ स्वयं को योग्य बनाना आवश्यक है। हमारी लायकी नहीं होगी तो कुछ भी संभव नहीं है। पुण्य रूपी बारिश में स्वयं को भिगोने के लिए मोह रूपी रेनकोट छोडऩा पड़ेगा। आचार्यश्री ने कहा कि प्रतिक्रमण केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि आत्मा को निर्मल करने की प्रक्रिया है। जब व्यक्ति अपने भीतर झांककर अपनी भूलों को स्वीकार करता है और उनके लिए सच्चे मन से क्षमा मांगता है, तभी प्रतिक्रमण सार्थक बनता है। मन में अहंकार, मोह और कषाय बने रहते हैं तो क्षमा के शब्द भी केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।श्रद्धा-भक्तिभाव से हो रही सिद्धि तप आराधनाश्रीसंघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ की ओर से मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में 45 दिवसीय सिद्धि तप आराधना आचार्य देव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज, मुनिराज नीतिप्रभ विजयजी महाराज एवं साध्वी श्रुतवर्धना श्रीजी महाराज आदि ठाणा की पावन निश्रा में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ चल रही है। प्रतिदिन प्रात: 7 बजे संतों के सानिध्य में आरती एवं मंगल दीपक के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ होता है। इसके पश्चात सर्वौषधियों से भगवान का महाभिषेक कराया जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा वासक्षेप, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत, नैवेद्य एवं फल अर्पित कर अष्टप्रकारी पूजा संपन्न की जाती है। श्रद्धालु पूर्ण विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ भगवान की आराधना कर आत्मिक शांति एवं पुण्य का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।इस अवसर पर श्रीसंघ के अध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र हिरण, कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया, राजकुमार बाबेल, नरेन्द्र सिंघवी, अशोक सेठ, प्रकाश गांधी, राकेश चेलावत, अभिषेक दावड़ा, अशोक जैन, राजेन्द्र कोठारी, भोपाल सिंह सिंघवी सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित रहकर सिद्धि तप आराधना में सहभागिता निभाई। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सिन्धी सर्टिफिकेट कोर्स की कक्षाएं पूर्ण, उदयपुर के 60 विद्यार्थी 16 अगस्त को देंगे परीक्षा सीसीटीवी में दिखा ‘कटे हाथ’ का सुराग, एक बाइक पर निकले तीन संदिग्ध तो पुलिस ने घेरा; दो चोरी की बाइक बरामद