बचपन में परिवार की सेवा करने वाले शख्स को मंच पर बुलाकर पैर छुए, गले लगाकर जाना कुशलक्षेम; निम्बाहेड़ा की गलियों में साइकिल पर घूमने की यादें हुईं ताजा निम्बाहेड़ा (कविता पारख)। रिश्तों की असली खूबसूरती वक्त के साथ नहीं, बल्कि दिलों में संजोई गई यादों से पहचानी जाती है। वर्षों बाद जब बचपन में अपने परिवार की सेवा करने वाले मगनीराम जी से राष्ट्रीय कवि शैलेश लोढ़ा का सामना हुआ, तो वे अपने भावों पर काबू नहीं रख सके। निम्बाहेड़ा दशहरा मेले के मीरा रंगमंच पर आयोजित कवि सम्मेलन में एक ऐसा आत्मीय और भावुक पल देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया। अपने पुराने परिचित मगनीराम जी को सामने देखकर शैलेश लोढ़ा की आंखें छलक पड़ीं। उन्होंने मंच पर पहुंचकर उनके पैर छुए, गले लगाया और फिर एकांत में बैठकर परिवार की कुशलक्षेम पूछी। ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ धारावाहिक में लंबे समय तक अपनी प्रभावशाली उपस्थिति से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले शैलेश लोढ़ा निम्बाहेड़ा दशहरा मेले में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने पहुंचे थे। कार्यक्रम शुरू होने से करीब तीन घंटे पहले एक खबरनवीस ने उन्हें एक पर्ची भेजी। पर्ची में सूचना दी गई थी कि उनके बचपन के दिनों में उनके और उनके परिवार की देखभाल करने वाले मगनीराम जी भी मीरा रंगमंच के पास मौजूद हैं। यह खबर पढ़ते ही शैलेश लोढ़ा भावुक हो उठे। उन्होंने तत्काल अपने पीए को निर्देश दिए कि संबंधित खबरनवीस से संपर्क कर मगनीराम जी को मंच पर सम्मानपूर्वक कुर्सी पर बैठाया जाए। निर्देशानुसार मगनीराम जी को मंच पर पीछे की ओर रखी कुर्सी पर बैठाया गया। जैसे ही शैलेश लोढ़ा को उनके वहां होने का पता चला, वे पलटकर सीधे उनके पास पहुंचे। वर्षों पुरानी आत्मीयता एक बार फिर जीवंत हो उठी। लोढ़ा ने मगनीराम जी के पैर छुए और उन्हें गले लगा लिया। इसके बाद दोनों मंच के पीछे बने कमरे में गए, जहां उन्होंने बैठकर एक-दूसरे और परिवार के बारे में कुशलक्षेम पूछी। यह मुलाकात महज दो परिचितों का मिलना नहीं, बल्कि बचपन में बने रिश्ते के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और अपनत्व का भावपूर्ण उदाहरण बन गई। बचपन की यादों से जुड़ा है निम्बाहेड़ा मगनीराम का शैलेश लोढ़ा के जीवन से गहरा जुड़ाव रहा है। जब शैलेश लोढ़ा तीसरी कक्षा में पढ़ते थे, उस समय उनके पिता निम्बाहेड़ा के समाज कल्याण विभाग में कार्यरत थे। उसी दौरान मगनीराम जी ने लोढ़ा और उनके परिवार की खूब सेवा की थी। वे शैलेश लोढ़ा को अपनी साइकिल पर पीछे बैठाकर निम्बाहेड़ा की गलियों और बाजारों में घुमाया करते थे। बचपन में बिताए गए वे दिन और मगनीराम जी का स्नेह लोढ़ा के जीवन की ऐसी यादें हैं, जिन्हें वे आज भी भूले नहीं हैं। समाज कल्याण विभाग से सेवानिवृत्त मगनीराम जी आज भी साइकिल पर चलते हैं। सादगी से जीवन जीने वाले मगनीराम जी के लिए अपने बचपन से जुड़े प्रिय व्यक्ति से मिलना जितना भावुक क्षण था, उतना ही यादगार शैलेश लोढ़ा के लिए भी रहा। प्रसिद्धि और व्यस्तताओं के बीच भी अपने पुराने संबंधों को याद रखना और उन्हें सम्मान देना इस मुलाकात की सबसे खास बात रही। पांच दिन से संजोए बैठे थे मिलने की आस इस भावुक मिलन के पीछे एक खबरनवीस की पहल भी महत्वपूर्ण रही। मगनीराम जी पिछले पांच दिनों से उनके संपर्क में थे। उन्होंने शैलेश लोढ़ा के साथ बचपन में रहे अपने घनिष्ठ जुड़ाव के बारे में बताया था। हालांकि, उनके मन में यह आशंका भी थी कि कवि सम्मेलन में भारी संख्या में उपस्थित लोगों के बीच क्या उन्हें शैलेश लोढ़ा से मिलने का अवसर मिल पाएगा। खबरनवीस ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि उनकी मुलाकात जरूर करवाई जाएगी और शैलेश लोढ़ा स्वयं आगे बढ़कर उनसे मिलेंगे। अंततः वही हुआ। पर्ची के माध्यम से शैलेश लोढ़ा तक पहुंची सूचना ने वर्षों पुराने रिश्ते को फिर से सामने ला दिया। निम्बाहेड़ा के दशहरा मेले में आयोजित कवि सम्मेलन के बीच घटित यह प्रसंग याद दिला गया कि इंसान चाहे कितनी भी ऊंचाइयां हासिल कर ले, बचपन में मिले स्नेह और कठिन समय में साथ देने वाले लोगों का स्थान उसके जीवन में हमेशा खास रहता है। मगनीराम जी और शैलेश लोढ़ा की यह मुलाकात केवल एक भावुक दृश्य नहीं, बल्कि पुराने रिश्तों को दिल से निभाने की खूबसूरत मिसाल बन गई। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation पीएम श्री विद्यालय निम्बाहेड़ा में ईसीसीई बाल मेले का आयोजन, बच्चों ने दिखाई प्रतिभा उपखंड अधिकारी ने गौशाला का भौतिक सत्यापन एवं औचक निरीक्षण कर गौसेवा और व्यवस्थाओं का लिया जायजा