24 News Update उदयपुर, झीलों की नगरी एक बार फिर संगीत की गूंज से सराबोर हुई, जब वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 अपने दूसरे दिन एक उत्साहपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव के रूप में सामने आया। इसमें भारत और दुनिया भर की विविध संगीत परंपराएँ एक साथ देखने को मिलीं। म्यूज़िक विदाउट बॉर्डर्स के दस वर्षों का जश्न मनाते हुए, फ़ेस्टिवल के दूसरे दिन उदयपुर के प्रतिष्ठित खुले मंचों पर सलीके से चुनी गई प्रस्तुतियों के ज़रिये संस्कृतियों के बीच संवाद और गहराया। हिंदुस्तान ज़िंक के सहयोग से और सहर द्वारा परिकल्पित व प्रस्तुत यह फ़ेस्टिवल, राजस्थान सरकार तथा पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। दिन की शुरुआत मांझी घाट (अम्ब्राई घाट) पर आयोजित एक शांत सुबह के सत्र से हुई, जहाँ पिचोला झील के शांत जल के बीच दर्शकों को एक आत्मीय और विचारशील संगीत अनुभव से रूबरू कराया गया। राधा बुबुक्वार ने अपने हल्के शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति से सुबह की शुरुआत सादगी और गरिमा के साथ की। इसके बाद फ़्रांस की लेस इतिनेरेंटेस ने अपनी अकापेला प्रस्तुति के माध्यम से सुबह के समय में एक कोमल वैश्विक रंग जोड़ा, जिससे दिन की शुरुआत ध्यानमय माहौल में हुई। फ़तेह सागर पाल पर आयोजित दोपहर के सत्रों ने झील के किनारे एक शांत और मनभावन माहौल रचा। सत्र की शुरुआत अमृत रामनाथ, जिनकी शास्त्रीय संगीत से जुड़ी आधुनिक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को एक सुकून भरे संगीत अनुभव से जोड़ा। इसके बाद केप वर्डे की लुसिबेला ने अपनी भावपूर्ण मोर्ना और कोलाडेरा रचनाओं के माध्यम से दोपहर में आत्मीयता और गहराई जोड़ी। सत्र का समापन ताबा चाके की प्रस्तुति से हुआ, जिनके लोक-संगीत से प्रेरित गीत लेखन और भावनात्मक धुनों ने दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाया। शाम ढलते ही गांधी ग्राउंड वैश्विक संगीत की रौनक़ से भरे एक उत्साहपूर्ण मंच में बदल गया। तुर्की की सेलिन सुम्बुलटेपे ने समकालीन पॉप और क्षेत्रीय संगीत के अपने अनोखे मिश्रण के साथ शाम की शुरुआत की। इसके बाद कैमरून की वैलेरी एकौमे ने अफ़्रो-पॉप और अफ़्रो-रॉक की तालों के साथ मंच पर जोश भर दिया। संगीत की यह ऊर्जा आगे OAFF की प्रस्तुति के साथ जारी रही, जिनके आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप्स ने कार्यक्रम में समकालीन रंग जोड़ा। इसके बाद बहुप्रतीक्षित जोनिता गांधी की प्रस्तुति हुई, जिनकी दमदार मंच उपस्थिति और बहुआयामी गायकी ने फ़ेस्टिवल के दूसरे दिन को यादगार समापन तक पहुँचाया। फ़ेस्टिवल की प्रगति पर अपने विचार साझा करते हुए, अरुण मिश्रा, सीईओ, हिंदुस्तान ज़िंक, ने कहा, “वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल का दूसरा दिन इस बात को दर्शाता है कि यह मंच दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कलाकारों को एक साथ लाने के साथ-साथ दर्शकों से सार्थक रूप से जुड़ने में कितना सक्षम है। ऐसे मंच उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने और इसे वैश्विक संगीत व सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। हमें ऐसे प्रयास का समर्थन करते हुए खुशी है, जो हर वर्ष अपने विस्तार और प्रभाव में निरंतर वृद्धि कर रहा है।” दिन भर की प्रस्तुतियों पर अपने विचार साझा करते हुए, सहर’ के फ़ाउंडर संजीव भार्गव ने कहा, “दूसरे दिन ने वास्तव में उस भावना को साकार किया, जिसका प्रतिनिधित्व आज वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल करता है, विविधता, खोज और सार्थक संगीत संवाद। झील के किनारे दोपहर की आत्मीय प्रस्तुतियों से लेकर शाम के जोश से भरे वैश्विक सुरों तक, यह दिन एक सलीके से रची गई संगीत यात्रा के रूप में सामने आया। फ़ेस्टिवल के दस वर्षों का उत्सव मनाते हुए, ऐसे पल हमारे उस संकल्प को और मजबूत करते हैं, जिसके तहत हम ऐसे अनुभव रचते हैं जहाँ संगीत, परिवेश और दर्शक स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे से जुड़ते हैं।” दूसरे दिन के समापन के साथ, वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 अब अपने अंतिम दिन की ओर बढ़ रहा है। तीसरे दिन की शुरुआत एक बार फिर मांझी घाट (अम्ब्राई घाट) पर सुबह 9:00 बजे से भावपूर्ण सुबह की प्रस्तुतियों के साथ होगी। इसके बाद दोपहर 3:00 बजे से फ़तेह सागर पाल पर संगीत सत्र आयोजित किए जाएंगे, जबकि शाम 6:00 बजे से गांधी ग्राउंड पर प्रस्तुतियाँ होंगी। फ़ेस्टिवल के प्रतिष्ठित खुले मंचों पर संगीत की यह विविध यात्रा उत्सव को भव्य समापन की ओर ले जाएगी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation पैंथर की चहलकदमी, घर के बाहर बैठा दिखा, पालतू कुत्ता उठा ले गया वागड़ केसरी दंगल में उदयपुर के पहलवानों का दबदबा — कृष्णा चौहान और तरुणा परदेशी ने जीता स्वर्ण