24 News Update जयपुर। राजस्थान में लोकतंत्र का अगला अभ्यास अब किराए की मशीनों के भरोसे होगा। आगामी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के लिए राज्य को अपनी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की ईवीएम से काम चलाना पड़ेगा। इसके लिए दोनों राज्यों के निर्वाचन आयोगों के बीच बुधवार को एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।समझौते के तहत मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान को चुनावी इस्तेमाल के लिए 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट किराए पर उपलब्ध कराएगा। इन्हीं मशीनों के माध्यम से प्रदेशभर में नगर निकाय और पंचायत चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था पूरी तरह भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई है। ईवीएम की आपूर्ति, उपयोग, रख-रखाव, सुरक्षा और चुनाव के बाद वापसी तक की सभी शर्तें एमओयू में स्पष्ट रूप से तय की गई हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर कोई सवाल न उठे।तकनीकी विश्वसनीयता को लेकर भी आयोग ने सुरक्षा घेरा कसने का दावा किया है। इन ईवीएम मशीनों का प्रथम स्तरीय परीक्षण (एफएलसी), मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सहयोग भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद के अधिकृत इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा।दिलचस्प यह है कि जहां एक ओर चुनावों को लोकतंत्र का उत्सव कहा जाता है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान को अपने ही चुनाव कराने के लिए पड़ोसी राज्य से मशीनें उधार लेनी पड़ रही हैं। यानी वोट तो स्थानीय होगा, लेकिन बटन दबेगा बाहरी मशीन पर—और इसी के साथ प्रदेश में शुरू हो गई है ‘किराए की पंचायती’ की नई सियासी पटकथा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation अविनाश गहलोत फाउंडेशन (AGF) का सांगठनिक विस्तार, धर्मेंद्र कुमार सैनी को जयपुर जिले का सह संयोजक नियुक्त किया जनजाति समाज डीलिस्टिंग को लेकर दिल्ली में गर्जना रैली करेगा- भगवान सहाय