24 News Update उदयपुर, 22 अगस्त। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, पेंशन भुगतान में देरी और कर्मचारियों की कमी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी और प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने कहा कि जब विश्वविद्यालय सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नियमित पेंशन और अन्य पेंशनरी देनदारियां पूरी करने की स्थिति में नहीं हैं तथा आवश्यक पद लंबे समय से खाली हैं, तो उनकी वित्तीय स्थिरता, प्रशासनिक व्यवस्था और आईसीएआर प्रत्यायन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सोलंकी ने कहा कि पेंशन सरकार की कृपा नहीं, बल्कि कर्मचारियों की वर्षों की सेवा से अर्जित स्वीकृत देयता है। यदि सरकार कृषि विश्वविद्यालयों को महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान मानती है तो पर्याप्त बजट, आवश्यक स्टाफ और पेंशन देनदारियों के लिए स्थायी वित्तीय प्रावधान करना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो विश्वविद्यालय अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमित पेंशन नहीं दे पा रहे हैं, वे उच्च कृषि शिक्षा के राष्ट्रीय मानकों को किस आधार पर पूरा करेंगे।

महासंघ के महामंत्री अरविंद कौशल ने सरकार से पांचों कृषि विश्वविद्यालयों की वास्तविक वित्तीय स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय की कुल पेंशन देनदारी, मासिक पेंशन आवश्यकता, लंबित पेंशनरी भुगतान, सरकारी अनुदान, वेतन खर्च, स्वीकृत पद तथा कार्यरत और रिक्त पदों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने को कहा। उन्होंने कहा कि लगातार वित्तीय घाटा और पेंशन देनदारियों का भुगतान नहीं कर पाना सामान्य प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि गंभीर वित्तीय संकट है।

महासंघ के पांचों प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र कुमार भटनागर, डॉ. आर.एस. चावड़ा, डॉ. अरुण कुमार शर्मा, मनफूल मंग्लिया एवं मूलचंद जाट ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की संस्थागत मजबूती केवल भवन और पाठ्यक्रमों से तय नहीं होती। पर्याप्त वित्तीय संसाधन, योग्य शिक्षक, आवश्यक मानव संसाधन, बेहतर प्रशासन और वित्तीय देनदारियां समय पर पूरी करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है।

प्रदेश मंत्रियों डॉ. भारत सिंह भीमावत, डॉ. भूपेन्द्र उपाध्याय, इंजी. मोहनलाल चांगवाल एवं महावीर शर्मा ने कहा कि एक तरफ आईसीएआर प्रत्यायन 2026 की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में स्टाफ की कमी और पेंशन एवं सेवानिवृत्ति देनदारियों का संकट बना हुआ है। इसका सीधा असर शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रत्यायन पर पड़ सकता है।

संगठन मंत्री इंजी. सुरेन्द्र भूषण सहाय ने सरकार से पांचों कृषि विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसमें पेंशन देनदारी, लंबित पेंशनरी लाभ, सरकारी वित्त पोषण, वेतन खर्च, स्वीकृत एवं रिक्त पदों तथा पिछले पांच वर्षों के बजट और वास्तविक खर्च का विवरण शामिल करने की मांग की गई।

महासंघ ने कहा कि आईसीएआर की प्रत्यायन व्यवस्था में वित्तीय संसाधन प्रबंधन को भी महत्व दिया गया है। संगठन के अनुसार वित्तीय संसाधन प्रबंधन के लिए 200 अंक निर्धारित हैं, जिनमें बजट आवंटन, वित्तीय समितियां, आंतरिक संसाधन जुटाना, बाहरी वित्त पोषण, वित्तीय अधिकार और पिछले वर्षों के वित्तीय उपयोग जैसे मानक शामिल हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों की वास्तविक वित्तीय क्षमता और संसाधनों का प्रभावी उपयोग प्रत्यायन मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सोलंकी और कौशल ने कहा कि गंभीर वित्तीय संकट और स्टाफ की कमी के बीच पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के लिए प्रत्यायन के आवश्यक अंक हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने सरकार से विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, पेंशन देनदारी और मानव संसाधन की स्वतंत्र जांच कराने, लंबित पेंशनरी लाभ के लिए स्थायी बजट प्रावधान करने तथा रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने की मांग की।

महासंघ ने यह भी मांग की कि आईसीएआर प्रत्यायन 2026 के लिए तैयार की जाने वाली स्व-अध्ययन रिपोर्ट में विश्वविद्यालयों की वास्तविक वित्तीय और मानव संसाधन स्थिति पारदर्शी रूप से प्रस्तुत की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि केवल कागजी आंकड़ों के आधार पर प्रत्यायन प्रक्रिया आगे बढ़ाना स्वीकार्य नहीं होगा।

सोलंकी और कौशल ने कहा कि यदि सरकार कृषि विश्वविद्यालयों को मजबूत संस्थानों के रूप में चलाना चाहती है तो उसे पर्याप्त धन, स्टाफ और पेंशन उपलब्ध करानी होगी। उन्होंने कहा कि इन तीनों मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के बिना विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिरता और उच्च कृषि शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल बने रहेंगे।


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