उदयपुर। शहर और ग्रामीण अंचलों में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से राहडा फाउंडेशन लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्था की संस्थापक अर्चना सिंह चारण के नेतृत्व में चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के तहत अब तक 35 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है, जबकि 20 हजार से ज्यादा सूती और जूट के थैलों का वितरण कर लोगों को प्लास्टिक के विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है। फाउंडेशन द्वारा उदयपुर शहर, अरावली क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक परिसरों और ग्रामीण इलाकों में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए गए हैं। संस्था केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण और नियमित देखभाल पर भी विशेष ध्यान दे रही है ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में सघन हरित क्षेत्र का रूप ले सकें। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए संस्था विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रही है। हाल के महीनों में आयोजित अनेक आयोजनों में एक हजार से अधिक पौधे और कॉटन बैग वितरित किए गए हैं। लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए कपड़े और जूट के थैलों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। राहडा फाउंडेशन का ‘‘नो प्लास्टिक अभियान’’ शहर के विभिन्न हिस्सों में लगातार चल रहा है। संस्था का मानना है कि एकल उपयोग प्लास्टिक पर निर्भरता कम किए बिना स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण की कल्पना संभव नहीं है। इसी सोच के साथ नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संस्था की एक उल्लेखनीय पहल राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से विकसित गौकाष्ठ आधारित पर्यावरणीय मॉडल भी है। इस मॉडल के तहत गोबर और जैविक अवशेषों से गौकाष्ठ लॉग्स एवं ब्रिक्स तैयार किए जाते हैं, जो पारंपरिक लकड़ी का पर्यावरण अनुकूल विकल्प हैं। इससे वृक्षों की कटाई कम करने, जैविक अपशिष्ट के उपयोग को बढ़ावा देने और गो संरक्षण को प्रोत्साहन मिला है। संस्था ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अज्ञात व्यक्तियों के अंतिम संस्कार में भी गौकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा दिया है। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राहडा फाउंडेशन जल संरक्षण, स्वच्छता, जैविक खेती, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम संचालित कर रहा है। दक्षिणी राजस्थान के कई गांवों में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ टिकाऊ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया जा रहा है। संस्था ने पर्यावरण संरक्षण को महिला सशक्तिकरण से भी जोड़ा है। महिलाओं को नर्सरी विकास, पौध संरक्षण, पर्यावरण हितैषी उत्पाद निर्माण और हरित उद्यमिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं युवाओं को वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। संस्थापक अर्चना सिंह चारण ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राहडा फाउंडेशन आने वाले समय में अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने, प्लास्टिक उपयोग को न्यूनतम करने तथा युवाओं और महिलाओं को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ने के लिए और व्यापक स्तर पर अभियान चलाएगा। उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य एक स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के प्रति जागरूक समाज का निर्माण करना है, जिसके लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation अखिल भारतीय श्री त्रिवेदी मेवाड़ा ब्राह्मण समाज : आठ चौखलों के युवा पहली बार एक मंच पर, समाज भवन महायज्ञ की तैयारियों के बीच एकजुटता का दिखा दम कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स ने उठाई लंबित भुगतान की आवाज, नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह सोलंकी का हुआ अभिनंदन