24 News Update भीलवाड़ा. भीलवाड़ा ज़िले नई दिल्ली राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भीलवाड़ा जिले के फुलिया कलां थाने से जुड़े मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) को 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।क्या है मामलामसूदा निवासी पीड़ित ‘प्रकाश’ ने आरोप लगाया है कि 23 फरवरी 2025 को फुलिया कलां थाना पुलिस उसे घर से उठाकर थाने ले गई, जहां उसके साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया गया।आरोप है कि थाने में उसे कपड़े उतरवाकर हवालात में बंद किया गया और रात के समय पुलिसकर्मियों ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया।इस दौरान पुलिसकर्मियों में जगदीश, महावीर और भारमल पर पैरों में लकड़ी बांधकर उल्टा लटकाने और रबर के पट्टों से बेरहमी से पिटाई करने के आरोप लगाए गए हैं। जिस पर मौके पर फुलिया कलां थाना एसएचओ माया बैरवा भी मौजूद थींपीड़ित के अनुसार, इस मारपीट में उसके कान में गंभीर चोट आई, जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित हुई।आयोग के सख्त निर्देशआयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए निर्देश दिए कि:जांच निष्पक्ष और कानून के अनुसार की जाएपीड़ित की भागीदारी सुनिश्चित होहर कार्रवाई की जानकारी पीड़ित पक्ष को दी जाएपूरी रिपोर्ट 4 सप्ताह में आयोग को भेजी जाएशिकायत और कार्रवाईमानवाधिकार कार्यकर्ता राजकुमार गर्ग ने 17 मार्च 2025 को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। 23 अप्रैल 2026 की सुनवाई के बाद आयोग ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए पुलिस प्रशासन को जवाबदेह बनाया।बढ़ा दबावNHRC के आदेश के बाद फुलिया कलां थाना और भीलवाड़ा पुलिस प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। आदेश की अवहेलना होने पर संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष पेश होना पड़ सकता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation साफ़-सफाई की मांग उठाना पड़ा भारी: सरदारपुरा में शिकायतकर्ता को ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा जान से मारने की धमकी भीषण गर्मी में बिजली की आंख-मिचौनी: फुलिया कला में 5-5 घंटे की कटौती से जनजीवन अस्त-व्यस्त, बिना सूचना कटौती से लोग परेशान, ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और गंभीर—बच्चे, बुजुर्ग व मरीज सबसे अधिक प्रभावित