24 News Update उदयपुर: उदयपुर क्षेत्र में न्यूरोवैस्कुलर देखभाल में प्रगति का एक शानदार उदाहरण पेश करते हुए पारस हेल्थ ने शहर की पहली बहुत ही जटिल इंट्राक्रेनियल वर्टेब्रल आर्टरी स्टेंटिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक अंजाम दी। इसके जरिए मरीज को बड़े स्ट्रोक के खतरे से और स्थाई पैरालिसिस से बचाया गया।यह एडवांस्ड प्रक्रिया न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. तरुण माथुर ने एक मरीज़ पर किया। इस मरीज़ में उसकी बाईं वर्टिब्रल आर्टरी (धमनी) बहुत सिकुड़ने का पता चला था। यह आर्टरी दिमाग में खून पहुंचाने वाली विशेष आर्टरियो में से एक होती है।मरीज़ को बार-बार चक्कर आ रहे थे, चलते समय वह संभल नहीं पा रहा था, उसे कमज़ोरी महसूस हो रही थी, और स्ट्रोक आने से जुड़े दूसरे चेतावनी के संकेत मिल रहे थे। विस्तृत मेडिकल जांच से पता चला कि आर्टरी के इंट्राक्रेनियल हिस्से में एक गंभीर रुकावट है। अगर इस रुकावट का समाधान न होता तो मरीज़ को जानलेवा स्ट्रोक होने का बहुत ज़्यादा खतरा था।बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल टीम ने ओपेन सर्जरी की जगह एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव न्यूरो इंटरवेंशन करने का फैसला किया। इसके लिए स्पेशलाइज्ड माइक्रोकैथेटर और इमेजिंग गाइडेंस का उपयोग हुआ। डॉक्टरों ने मस्तिष्क की नाजुक खून की नसों में सावधानीपूर्वक स्टेंट डाला और मस्तिष्क में खून का बहाव सामान्य किया।मस्तिष्क के अंदर खून की नसों के सेंसिटिव और कॉम्प्लेक्स होने की वजह से इंट्राक्रेनियल स्टेंटिंग प्रक्रिया को बहुत मुश्किल माना जाता है, क्योंकि इसके लिए बहुत ज़्यादा सटीकता, विशेषज्ञता और एडवांस्ड न्यूरो-इंटरवेंशनल क्षमताओं की ज़रूरत होती है।इस केस के बारे में बात करते हुए डॉ तरुण माथुर ने कहा, “बहुत से लोग बार-बार चक्कर आना, शरीर का असंतुलित होना, अचानक कमजोरी, या छोटे न्यूरोलॉजिकल एपिसोड जैसे लक्षणों को यह सोचकर अनदेखा कर देते हैं, कि ये थोड़े समय के लिए हैं। हालांकि ये कभी-कभी गंभीर स्ट्रोक के खतरे के शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकते हैं। इस मामले में समय पर डायग्नोसिस और एडवांस्ड न्यूरो-इंटरवेंशन ने हमें उस बीमारी को रोकने में मदद की जो ज़िंदगी बदलने वाली बन सकती थी। इस तरह की प्रक्रिया हमें बताती हैं कि कैसे जल्दी मेडिकल हस्तक्षेप और स्पेशलाइज्ड न्यूरोलॉजिकल देखभाल तक पहुंच मरीज़ के सेहत में बड़ा फर्क ला सकती है।”इस सफ़ल प्रक्रिया के बाद मरीज़ की हालत अब स्थिर है और अच्छे से रिकवर कर रहा है। डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि वह धीरे धीरे अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस आ जायेगा। यह सफल इलाज़ उदयपुर में एडवांस्ड स्ट्रोक और न्यूरोवैस्कुलर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, और यह इस क्षेत्र में जटिल तथा न्यूनतम चीर-फाड़ वाली न्यूरोलॉजिकल देखभाल की बढ़ती उपलब्धता को दर्शाता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation खेरवाड़ा में घरेलू विवाद में पिता ने बेटे पर बरसाए चाकू के वार, मौके पर मौत लोक कला मंडल के सामने दिनदहाड़े किडनैपिंग! चाय पी रहे युवक को स्कॉर्पियो में उठाया, 5 लाख की फिरौती मांगी; 12 घंटे में पुलिस ने दबोचे 6 आरोपी