24 News Update उदयपुर। भाजपा नेता, अधिवक्ता एवं पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया पर अबकी बार खोजी पत्रकार बनकर एक और मारक प्रहार किया है। विप्लवी ने कटारिया पर राजस्थान में राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) के तहत स्वयं को लघु एवं सीमांत किसान दर्शाकर नियम विरुद्ध सरकारी अनुदान (सब्सिडी) लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को विस्तृत पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। डॉ. विप्लवी ने पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा है कि उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के वेलनिया गांव स्थित राज्यपाल कटारिया के फार्म हाउस पर वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत लगभग 22 लाख 12 हजार 358 रुपये की लागत से ग्रीन हाउस स्थापित किया गया। उनके अनुसार इस परियोजना पर 17 लाख 4 हजार 528 रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया, जो कुल लागत का लगभग 77.04 प्रतिशत है। उनका आरोप है कि यह योजना में निर्धारित अधिकतम अनुदान सीमा से करीब 7.5 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि राजस्थान सरकार के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार ग्रीन हाउस पर सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत, जबकि लघु एवं सीमांत किसान तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के किसानों को अधिकतम 70 प्रतिशत तक ही अनुदान दिया जा सकता है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि सामान्य वर्ग से आने वाले राज्यपाल कटारिया को लघु एवं सीमांत किसान की श्रेणी में किस आधार पर रखा गया और उन्हें अधिकतम सीमा से अधिक अनुदान कैसे स्वीकृत किया गया। डॉ. विप्लवी ने दावा किया कि वेलनिया स्थित कटारिया का फार्म हाउस करीब 33 बीघा भूमि पर विकसित है, जहां दो सुविधायुक्त आवासीय परिसर, दो कुएं तथा चारदीवारी और कंटीले तारों की फेंसिंग है। इसके अलावा मूणवास, कैलाशपुरी सहित अन्य स्थानों पर भी उनके स्वामित्व में कृषि भूमि होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे में उन्हें किसी भी मानक के अनुसार लघु या सीमांत किसान नहीं माना जा सकता। उन्होंने राज्यपाल को जारी लघु एवं सीमांत किसान प्रमाण-पत्र की वैधता की भी जांच कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि कटारिया पेशे से किसान नहीं, बल्कि शिक्षक, अधिवक्ता, राजनेता और वर्तमान में राज्यपाल हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि लगभग 82 वर्ष की आयु, पांच दशक के राजनीतिक जीवन, करीब 39 वर्ष जनप्रतिनिधि और लगभग 29 वर्ष कैबिनेट मंत्री स्तर की सुविधाएं प्राप्त करने वाले व्यक्ति को राज्यपाल पद पर रहते हुए अचानक लघु एवं सीमांत किसान कैसे घोषित कर दिया गया। उन्होंने इसे आश्चर्यजनक और जांच का विषय बताया। डॉ. विप्लवी ने यह भी आरोप लगाया कि ग्रीन हाउस पर लगे सूचना पट्ट पर “लघु कृषक” के रूप में गुलाबचंद कटारिया का नाम अंकित है। उन्होंने कहा कि जब देश में वास्तविक छोटे और जरूरतमंद किसान सरकारी सहायता के पात्र हैं, तब संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसी सब्सिडी लेना जनता के बीच गलत संदेश देता है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री के आह्वान पर करोड़ों लोगों ने रसोई गैस सब्सिडी का स्वेच्छा से त्याग किया, वहीं दूसरी ओर यदि कोई राज्यपाल नियमों के विपरीत सरकारी अनुदान प्राप्त करता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। डॉ. विप्लवी ने अपने पत्र में राज्यपाल कटारिया से जुड़े पूर्व के कई विवादों का भी उल्लेख किया है। इनमें उदयपुर के बड़ी क्षेत्र में वन भूमि प्रकरण, मूणवास में कृषि भूमि की रजिस्ट्री के दौरान स्टाम्प ड्यूटी बचाने का आरोप, कोरोना लॉकडाउन के दौरान झाड़ोल जाकर भूमि की रजिस्ट्री कराना, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के चार मकानों का आउट ऑफ टर्न आवंटन तथा पंजाब के राज्यपाल रहते हुए उदयपुर के सर्किट हाउस में नियमित जनसुनवाई करने जैसे मामलों का हवाला दिया गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए इन तथ्यों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। पत्र के अंत में डॉ. विप्लवी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि जिम्मेदार लोग ‘अंत्योदय’ के बजाय ‘स्वोदय’ की भावना से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने लगेंगे तो योजनाओं का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया को जारी लघु एवं सीमांत किसान प्रमाण-पत्र की जांच कराई जाए। साथ ही व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि जांच में उन्हें वास्तव में लघु एवं सीमांत किसान पाया जाता है तो राजस्थान सामाजिक सुरक्षा लघु एवं सीमांत वृद्धजन कृषक सम्मान पेंशन नियम, 2019 के तहत उन्हें पेंशन का लाभ भी दिलाने पर विचार किया जाना चाहिए। नोट: यह समाचार भाजपा नेता डॉ. विजय विप्लवी द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र और उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों पर राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया अथवा संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समाचार में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनका पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. 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