24 News Update उदयपुर। महाराणा प्रताप को लेकर दिए गए बयान पर मचे राजनीतिक और सामाजिक घमासान के बाद पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया को सफाई के साथ सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी है। विवाद तूल पकड़ने और विभिन्न संगठनों के तीखे विरोध के बीच कटारिया ने सोमवार को वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उनके शब्दों का अर्थ तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और यदि “प्रताप को जिंदा किया” जैसे शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो वे इसके लिए क्षमा चाहते हैं।
कटारिया ने स्पष्ट किया कि उनका आशय महाराणा प्रताप के सम्मान को ठेस पहुंचाने का कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा, “मेरी सबसे विनती है कि मेरा भाषण शुरू से अंत तक सुना जाए। मेरे शब्दों के पीछे का भाव समझा जाए। महाराणा प्रताप के प्रति मेरे मन में अपार श्रद्धा और आस्था है।”

कांग्रेस शासन पर संदर्भ, प्रताप के अपमान का नहीं था आशय
कटारिया ने कहा कि उनका बयान कांग्रेस सरकारों के संदर्भ में था। उन्होंने तर्क दिया कि 1947 से 1977 तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन उस दौर में महाराणा प्रताप के जीवन, शौर्य और विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने के ठोस प्रयास नहीं हुए।
उन्होंने कहा कि जनता पार्टी के शासनकाल में पहली बार प्रताप से जुड़े स्थलों को पहचान दिलाने और उनके विकास की दिशा में काम शुरू हुआ। गोगुंदा, हल्दीघाटी, चावंड, पोखरगढ़ और कुंभलगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थलों के विकास की शुरुआत उसी दौर में हुई।
कटारिया ने यह भी याद दिलाया कि जब वे 33 वर्ष की उम्र में पहली बार विधायक बने, तब मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत से आग्रह कर मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना स्वीकृत करवाई गई, जिससे मेवाड़ अंचल में प्रताप से जुड़े स्थलों को नई पहचान मिली।

गोगुंदा के भाषण से भड़का विवाद
दरअसल, 22 दिसंबर को उदयपुर जिले के गोगुंदा क्षेत्र की धूली घाटी में एक शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान दिए गए कटारिया के भाषण का एक अंश सामने आने के बाद विवाद भड़क उठा। भाषण में “महाराणा प्रताप को पहली बार जिंदा करने” जैसे शब्दों को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया।

करणी सेना की धमकी से माहौल गरमाया
बयान के सामने आने के बाद क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने सोशल मीडिया पर बेहद आपत्तिजनक और धमकी भरा पोस्ट किया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। पोस्ट में कटारिया के खिलाफ हिंसक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद प्रशासन और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई।

कटारिया की सफाई: ‘मेरे शब्दों को आगे-पीछे सुनिए’
विवाद बढ़ने पर कटारिया ने चंडीगढ़ रवाना होने के बाद वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उनके शब्दों को संदर्भ से काटकर पेश किया गया। उन्होंने कहा, “मैंने यह कहा कि प्रताप के शौर्य और गाथाओं को घर-घर पहुंचाने का काम कांग्रेस भी कर सकती थी। यही मेरा भाव था। ‘जिंदा किया’ शब्द से यदि किसी को बुरा लगा, तो मैं क्षमा चाहता हूं। मेरा ऐसा कोई भाव नहीं था।” कटारिया ने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार ने महाराणा प्रताप से जुड़े स्थलों के और विकास के लिए 175 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

फूट डालने की राजनीति पर तीखा हमला
अपने मूल भाषण में कटारिया ने समाज को बांटने की राजनीति पर भी तीखा प्रहार किया था। उन्होंने कहा था कि महाराणा प्रताप की सेना में भील समाज की अहम भूमिका थी और बिना आदिवासी समाज के सहयोग के हल्दीघाटी का युद्ध संभव नहीं था।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि “फूट डालकर राज करने की सोच अंततः देश और समाज—दोनों को बर्बाद कर देती है।”

सम्मान में कोई कमी नहीं, आग्रह—पूरा भाषण सुना जाए
कटारिया ने अंत में दोहराया कि महाराणा प्रताप के प्रति उनका सम्मान अडिग है और रहेगा। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे पूरे भाषण को सुनकर ही निष्कर्ष निकालें और सुझाव दें, न कि अधूरे अंशों के आधार पर विवाद खड़ा करें।


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