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दादी लीला देवी ने पोती सृष्टि के छठे जन्मदिन पर पेश की मिसाल: रोपे गुलमोहर और करंज पौधे, पक्षियों के लिए बांधे परिंडे

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24 News Update भीलवाड़ा के रायला में आधुनिक चकाचौंध और दिखावे के दौर में दादी लीला देवी सुवालका ने अपनी पोती सृष्टि सुवालका के छठे जन्मदिन के मौके पर शनिवार को प्रकृति सेवा के उत्सव के रूप में मनाकर समाज को पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश दिया है। सृष्टि के इस खास दिन को यादगार बनाने के लिए किसी महंगे आयोजन के बजाय, दादी ने धरती को हरियाली का उपहार देने का संकल्प लिया।

छायादार पौधों से महकेगा आँगन-:
इस अवसर पर लीला देवी ने गुलमोहर और करंज जैसे छायादार व औषधीय पौधे रोपे। उन्होंने बताया कि गुलमोहर अपनी लालिमा से प्रकृति को सुंदर बनाएगा, वहीं करंज भीषण गर्मी में राहगीरों और जीव-जंतुओं को ठंडी छांव प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, “सृष्टि जैसे-जैसे बड़ी होगी, ये पौधे भी उसके साथ बढ़ेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा का जरिया बनेंगे।”

बेजुबान पक्षियों को मिला सहारा
बढ़ती तपिश और सूखते जलस्रोतों को देखते हुए, इस नेक पहल में मानवता का रंग भी घुला। दादी और परिवार के सदस्यों ने पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे और उनमें पानी भरकर पक्षियों के दाना-पानी का इंतजाम किया। यह कदम उन बेजुबान परिंदों के लिए जीवनदान साबित होगा जो पानी की तलाश में भटकते हैं।

संस्कारों की नई पौध
दादी लीला देवी की इस पहल की पूरे सुवालका परिवार और क्षेत्र में सराहना हो रही है। उन्होंने अपनी पोती को जन्मदिन पर महंगें खिलौनों के बजाय ‘प्रकृति प्रेम’ के संस्कार भेंट किए हैं। इस छोटी सी बच्ची सृष्टि ने भी अपनी दादी के साथ मिलकर पौधों को पानी पिलाया, जो नई पीढ़ी के लिए एक बड़ी सीख है।

-लीला देवी का एक सशक्त संदेश:
इस अवसर पर लीला देवी सुवालका ने सभी से अपील की कि वे अपने बच्चों के जन्मदिन या किसी भी मांगलिक कार्य पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करें। यही सच्ची सेवा और आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करने का एकमात्र तरीका है।

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