24 News Update चित्तौड़गढ़। राजस्थान की निजी विश्वविद्यालयों में शुमार गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। फर्जी डिग्री और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच के बीच राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी में सभी नए प्रवेशों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। सरकार के इस फैसले ने हजारों संभावित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि यूनिवर्सिटी के खिलाफ गंभीर शिकायतों की जांच अभी जारी है और मामले की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। ऐसे में नए विद्यार्थियों को प्रवेश देना उनके भविष्य को जोखिम में डाल सकता है। इसी कारण एहतियातन सभी पाठ्यक्रमों में नए एडमिशन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। दरअसल, मेवाड़ यूनिवर्सिटी के खिलाफ पिछले काफी समय से फर्जी डिग्रियां जारी करने और प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, जिसमें कई बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया बताया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी चित्तौड़गढ़ अधिनियम-2009 की धारा 44(1) के तहत यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपना जवाब भी सरकार को सौंप दिया है, लेकिन विभाग अभी उस जवाब का परीक्षण कर रहा है। इसी बीच सरकार ने नए प्रवेशों पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया। मामले को और गंभीर तब माना गया जब फर्जी डिग्री प्रकरण में एसओजी ने भी जांच शुरू की। जांच के दौरान यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रुल, पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा तथा कार्यालय सहायक वीरेंद्र सिंह सहित कई लोगों की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया। यह पहला मौका नहीं है जब मेवाड़ यूनिवर्सिटी विवादों में आई हो। इसी वर्ष फरवरी में बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में बड़ा आंदोलन किया था। छात्रों का आरोप था कि जिस नर्सिंग कोर्स में उन्हें प्रवेश दिया गया, उसे आवश्यक वैधानिक मान्यताएं प्राप्त नहीं थीं। इस विवाद ने भी यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे और मामला पुलिस तक पहुंच गया था। सरकार का मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक नए विद्यार्थियों को प्रवेश देना उचित नहीं होगा। इसलिए फिलहाल सभी कोर्सों में प्रवेश प्रक्रिया पर रोक जारी रहेगी। उधर, यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गदिया ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जारी नोटिस का जवाब पहले ही दिया जा चुका है और मामला अभी विचाराधीन है। उन्होंने दावा किया कि एसओजी ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ फर्जी डिग्री का कोई मामला दर्ज नहीं किया है। यदि किसी व्यक्ति ने व्यक्तिगत स्तर पर कोई गलत कार्य किया है तो उसके लिए पूरे संस्थान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। गदिया ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को अभी तक अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले यूनिवर्सिटी के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिए कि यूनिवर्सिटी इस आदेश को चुनौती देने के लिए जल्द ही न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। फिलहाल सरकार और यूनिवर्सिटी आमने-सामने हैं। एक ओर सरकार छात्रों के हितों और उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर यूनिवर्सिटी इसे एकतरफा कार्रवाई बता रही है। ऐसे में अब सबकी नजर जांच के अंतिम निष्कर्ष और आने वाले कानूनी घटनाक्रम पर टिकी हुई है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation हिन्दुस्तान जिंक कर्मचारी के क्लेम पर रिश्वत का खेल, ESIC शाखा प्रबंधक संदीपा वोहरा 10 हजार लेते ट्रैप मेवाड़ यूनिवर्सिटी पर सरकार की बड़ी कार्रवाई: नए एडमिशन पर रोक, फर्जी डिग्री जांच के बीच छात्रों के भविष्य पर उठे सवाल