24 News Update उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय प्रशासन एक बार फिर करीब 300 एसएफएबी कर्मचारियों को बाहर करने की तैयारी में जुट गया है। हैरानी की बात यह है कि जिस एजेंसी प्रणाली का स्वयं विश्वविद्यालय प्रशासन पहले विरोध करता रहा, अब वही प्रशासन एजेंसी के माध्यम से मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इसके अलावा जिस प्रकार से कर्मचारियों ने कार्यभार संभाल रहे वीसी साहब पर भरोसा जताया था व उम्मीद जगी थी कि अबकी बार हो जाएगी परमानेंट वाली नैया पर, वह नैया तो इनके होते हुए ही मझधार में हिचकोले खाने लगी है। अब तो कहा जा रहा है कि अपनों ने ही लूटा, गैरों में कहां दम था, अपनी तो कश्ती भी वहीं डुबाने की तैयार कर दी जहां पानी कम था।बहरहाल, विश्वविद्यालय में पिछले 25 वर्षों से सेवाएं दे रहे एसएफएबी कर्मचारी इस फैसले से गहरी चिंता में हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एजेंसी लाकर पुराने अनुभवी कर्मचारियों को हटाने की तैयारी की जा रही है, जबकि पूर्व में सरकार द्वारा जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक सेवा जारी रखने का स्पष्ट आदेश दिया गया था। इसके बाद आगे के आदेश के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सरकार से संवाद करने की बजाय सीधा ठेका प्रणाली अपनाने का रास्ता चुन लिया। कर्मचारियों और संगठनों का आरोप है कि ठेका और एजेंसी व्यवस्था लागू होने से शोषण बढ़ेगा, पारदर्शिता खत्म होगी और विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उनका कहना है कि प्रशासन यदि वास्तव में कर्मचारियों के भविष्य को लेकर संवेदनशील है, तो सरकार से वार्ता कर आगे का रास्ता निकालना चाहिए था, न कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी करना।इसी बीच कुलपति की स्वीकृति से मैनपावर सेवाओं को लेकर एक समिति का गठन किया गया है, जो अपनी सिफारिशें देगी। समिति में— प्रो. सी.पी. जैन, प्रो. हनुमान प्रसाद, डॉ. अविनाश पंवार,डॉ. कल्पेश निकावट, डॉ. मुकेश बार्बर, डॉ. जी.एल. वसिता, श्रीमती उषा शर्मा, श्री जे.के. भटनागर सदस्य के रूप में तथा श्री दीपक वर्मा को कन्वीनर बनाया गया है। विश्वविद्यालय में यह सवाल अब जोर पकड़ने लगा है कि जब सरकार का आदेश पहले से मौजूद है, तो प्रशासन संवाद के बजाय संविदा मॉडल को क्यों थोपना चाहता है। कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला न केवल उनके भविष्य से खिलवाड़ है, बल्कि विश्वविद्यालय की कार्य संस्कृति और साख पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या एक बार फिर से पूर्व वीसी सुनिता मिश्रा के कार्यकाल जैसा आंदोलन होगा?? यह सवाल भी अब चारों तरफ से उठने लगा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation लवकुश इंडोर स्टेडियम में गूंजा दमखम, विशाल प्रजापत स्ट्रांग मैन और मानसी रावत स्ट्रांग वूमेन ऑफ उदयपुर घोषित नंदनी माता के आंगन में सजी दिव्य रासलीला, श्रद्धा-परंपरा और भावनाओं का अनुपम संगम