उदयपुर, 10 अक्टूबर। उदयपुर सेंट्रल जेल की जिस चारदीवारी के भीतर बंदियों पर निगरानी रखी जानी चाहिए, उसी के पीछे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर नरेश की सेल में सुविधाओं का ऐसा इंतजाम मिला, जिसने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। दीवार पर एलईडी टीवी, प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन और मोबाइल चार्ज करने के लिए डेटा केबल तक का इस्तेमाल। इतना ही नहीं, आरोप है कि मोबाइल को चार्ज करने के लिए जेल परिसर के सीसीटीवी सिस्टम की डीवीआर से बिजली ली जा रही थी। मामले में पुलिस ने तीन बंदियों को गिरफ्तार किया है।

भूपालपुरा थानाधिकारी रतन सिंह चौहान के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में एकलव्य कॉलोनी निवासी निखिल रावत, उसका भाई विशाल रावत और महावतवाड़ी निवासी सोहेल उर्फ अन्ना शामिल हैं। पुलिस अब इनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि जेल के भीतर प्रतिबंधित सामान पहुंचाने और इस्तेमाल करने का सिलसिला कैसे चल रहा था। इस मामले का अहम सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मोबाइल और टीवी किसके पास थे, बल्कि यह भी है कि जेल की निगरानी के बीच ये सुविधाएं आखिर संभव कैसे हुईं।

15 सितंबर की तलाशी में खुला मामला

मामले की शुरुआत 15 सितंबर को हुई, जब पुलिस टीमों ने उदयपुर सेंट्रल जेल की अलग-अलग बैरकों में अचानक तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान कुख्यात बंदी नरेश की सेल से मोबाइल फोन, एलईडी टीवी और इंडक्शन सहित कई प्रतिबंधित सुविधाओं से जुड़ा सामान मिला। तलाशी में बीड़ी-सिगरेट, इलेक्ट्रॉनिक बीपी इंस्ट्रूमेंट और एक एडाप्टर भी बरामद हुआ।

जांच के दौरान विशाल रावत ने पूछताछ में बताया था कि उसने अपने बिस्तर के नीचे से डेटा केबल निकालकर मोबाइल चार्ज किया था। यह मोबाइल नरेश का बताया गया। बैरक में टीवी और इंडक्शन की मौजूदगी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इन उपकरणों का इंतजाम किसने किया और जेल के भीतर इनका इस्तेमाल कितने समय से हो रहा था।

जिस कैमरे से होनी थी निगरानी, उसी सिस्टम से चार्जिंग का आरोप

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू सीसीटीवी सिस्टम से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि जेल परिसर में लगे कैमरों की डीवीआर से मोबाइल चार्ज करने के लिए बिजली ली जा रही थी। यदि यह व्यवस्था लंबे समय से इस्तेमाल हो रही थी, तो इससे जेल की सुरक्षा निगरानी और आंतरिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल उठते हैं। हालांकि, डीवीआर से बिजली लेने की पूरी प्रक्रिया, इसकी अवधि और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर पुलिस की जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।

नरेश का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी जांच के केंद्र में

कुख्यात हिस्ट्रीशीटर नरेश लंबे समय से उदयपुर के अपराध जगत में सक्रिय रहा है। वर्ष 2014 के प्रवीण पालीवाल हत्याकांड में भी उसका नाम मुख्य सूत्रधार के तौर पर सामने आया था। ऐसे में जेल में उसके पास मोबाइल और अन्य सुविधाएं मिलने का मामला केवल प्रतिबंधित सामान की बरामदगी तक सीमित नहीं है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोबाइल का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था और क्या जेल के भीतर से किसी बाहरी नेटवर्क के संपर्क में रहने की आशंका की जांच जरूरी है।

फिलहाल तीन बंदियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण सिरा जेल के भीतर सामान पहुंचने के रास्ते और संभावित मददगारों तक पहुंचना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जेल में कैसे पहुंचे और क्या इस पूरे मामले में किसी जेलकर्मी की संलिप्तता रही। इन सवालों के जवाब ही स्पष्ट करेंगे कि यह कुछ बंदियों की नियमविरुद्ध गतिविधि थी या जेल की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद किसी बड़ी चूक का नतीजा।


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By desk 24newsupdate

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