सभापति की कुर्सी पर इस बार एसटी वर्ग की नजर, भाजपा-कांग्रेस ने अभी पत्ते नहीं खोले; टिकट चयन को लेकर बैठकों का दौर जारी 24 News Update बांसवाड़ा, 25 अगस्त। बांसवाड़ा नगरपरिषद के आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव की घोषणा से पहले ही प्रमुख दलों में टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। पार्षद पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन शुरू हो गया है। पहली बार नगरपरिषद चुनाव में मैदान में उतर रही भारतीय आदिवासी पार्टी भी बड़ी संख्या में आवेदन आने का दावा कर रही है।भाजपा के नगरपरिषद चुनाव सह संयोजक सुबोध मालोत के अनुसार पार्षद पद के लिए पार्टी के पास 350 उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। वहीं कांग्रेस के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार ने बताया कि अब तक करीब 300 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। भारतीय आदिवासी पार्टी के पास भी करीब 120 उम्मीदवारों के आवेदन आने की जानकारी सामने आई है।भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चुनाव में अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। वहीं बीएपी पहली बार नगरपरिषद चुनाव में प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बीएपी की सक्रियता का सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है और यह कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी कर सकती है। जैनेंद्र त्रिवेदी को लेकर भी चर्चाएं तेजचुनावी सरगर्मियों के बीच कांग्रेस के पूर्व सभापति एवं वरिष्ठ नेता जैनेंद्र त्रिवेदी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। इस संबंध में त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया और न ही भाजपा ज्वाइन की।उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया और फिलहाल इसे होल्ड पर रखा है। त्रिवेदी ने बताया कि नगरपरिषद चुनाव में पार्टी को सहयोग देने को लेकर उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को लिखित में भी जानकारी दी है, हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। उनका कहना है कि पार्टी और संगठन की ओर से जो जिम्मेदारी दी जाएगी, उसी के अनुसार वे काम करेंगे। पहली बार एसटी वर्ग से बनेगा सभापतिबांसवाड़ा नगरपरिषद चुनाव इस बार एक और वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2012 में नगरपालिका से नगरपरिषद बनने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब अनुसूचित जनजाति वर्ग से किसी नेता के सभापति बनने की संभावना है। इससे पहले वर्ष 2008 में जब निकाय नगरपालिका के रूप में संचालित था, उस समय 2004 से 2009 तक सभापति का पद एसटी महिला के लिए आरक्षित था। उस दौरान कृष्णा कटारा अध्यक्ष बनी थीं। इस बार परिस्थितियां अलग हैं और सभापति पद को लेकर नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना है। टिकट के दावेदारों की लंबी कतारचुनाव की घोषणा से पहले ही स्थानीय राजनीतिक कार्यालयों में टिकट की चाह रखने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ गई है। पार्षद पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन जमा होने के बाद अब पार्टियों में उम्मीदवारों की छंटनी शुरू हो गई है। वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं। संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक पकड़, क्षेत्र में सक्रियता और चुनाव जीतने की क्षमता को लेकर चर्चा की जा रही है। दोनों प्रमुख दलों ने अभी सभापति पद के लिए किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा की ओर से पूर्व प्रधान और भाजपा नेता राजेश कटारा सभापति पद के संभावित दावेदार हो सकते हैं। कांग्रेस में अरविंद सीता डामोर और अतीत गरासिया के नाम पर विचार होने की चर्चा है। अब टिकट वितरण के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों प्रमुख दल किन चेहरों पर दांव लगाते हैं। वहीं बीएपी के चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय होने और वार्ड स्तर पर समीकरण बदलने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में बांसवाड़ा नगरपरिषद का आगामी चुनाव राजनीतिक रूप से काफी दिलचस्प रहने वाला है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation बागीदौरा तहसील कार्यालय में 4 हजार की रिश्वत लेते वरिष्ठ सहायक सहित तीन गिरफ्तार