24 News Update जोधपुर। जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर और अन्य आदिवासी क्षेत्रों से चयनित 63 टीएसपी कॉन्स्टेबल्स के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार व पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि इन सभी को ट्राइबल इलाकों में ही तैनात किया जाए। कोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा कि “कॉन्स्टेबल मिनरल प्रोटेक्शन फोर्स” के नाम पर भर्ती निकालकर चयन तो आदिवासी व खनन क्षेत्रों के लिए किया गया, लेकिन इन युवाओं को जयपुर में 14वीं बटालियन RAC में वर्षों तक अटका देना वैध अपेक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और प्रतापगढ़ के इन सभी कॉन्स्टेबल्स ने 2019 में याचिका लगाई थी। इनका कहना था कि वर्ष 2013 की भर्ती में 1000 पदों में से 80 पद विशेष रूप से टीएसपी क्षेत्र के लिए आरक्षित थे और वे उसी श्रेणी में चयनित हुए थे। बावजूद इसके, उन्हें नॉन-टीएसपी कैडर में नियुक्त कर दिया गया और आठ वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें अपने ट्राइबल क्षेत्र में पोस्टिंग नहीं मिली। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि वे स्वयं स्थायी रूप से आदिवासी जिलों के निवासी हैं और 2014 व 2018 के सर्कुलर स्पष्ट करते हैं कि टीएसपी कर्मचारी चाहें तो अपने गृह क्षेत्र में तैनाती का विकल्प दे सकते हैं। उन्होंने समय रहते आवेदन भी दिए, लेकिन आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया, जबकि समान परिस्थिति वाले कई कर्मचारियों को लाभ मिल चुका है। सरकार की ओर से दलील दी गई कि उस समय की रिक्तियों और प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए इन नियुक्तियों को नॉन-टीएसपी क्षेत्रों में किया गया और सर्कुलरों का अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारियों का स्वचालित रूप से स्थानांतरण का अधिकार बनता है। हालांकि, कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए माना कि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से मिनरल और ट्राइबल बेल्ट का उल्लेख किया गया था, जिससे उम्मीदवारों के मन में यह वैध अपेक्षा बनती है कि उनकी तैनाती भी उन्हीं क्षेत्रों में होगी। न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि याचिकाकर्ता कमजोर और वंचित आदिवासी समुदायों से आते हैं और राज्य को उनके प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। जस्टिस फर्जंद अली ने कहा कि भर्ती का मूल उद्देश्य ही ट्राइबल क्षेत्रों में सुरक्षा व खनन क्षेत्रों की निगरानी के लिए स्थानीय युवाओं को अवसर देना था, इसलिए उन्हें जयपुर में दफ्तरों की सुरक्षा ड्यूटी पर वर्षों तक लगाकर रखना अनुचित है। अदालत ने सभी 63 कॉन्स्टेबल्स को आदिवासी बेल्ट में भेजने का रास्ता साफ करते हुए निर्देश दिया कि उन्हें प्रतापगढ़ स्थित महाराणा प्रताप बटालियन में शिफ्ट करने पर विचार किया जाए या आवश्यकता अनुसार टीएसपी क्षेत्र के किसी भी जिले—डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर या सलूंबर—में समायोजित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह न केवल सरकारी सर्कुलरों की मंशा के अनुरूप है, बल्कि इन ट्राइबल युवाओं की वैध अपेक्षा और उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि का भी सम्मान करता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation गाउन पहनकर घर में घुसा बदमाश, 58 वर्षीय महिला से 7 मिनट जद्दोजहद, संडासी से सिर फोड़ा, फिर भी नहीं झुकी देवगढ़: काछबली पंचायत के देवचौड़ा गांव में भालू का हमला, ग्रामीण गंभीर घायल