24 News update जोधपुर | 24 जून 2025
देशभर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए टैक्स चोरी और साइबर ठगी के सबसे बड़े खुलासों में से एक में, जोधपुर पुलिस ने 524 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी का पर्दाफाश किया है। इस संगठित गिरोह ने देश के 22 राज्यों में 240 फर्जी फर्में खड़ी कर फर्जी पैन, आधार और बैंक खातों की मदद से सरकार को करोड़ों का चूना लगाया।
पुलिस की गिरफ्त में 7 आरोपी, ई-मित्र संचालक और सील तैयार करने वाला भी शामिल
देवनगर थाना पुलिस ने 13 जून से अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना ई-मित्र सेंटर चलाने वाला प्रवीण पंवार (28) है, जो अपने साथी सद्दाम हुसैन (30) के साथ मिलकर फर्जी आधार-पैन दस्तावेज तैयार करता था। पुलिस ने इनके साथ किशन सिंह, रणवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, अमित भाटी और चेलाराम को भी गिरफ्तार किया है।
फर्जी दस्तावेज़ों की फैक्ट्री: सील, मोहर और एड्रेस अपडेट का खेल
डीसीपी वेस्ट राजर्षि राज वर्मा ने बताया कि आरोपी प्रवीण अपने ई-मित्र सेंटर पर फर्जी आधार कार्ड तैयार करता, जिसमें एड्रेस बदलने के लिए राजपत्रित अधिकारी की फर्जी मोहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल होता था।
सद्दाम ऐसे लोगों को लाता जिनके दस्तावेज प्रयोग किए जा सकते। फिर उन्हें बस से अन्य राज्यों में भेजा जाता, जहां गैंग के अन्य सदस्य मौजूद रहते।
इन राज्यों में उन व्यक्तियों के नाम से:
- सिम कार्ड ली जाती,
- बैंक अकाउंट खुलवाया जाता,
- दुकान किराये पर दिखाकर रेंट एग्रीमेंट बनता,
- उद्यम पोर्टल पर फर्म रजिस्टर होती,
- और अंत में जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाकर ट्रांजैक्शन दिखाए जाते।
GST इनपुट का बड़ा फर्जीवाड़ा: 278 करोड़ के फर्जी बिल, 246 करोड़ की इनपुट पास ऑन
जांच में पता चला कि:
- 278 करोड़ रुपए के फर्जी बिलों के जरिए GST इनपुट लिया गया,
- और 246 करोड़ रुपए की GST इनपुट पास ऑन की गई, यानी बिना माल के ट्रांजैक्शन कर टैक्स क्रेडिट आगे बढ़ा दिया गया।
- अब तक 244 फर्मों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 152 का रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द हो चुका था।
कई राज्यों में फैलाया जाल
गैंग ने जिन 22 राज्यों में फर्जी फर्में रजिस्टर कीं, उनमें शामिल हैं:
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, असम, मणिपुर, बिहार, पश्चिम बंगाल, दमन-दीव आदि।
इन राज्यों में बिना किसी फिजिकल ऑपरेशन के फर्में दिखाई गईं, जिनके माध्यम से ई-बिल पर ट्रांजैक्शन दर्शाए गए और टैक्स चोरी की गई।
30 हजार के लालच में बना दी करोड़ों की योजना
आरोपियों ने महज 20 से 30 हजार रुपए के लालच में फर्जी डॉक्यूमेंट बनाए, जिनका उपयोग करोड़ों की टैक्स चोरी में किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी फर्जी सील, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट और दस्तावेज अपने पास रखते थे और कसीनो ट्रांजैक्शन, हवाला और साइबर फ्रॉड तक में इनका उपयोग होता था।
पुलिस को मुखबिर से मिला सुराग, डीसीपी ने खुद संभाली कमान
डीएसटी पश्चिम के कॉन्स्टेबल दलाराम को फर्जी आधार कार्ड की सूचना मिली। उन्होंने 5 फर्जी और असली आधार कार्ड की पुष्टि की और डीसीपी को अवगत कराया। इसके बाद टीम गठित कर कार्रवाई की गई।
सद्दाम के मोबाइल से सैकड़ों फर्जी दस्तावेज, ईमेल और मोबाइल नंबर मिले हैं, जो अभी साइबर विशेषज्ञों की मदद से विश्लेषण में हैं।
यह है फर्जीवाड़े की चेन (Chain of Fraud):
- सद्दाम व्यक्ति को लाता, असली आधार लेता।
- प्रवीण, राजपत्रित अधिकारी की फर्जी सील लगाकर आधार का एड्रेस अपडेट करता।
- नया आधार बनाकर, दूसरे राज्य में भेजता।
- वहां सिम, बैंक खाता खुलवाया जाता।
- दुकान किराए पर दिखाकर रेंट एग्रीमेंट बनता।
- उद्यम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और जीएसटी नंबर लिया जाता।
- फर्जी बिल, हवाला और ट्रांजैक्शन से टैक्स इनपुट लिया और पास ऑन किया जाता।
Jodhpur-Based Gang Creates 240 Fake Firms Across 22 States, Evades ₹524 Crore in GST; 7 Arrested Including E-Mitra Operator
Jodhpur |
In a massive crackdown on a pan-India tax fraud, Jodhpur police have unearthed a ₹524 crore GST evasion scam involving 240 fake firms created across 22 states. The gang operated by forging PAN cards, Aadhaar cards, and opening fake bank accounts to show bogus transactions under GST. Seven people, including an E-Mitra operator and those involved in manufacturing fake seals, have been arrested.
Operation Led by E-Mitra Operator and Associate
Deputy Commissioner of Police (West), Rajarshi Raj Varman, revealed the details of the scam on Monday. The prime accused, Praveen Panwar (28), who ran an E-Mitra and computer center in Masuria, allegedly teamed up with Saddam Hussain (30) to prepare forged identity documents. These documents were then used for fake GST registrations and even in cyber fraud activities.
GST Input Fraud: ₹278 Cr Claimed, ₹246 Cr Passed On
Investigations show:
- Fake GST input claims amounting to ₹278 crore were generated using forged invoices.
- Input tax credit worth ₹246 crore was fraudulently passed on to other firms.
- Out of 244 identified fake firms, 152 were already cancelled by GST authorities, and many were not operating from their registered addresses.
- On-site verification on June 19 revealed that 8 firms registered in Jodhpur did not exist at their given addresses.
22 States Affected: Goa to Manipur
The gang managed to register fake firms in 22 states, including:
Andhra Pradesh, Assam, Bihar, Chhattisgarh, Delhi, Goa, Gujarat, Haryana, Himachal Pradesh, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, Manipur, Odisha, Punjab, Rajasthan, Tamil Nadu, Telangana, Uttar Pradesh, Uttarakhand, West Bengal, and Daman & Diu.
These firms were used to create fake e-way bills and transactions without any actual business activity, causing massive revenue loss to the government.
Big Scam, Small Price: ₹30,000 per Document
The accused created fake documents for just ₹20,000–₹30,000 per person. These were then sold to masterminds who used them for registering fake companies, obtaining GST numbers, opening current accounts, and laundering money through casinos
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