24 News Update उदयपुर, 2 सितम्बर। जिस तरह कपड़े समय के साथ मैले हो जाते हैं और पानी, साबुन अथवा सोडे से धोने पर स्वच्छ हो जाते हैं, उसी प्रकार आत्मा भी अनादिकाल से संसार में भटकते हुए कर्मों के मैल से ढकी हुई है। इस कर्म-मैल को तप के माध्यम से दूर करना ही निर्जरा है। आत्मा को कर्मों से मुक्त करने के लिए जैन दर्शन में बारह प्रकार के तप बताए गए हैं।आयड़ जैन तीर्थ में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचनों के दौरान मालव मार्तण्ड आचार्य मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज ने ‘शांत सुधारस ग्रंथ’ की नौवीं निर्जरा भावना पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए।आचार्यश्री ने बताया कि तप के बारह भेद हैं। इनमें अनशन, ऊनोदरी, वृत्तिसंक्षेप, रसत्याग, कायक्लेश और संलीनता छह बाह्य तप हैं, जबकि प्रायश्चित, विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय, ध्यान और कायोत्सर्ग छह अभ्यंतर तप हैं। बाह्य तप साधक को धीरे-धीरे आंतरिक साधना की ओर ले जाते हैं।उन्होंने कहा कि तप का उद्देश्य केवल शरीर को कष्ट देना नहीं है। समता भाव, संयम और शुद्ध आत्मभाव के साथ किया गया तप ही वास्तविक आत्मशुद्धि का माध्यम बनता है। जब साधक तप के साथ अपने भीतर समता और संयम विकसित करता है, तब कर्मों की निर्जरा का मार्ग प्रशस्त होता है और वह संसार के बंधनों से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ता है।आचार्यश्री ने तप की महत्ता बताते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ ने 400 दिन तक निर्जल अर्थात चौविहार उपवास कर तप की उच्चतम साधना का उदाहरण प्रस्तुत किया। वहीं भगवान महावीर स्वामी की साढ़े बारह वर्ष की साधना में साढ़े ग्यारह वर्ष से अधिक समय निर्जल उपवास में व्यतीत हुआ। इससे तप की महानता और आत्मशुद्धि में उसकी भूमिका का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। चातुर्मास में धार्मिक आयोजनों की धूममहासभा महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन तीर्थ में मालव मार्तण्ड आचार्य भगवंत मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज, आचार्य अचल मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज सहित ठाणा-4 के सानिध्य में चातुर्मास महोत्सव श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ जारी है। प्रतिदिन होने वाले धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल होकर धर्मलाभ ले रहे हैं। आयड़ जैन तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में आयोजित धर्मसभा में कुलदीप नाहर, भोपाल सिंह नाहर, चन्द्र सिंह, अशोक जैन, राजेंद्र जावरिया, प्रकाश नागौरी, हेमंत सिंघवी, राजेश जावरिया, दिनेश बापना, भोपाल सिंह परमार, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, चतर सिंह पामेच, सतीश कच्छारा, दिनेश भंडारी, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया और कुलदीप मेहता सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation इस्काॅन मन्दिर मे 3 दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव 3 से भक्तो के लिए 4 को दर्शन दिनभर खुले रहेगें 7 हजार पार पहुंचा जिंक सिटी हाफ मैराथन का रजिस्ट्रेशन, लॉन्च हुआ खास ‘जिंक फिनिशर मेडल’