24 News Update नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए (UAPA) मामलों में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों अगले एक वर्ष तक जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे। वहीं, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—इन पाँच आरोपियों को 12 कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी गई।ये सभी आरोपी पाँच साल तीन महीने से अधिक समय से तिहाड़ जेल में बंद थे और उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस कॉमन आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें UAPA के तहत जमानत से इनकार किया गया था। कोर्ट का संतुलन: अनुच्छेद 21 बनाम UAPAसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) संवैधानिक व्यवस्था में विशेष स्थान रखता है और ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि UAPA एक विशेष कानून है, जिसमें धारा 43D(5) के तहत जमानत के सामान्य मानकों से अलग परीक्षण लागू होता है।अदालत के अनुसार, राज्य की सुरक्षा और अखंडता से जुड़े मामलों में केवल देरी को जमानत का ‘तुरुप का पत्ता’ नहीं बनाया जा सकता। फैसले की प्रमुख बातेंहाईकोर्ट के कॉमन आदेश के खिलाफ अपीलें थीं; लंबी हिरासत और अनुच्छेद 21 पर दलीलें दी गईं। अदालत ने कहा कि यह संविधान बनाम कानून की अमूर्त तुलना नहीं, बल्कि कानून के ढांचे के भीतर न्यायिक परीक्षण है।UAPA 43D(5) जमानत के सामान्य प्रावधानों से अलग है, पर यह न्यायिक जांच को खत्म नहीं करता। UAPA की धारा 15 के अनुसार आतंकवादी कृत्य में आतंक फैलाने का इरादा और उससे उत्पन्न/संभावित परिणाम महत्वपूर्ण हैं। सभी आरोपी एक जैसी स्थिति में नहीं; व्यक्तिगत मूल्यांकन जरूरी। प्री-ट्रायल हिरासत लंबी होने पर राज्य को अनुच्छेद 21 के तहत औचित्य बताना होगा। ट्रायल कोर्ट को तेजी से सुनवाई और संरक्षित गवाहों की बिना देरी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश। बचाव पक्ष: “दंगे भड़काने का ठोस सबूत नहीं”आरोपियों ने दलील दी कि ट्रायल शुरू होने में लगातार देरी हो रही है, वे पाँच साल से अधिक समय से जेल में हैं और दंगे भड़काने से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने नहीं आए। हाईकोर्ट का रुख और पुलिस का विरोधदिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा था कि उमर और शरजील की भूमिका प्रथम दृष्टया गंभीर प्रतीत होती है; उन पर सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण और भीड़ उकसाने के आरोप हैं।दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत का विरोध किया और कहा कि सुनवाई में देरी के लिए आरोपी स्वयं जिम्मेदार हैं; सहयोग मिलने पर दो साल में ट्रायल पूरा किया जा सकता है। 2020 दंगे: पृष्ठभूमिफरवरी 2020 में CAA–NRC विरोध के दौरान दिल्ली में हिंसा भड़की थी। 53 मौतें, 250+ घायल, और 750+ FIR दर्ज हुई थीं।शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 (दंगों से छह सप्ताह पहले) और उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया।पुलिस का दावा: “पूर्व नियोजित साजिश”पुलिस के मुताबिक, दंगे अचानक नहीं, बल्कि पैन-इंडिया साजिश का हिस्सा थे—उद्देश्य ‘सत्ता परिवर्तन’ और ‘आर्थिक दबाव’ बनाना। आरोप है कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के समय हिंसा कर अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचने की योजना थी।जांच में व्हाट्सएप ग्रुप्स, दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) और जामिया अवेयरनेस कैंपेन टीम का भी उल्लेख किया गया है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation तस्करों पर करारा प्रहार, 34.500 किलो अवैध गांजा जब्त, आरोपी फरार अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के निजी आवास पर हमला, एक संदिग्ध हिरासत में