24 News update उदयपुर। लेकसिटी में पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर हालात बहुत भयानक और चिंताजनक हैं। आम जन की शिकायतों को जूतों तले मसल कर कूड़ेदान में डाला जा रहा है। परेशान लोग प्रशासन—पुलिस के बनाए दुष्चक्र में फंस कानून की दहलीज तक सिर पटक—पटक कर थक रहे हैं मगर न्याय नहीं मिल रहा है। साधारण काम तक बिना पैसा, बिना जैक जुगाड़ के नहीं हो रहे हैं। जहां जाहो वहां पर गिद्द बैठे हैं पुलिस से लेकर प्रशासन के हर डिपार्टमेंट में यही हाल है। अब हालात विकट हैं, छोटे से मामले में शिकायत पर सरेआम सरेराह मर्डर हो रहे हैं। ऐसे में आम आदमी जाए तो कहां जाए??प्रतापनगर थाना क्षेत्र के ओस्तवाल नगर में 68 वर्षीय खेरोदा निवासी सागरमल मेहता की हत्या ने ऐसे भीषण सवाल खड़े किए हैं जिनका जवाब प्रशासन ने अगर समय रहते नहीं दिया तो हालात विस्फोटक हो जाएंगे। जनता के धैर्य की सीमा जवाब दे जाएगी। संभाले नहीं संभलेंगे। तब लोग कहेंगे कि जनता सड़कों पर हैं और सिस्टम रेंग रहा है। इस मामले को देखिये, सब नंगे हो रहे हैं क्या पुलिस, क्या प्रशासन। दबंग नेता अपनी पहुंचे के दम पर पूरे सिस्टम को उंगलियों पर नचा रहा है और प्रशासन पद, पैसों के प्रभाव में हाथ पर हाथ धरे बैठा है। पुलिस तो माशा अल्लाह है। परिवाद और एप्लीकेशन पर कोई कार्रवाई नहीं। उपर से पिटाई के बाद मर्डर के आरोपी खुद थाने में प्रदर्शन करवा रहे हैं। और मामला खुलते ही थाने से ही चंपत हो रहे हैं। इससे ज्यादा गजब की बात क्या होगी। यूडीए के अफसर मदस्त हो गए हैं, नेताओं के इशारों पर काम हो रहे हैं, आम आदमी अपने काम के लिए जूते घिस रहा है। यूडीए के महाभ्रष्ट अफसरों ने सेटबेक में लगातार हो रहे निर्माण की शिकायतों पर केवल इसलिए ध्यान नहीं दे रहे हैं क्योंकि उस आम आदमी की कहीं सेटिंग नहीं है, वो पटवारी से लेकर अफसरों तक के मुंह में नोटों के बंडल नहीं ठूंस पा रहा है। और कितना गिरोगे यार….।उम्र के आखिरी पड़ाव में सब तरफ शिकायतें कर हार चुका व्यक्ति महंगे वकील कर कानून की शरण में जाने पर मजबूर हैं। उसके बाद गुंडों के हाथ पिट कर जान गंवा रहे हैं। ये हो क्या रहा है हमारे शांत और सभ्य शहर में। हमने विधायक व सांसदों को आखिर किसलिए चुना है, वो सिस्टम को दुरूस्त करने के लिए आखिर क्यों कुछ नहीं कर रहे हैं। वो अपने सुपरबॉस की चाटुकारिता में लगे हैं, इधर, निरंकुश प्रशासन के चलते गुंडों में कानून का डर खत्म हो चला है। जिसकी राजनीतिक दुकान में गुंडागर्दी का सामान है और धन का बल है वो चाहे जो कर पा रहा है। किसी को भी सरेराह मार सकता है। उसके लिए कानून से उपर होने की स्थितियां नजर आ रही है। सागरमल मेहता के मर्डर के बाद आनन फानन में प्रशासन ने मुख्य आरोपी के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि अवैध निर्माण पहले ही ध्वस्त कर दिया जाता तो क्या यह विवाद हत्या तक पहुंचता?स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि मुख्य आरोपी प्रवीण सिंह राव लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर सेटबैक में अवैध निर्माण कर रहा था। इसे लेकर यूडीए, नगर निगम और पुलिस को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कार्रवाई तो दूर, पीडित का पक्ष तक नहीं सुना गया। क्योंकि धनबल, मसल पावर के साथ ही पोलिटिकल पावर का असर था। आरोप है कि शिकायतों की अनदेखी के कारण आरोपी के हौसले इतने बढ़ते गए और आखिरकार मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया। तो फिर हम अफसरों को आखिर क्यों हत्या का आरोपी नहीं मानें???? मेहता की हत्या के बाद एमबी अस्पताल की मोर्चरी पर बड़ी संख्या में समाजजन जुटे और पुलिस प्रशासन व यूडीए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसी को नहीं बख्शा, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यूडीए समय रहते अपना दायित्व निभाते तो एक बुजुर्ग की जान नहीं जाती। लोगों ने केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अवैध निर्माण की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई है। अफसर सस्पेंड—टर्मिनेट नहीं होगे तो सिस्टम कभी नहीं सुधरेगा। सवाल ये कि पटवारी क्या कर रहा था, इस मामले में, तहसीलदार क्या सो रहा था। यूडीए के आयुक्तों को क्या नेताओं की जी हुजूरी से फुर्सत नहीं थी??? आंच इन पदों पर भी आनी ही चाहिए व यहां भी सस्पेंशन से लेकर टर्मिनेशन तक की कार्रवाई होनी ही चाहिए। यह मांग मोर्चरी के बाहर चीखें बनकर गूंज उठीं। मृतक की बेटी प्रीति मेहता ने रोते हुए कहा कि उनके पिता ने अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और फैसला पक्ष में आया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका। याने कोर्ट का आदेश भी गुंडों के आगे हवा—हवाई है। मेहता ने आरोप लगाया कि प्रवीण सिंह राव और उसके साथियों ने उनके पिता पर बेरहमी से हमला किया, जिससे उनकी पसलियां और श्वास नली तक टूट गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सच तो ये है कि पूरे सिस्टम की पसलियां कुछ लोगों ने तोड़ दी है और उस पर कब्जा कर लिया है। पुलिस और प्रशासन उनके इशारों पर चलता है। अब जबकि अवैध निर्माण पर बुलडोजर चल चुका है, शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है—सैंकड़ों शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले यूडीए और पुलिस के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? वे कब नपेंगे?? क्या केवल बुलडोजर चलाना ही पर्याप्त है या प्रशासनिक लापरवाही तय कर जिम्मेदार अधिकारियों को भी निलंबित किया जाएगा? कहीं ऐसा ना हो कि बुडलोजर चलाकर अफसर चैन की नींद सो जाएं। अगर ऐसा हुआ तो जन भावनाओं का विस्फोट होना तय है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. 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