24 News update उदयपुर, 9 मई। विधानसभा अध्यक्ष Vasudev Devnani ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को अज्ञान, भय, दुर्बलता और सीमाओं से मुक्त करती है। भारतीय संस्कृति और आदर्शों को आत्मसात करते हुए वर्तमान को सशक्त बनाया जाए, तभी बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।वे शनिवार को विद्या भवन ऑडिटोरियम में आयोजित उत्कृष्ट विद्यार्थी सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में दक्षिणी राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए दसवीं एवं बारहवीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दो सौ से अधिक विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।समारोह में जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल, विद्या भवन समिति अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र तायलिया, मुख्य संचालक राजेंद्र भट्ट, पॉलिटेक्निक कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता, कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. प्रफुल्ल भटनागर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विद्या भवन और राजस्थान विद्यापीठ को बताया शिक्षा के मजबूत स्तंभप्रो. देवनानी ने अपने संबोधन में विद्या भवन संस्था से अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज में सेवाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन काल में उदयपुर और दक्षिणी राजस्थान में शिक्षा का अभाव था, तब स्वर्गीय मोहन सिंह मेहता और जनार्दन राय नागर ने अथक प्रयासों से विद्या भवन और राजस्थान विद्यापीठ जैसी संस्थाओं की स्थापना की। उन्होंने कहा कि आज ये दोनों संस्थाएं दक्षिणी राजस्थान में शिक्षा के मजबूत स्तंभ के रूप में कार्य कर रही हैं और आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रही हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्या भवन आने वाले समय में देश की अग्रणी शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल होगा। “एआई का दास नहीं, स्वामी बनें”छात्रों को संबोधित करते हुए देवनानी ने कहा कि वर्तमान समय अवसरों और प्रतिस्पर्धा का दौर है। युवाओं को Swami Vivekananda के संदेश “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” को जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग आवश्यक है, लेकिन युवाओं को उसका दास नहीं बल्कि स्वामी बनना चाहिए। एआई केवल सूचना दे सकता है, उसमें संवेदनाएं, संस्कार और करुणा नहीं होती। विद्यार्थियों को समझाया “पांच डी” का सूत्रअपने प्रेरक संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के लिए “पांच डी” का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि डेकोरम (मर्यादा), डिसिप्लिन (अनुशासन), डिवोशन (समर्पण), डिटरमिनेशन (प्रतिबद्धता) और डेवलपमेंट (विकास) को जीवन में अपनाने से व्यक्तित्व का समग्र विकास होता है। उन्होंने जीवन की तुलना बैंक लॉकर से करते हुए कहा कि जैसे लॉकर दो चाबियों से खुलता है, उसी प्रकार सफलता भी कर्म और भाग्य दोनों के मेल से मिलती है। इसलिए व्यक्ति को निरंतर कर्म करते रहना चाहिए। जिला कलक्टर ने साझा किए छात्र जीवन के अनुभवकार्यक्रम में जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने विद्यार्थियों के साथ अपने छात्र जीवन और प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने में माता-पिता का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्या भवन समिति अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र तायलिया ने संस्था की गतिविधियों और शैक्षणिक उपलब्धियों की जानकारी दी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation प्रदेश में 2 लाख 20 हजार 670 लीटर वाॅश नष्ट खाटूश्यामजी मंदिर में लाखों की चोरी का खुलासा, चित्तौड़गढ़ पुलिस ने दो बदमाश पकड़े, पांच आरोपी अब भी फरार