24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदासधाम रामद्वारा में चातुर्मास में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत कीर्तिराम महाराज ने सत्संग में बताया कि शिष्यों तीन प्रकार होते हैं जो गुरु के मौन अभिप्राय को समझ कर कार्य कर दे वह उत्तम शिष्य , जो संकेत मिलने पर कार्य करें वह मध्यम शिष्य और जिसे बार-बार कहने पर ही कार्य करना पड़े वह जघन्य शिष्य होता है ।संत ने कहा कि मनुष्य प्राय: यह मान बैठता है कि उसकी अर्जित संपत्ति केवल उसी की है परंतु आध्यात्मिक दृष्टि से यह धारणा अधूरी है । वस्तुत: मनुष्य धन का स्वामी नहीं अपितु ईश्वर द्वारा नियोजित एक निमित्त मात्र होता है उसकी कमाई से परिवार का पालन होता है अनेक जीवनों का आधार निर्मित होता है और समाज की जीवन धारा प्रवाहित रहती है । स्वयं उसकी भाग्य में उतना ही आता है, जितना वह अन्न- वस्त्र के रूप में उपयोग कर लेता है, शेष सब लोकहित में प्रवाहित हो जाता है । इसलिए धनार्जन में अहंकार नहीं, कृतज्ञता, समर्पण और सेवाभाव होना चाहिए । जब यह बोध जागृत होता है, तब मनुष्य का साधारण कर्म भी कर्मयोग बनकर लोगमंगल का पावन साधन हो जाता है । संत ने कहा कि परमेश्वर किसी बाह्य शासक की भाँति जगत् का संचालन नहीं करता बल्कि अन्तर्यामी रूप से प्रत्येक सत्ता के भीतर विद्यमान रहकर उसे धारण करता है। केवल शासन करना नहीं बल्कि प्रत्येक सत्ता को उसकी सत्ता प्रदान करना है। जिस प्रकार सूत्र में गुँथे हुए मोती उसी सूत्र पर आश्रित रहते हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण जगत् परमात्मा की चेतना पर आश्रित होकर स्थित है। यदि वह चेतना एक क्षण के लिए भी अप्रकट हो जाए तो सम्पूर्ण जगत् का अस्तित्व समाप्त हो जाए।संत ने बताया कि परमेश्वर स्वयं उस आद्य ऋषि को उत्पन्न करता है और उसे समस्त ज्ञान से सम्पन्न करता है। इससे यह सिद्ध होता है कि ज्ञान का मूल स्रोत भी परमेश्वर ही है; कोई भी ऋषि, मुनि अथवा आचार्य स्वतन्त्र ज्ञानदाता नहीं, बल्कि उसी परम ज्ञानस्वरूप ब्रह्म के प्रकाश के माध्यम हैं।परमेश्वर केवल सृष्टि की रचना करके उससे पृथक् नहीं हो जाता। वह प्रत्येक जीव के साथ रहता है, उसके जीवन का पोषण करता है, उसकी बुद्धि को प्रकाशित करता है और उसके समस्त कर्मों का साक्षी बना रहता है। – ज्ञान, चेतना और अस्तित्व प्रदान करना। प्रत्येक जीव की बुद्धि में जो प्रकाश है, वही परमात्मा का प्रकाश है। जब साधक यह समझ लेता है कि प्रत्येक जीव, प्रत्येक प्राणी, प्रत्येक सत्ता और प्रत्येक जीवनरूप के भीतर वही एक परमात्मा अन्तर्यामी रूप से स्थित है, तब उसके भीतर अहंकार, द्वेष, हिंसा और भेदभाव स्वत: समाप्त होने लगते हैं। वह सम्पूर्ण जगत् को अपने ही आत्मस्वरूप का विस्तार अनुभव करने लगता है। संत प्रसाद आकाशवाणी एवं टीवी चैनल गायक कैलाश माकड सुथार नागौर परिवार का रहा । सत्संग में समिति के प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा,अनिल वाडेल, दामोदर दलाल,विनोद कोठारी, बाबूलाल सेवक, बालकृष्ण भासरिया, विष्णु भासरिया, सुरेश ठाकुर, विजय पंचाल,मंजुला सोमपुरा, संगीता परमार के अतिरिक्त कई महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे । Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation त्रिवेदी मेवाड़ा ब्राह्मण समाज के समारोह में आध्यात्मिक चेतना का संदेश, जोशी का अभिनंदन सागवाड़ा में कांग्रेस ने भूमिका पंचाल को बनाया पालिका अध्यक्ष पद का प्रत्याशी, भाजपा में दावेदारों की रस्साकशी