24 News Update उदयपुर। शहर में तीन दिन से बवाल मचा हुआ है। जो सूचनाएं धीरे धीर लीक होकर जनता की सूचनाओं की चौपाल पर पहुंच रही हैं वे चौंकाने वाली हैं। एक—एक नाम पर लोग चौंक रहे हैं। अचंभा हो रहा है कि ‘अच्छा ये वाले भाई साहब भी इसमें शामिल हैं,,,अरे!!! इनको तो मैं साफ सुथरा मानता था, ये भी इनते गिरे हुए निकले। अरे!!! इनके पास तो पूरे जिले का जिम्मा है। अभी तो कॅरियर शुरू हुआ है, अभी से इनके ऐसे भयानक रंगरलियों के किस्से बाहर आ रहे हैं। अब लोग इसे उदयपुर एपस्टीन फाइल्स की संज्ञा देने लग गए हैं। एपस्टीन के कारनामों से पूरी दुनिया हिली हुई है। एक वैश्विक बदनामी का स्थानीय रूपक अब झीलों की नगरी में तैयार हो गया है। दुनिया ने देखा है कि कैसे जेफ्री एपस्टीन के नाम ने सत्ता, संपत्ति और शील के रिश्तों को तार—तार कर दिया। ऐसी ही सिहरन है हमारे यहां भी। नामों की फुसफुसाहट, रिकॉर्डिंग की अपुष्ट अफ़वाहें, और सब कुछ सहमति से था जैसी बातें। सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति जब निजी आनंद का हिसाब निजी नहीं रख सका तो अब चर्चा ए आम हो चला है। कहा जा रहा है कि फ्लैट में किसका होता था आना-जाना। उसके बाद निरंतर चलते सांस्कृतिक कार्यक्रम और उनकी छिपे हुए कैमरों से रिकॉर्डिंग।चर्म रोग वालों को इलाज की जरूरतयह सब होता रहा बिंदास क्योंकि सत्ता का संरक्षण रहा और डर गायब हो गया। दरअसल यह किसी बडी महामारी का लक्षण है जिसकी गिरफत में कई लोग आए हुए हैं। यह चर्मरोग है—छूत वाला। जो देह से ज़्यादा चरित्र को गलाता है। आज छह-सात नाम सामने आए हैं। कल संख्या बढ़ती जाने की संभावना है। अभी तो बात सौदेबाजी के स्तर पर ही सिमटी हुई है।खाकी की आस्तीन में कब तक छिपाएंगे राजसब कुछ खाकी वर्दी की आस्तीन दबा हुआ राज रखा जा रहा है मगर आने वाले समय में कहां से इसकी नई कोंपलें फूट आए, कहा नहीं जा सकता। वीडियो कहां कहां सेव हुए हैं यह तो वो ही बता सकते हैं जो इनके निर्माता—निर्देशक है। निर्देशक शब्द इसलिए काम में लिया क्योंकि कहा जा रहा है कि इनके कुछ निर्देशक भी है बहरहाल, निकाय चुनावों के टिकट में भी अब यही एपस्टीन फार्मूला काम करने वाला है। जो बहुत उड़ते थे वे आज जमीन पर आ गए हैं। एस्केप रूट मांग रहे हैं। आडियां खा रहे हैं कि किसी भी तरह से बचा लो इस आग से। बदले में जो चाहे बारगेनिंग कर लो। बदले में वे हो हाशिये पर चले गए थे उनका पावर अचानक बढ़ गया है। उनके लिए यह मौके पर चौके जैसा हो गया है।सांपनाथ व नागनाथ डसने को तैयारदलों की आंतरिक प्रतिस्पर्धा तो सबने देखी है मगर अब तो आंतरिक दल—दल की आंतरिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। अंदर बैठे सांपनाथ और नागनाथ सक्रिय होकर डसने को तैयार बैठे हैं। विष को फन तक पहुंचा कर साधने की तैयारी हो चुकी है। मगर मजे की बात है कि इतना होने भी वे सब चुप बैठे हैं जिनको बोलना चाहिए था। क्या इसकी वजह ये तो नहीं कि उनकी भी एपस्टीन फाइलें दूसरे पक्ष के पास हैं। याने, तुम हमारी फाइलें छिपाओ,हम तुम्हारी छिपाएंगे। अगर दूसरा पक्ष दूध का धुला होता तो अब तक तो जुलूस अपने आप निकल जाते। मगर ऐसा कुछ नहीं हो रहा है क्योंकि सब मिले हुए हैं। सबकी लंगोट में कहीं न कहीं छेद दिख रहे हैं।छिछोरपंथी अब स्वीकार्य नहींयह मान लेना कि रात को उठा लिया, कूट दिया, खाकी को मैनेज कर लिया….तो इससे कुछ होना जाना नहीं है। आज का समय फाइलों का है। वीडियो का है। डिजिटल स्मृति का है। यहाँ नैतिक साहस की परीक्षा होती है तो कई नप जाते हैं। जो चेहरे आज पोस्टरों में दिख रहे हैं हो सकता है कल उनके चेहरों पर कलिख पुती दिखा जाए। सार्वजनिक जीवन में चरित्र कोई वैकल्पिक शौक नहीं होता हे। यह अनिवार्य योग्यता है। नशा, लालच, और सत्ता का मद ये निजी कमजोरी नहीं रहते। ये किसी संस्थागत या पार्टी का भीषण संकट बन जाते हैं। आज मामला किसी एक दल, एक पद, या एक शहर का नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति का है जो गलत राय भी गलत नहीं कहकर आत्मसंतोष पाल लेती है। यही आत्मसंतोष महामारी बनता है। उदयपुर को इस चर्म वाले रोग की महामारी से छुटकारा दिलाने के महा अभियान की जरूरत है। यदि उपरी स्तर पर यह सफाई आज नहीं होती है तो दल का दल—दल में गिरकर कीचड़ में लथपथ हो जाना तय है। तब वे भी कीचड में सने नजर आएंगे जो साफ चरित्र के होने का दावा करते हैं। यह चेतावनी नहीं समय के सत्य का आईना है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation चेटीचंड पर सिंधी समाज के 12 दिवसीय भव्य कार्यक्रमों की श्रृंखला घोषित विनिता जैन मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश, जांच जारी रहेगी, गिरफ्तारी पर रोक बरकरार