24 News Updaet उदयपुर, 8 अगस्त। नगर निगम में आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी प्रशासन के दावों के बीच अब ‘पर्ची व्यवस्था’ चर्चा का विषय बन गई है। नवनियुक्त उपायुक्त नरेश सोनी के कार्यालय के बाहर सूचना चस्पा है कि पट्टे और नामांतरण से संबंधित जानकारी के लिए सुबह 9:30 से 11 बजे तथा दोपहर 2 से 3 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। लेकिन इन निर्धारित समयों में अधिकारी से मिलना भी आमजन के लिए आसान नहीं बताया जा रहा।
उपायुक्त से मिलने पहुंचने वाले लोगों को पहले एक मुद्रित पर्ची भरनी पड़ती है। यह पर्ची सीधे उपायुक्त को संबोधित है, जिसमें पट्टा अथवा लीज डीड क्रमांक, नामांतरण क्रमांक, समस्या का विवरण, आवेदक का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है। पर्ची के अंत में यह आश्वासन दर्ज है कि नियमानुसार कार्यवाही कर निर्धारित अवधि में दूरभाष के माध्यम से सूचित किया जाएगा।

मिलने के बजाय पर्ची, समाधान के बजाय इंतजार
आमजन की शिकायत यह है कि समस्या लेकर अधिकारी से प्रत्यक्ष मिलने की उम्मीद में निगम पहुंचने के बाद उन्हें अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने के बजाय पर्ची भरकर लौटना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि पर्ची जमा करने के बाद भी समस्या का समाधान कब होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती और अधिकारी से प्रत्यक्ष मुलाकात भी नहीं हो पाती। जनता का सवाल सीधा है कि यदि किसी नागरिक की फाइल में गंभीर समस्या है, दस्तावेज को लेकर भ्रम है या किसी पुराने मामले में प्रशासनिक स्तर पर निर्णय की जरूरत है तो केवल तय समय पर एक पर्ची में समस्या लिख देने से उसका समाधान कैसे होगा?

‘घर बैठे समाधान’ की व्यवस्था या कार्यालय से दूरी?
निगम की इस व्यवस्था को लेकर आमजन में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि अधिकारी से मिलने के बजाय समस्या लिखकर पर्ची जमा करनी है और बाद में फोन से जवाब देने की व्यवस्था है तो इसे वास्तविक जनसुनवाई कैसे माना जाए? पीड़ितों का कहना है कि आज तकनीक के दौर में आवेदन, शिकायत और जवाब की प्रक्रिया ऑनलाइन भी संचालित की जा सकती है। ऐसे में जनता के लिए सबसे जरूरी बात अधिकारी तक अपनी समस्या सीधे पहुंचाना और समयबद्ध समाधान पाना है। केवल पर्ची लेकर नागरिक को वापस भेज देने से कार्यालयी प्रक्रिया तो पूरी हो सकती है, लेकिन जनसुनवाई का उद्देश्य पूरा होना जरूरी नहीं।

आयुक्त के बाद उपायुक्त ही उम्मीद का केंद्र
नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में उपायुक्त का पद आमजन की रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। ऐसे में यदि आयुक्त स्तर पर भी आमजन की प्रत्यक्ष पहुंच सीमित हो और उपायुक्त कार्यालय में भी पर्ची व्यवस्था के कारण अधिकारी से मुलाकात मुश्किल हो जाए तो जनता अपनी समस्या लेकर आखिर किस स्तर पर जाए?
शहरवासियों का कहना है कि अधिकारियों की व्यस्तता अपनी जगह है, लेकिन जनता के लिए निर्धारित समय में प्रत्यक्ष सुनवाई की व्यवस्था प्रभावी रहनी चाहिए। खासकर पट्टा, नामांतरण और संपत्ति से जुड़े मामलों में एक छोटी-सी प्रशासनिक अस्पष्टता भी नागरिक के लिए महीनों की परेशानी बन सकती है।

पर्ची का जवाब नहीं, समाधान चाहिए
जनता को सरकारी कार्यालय से सबसे पहले सुनवाई, स्पष्ट जवाब और समयबद्ध समाधान चाहिए। यदि किसी मामले में दस्तावेज अधूरे हैं तो नागरिक को बताया जाए कि कौन-सा दस्तावेज चाहिए। यदि आवेदन नियमों के अनुरूप नहीं है तो उसका स्पष्ट कारण दिया जाए और यदि फाइल कार्रवाई योग्य है तो उसकी समयसीमा तय हो। सिर्फ यह कह देना कि ‘नियमानुसार कार्रवाई कर दूरभाष से सूचित किया जाएगा’ उस नागरिक की परेशानी का समाधान नहीं है जो अपनी फाइल की स्थिति जानने के लिए निगम के चक्कर काट रहा है।


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By desk 24newsupdate

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