उदयपुर। उदयपुर की पत्रकारिता की दुनिया चमकता सितारा आज अस्त हो गया। युवा प्रतिभाशाली फोटो जर्नलिस्ट कृष्णा तंवर का गुरुवार सुबह अनंता अस्पताल में बीमारी के चलते असामयिक निधन हो गया। केवल 42 वर्ष की उम्र में उनके दुनिया से विदा हो जाने से पत्रकारिता और फोटो जर्नलिज्म की दुनिया में ऐसा शून्य हो गया कि जिसे भर पाना असंभव है।कृष्णा का नाम लेते ही एक दुबले पतले शरीर में छिपे सशक्त, दृढ़ संकल्पित, कभी हार नहीं मानने वाले शख्स की तस्वरी उभर आती है। चश्मे के पीछे से खास अंदाज में झांकते हुए अपनी बातों से पल भर में ही सबके दिलों को जीतकर उन पर राज करने का हुनर सिर्फ कृष्णा के पास था। वे सिर्फ कैमरे के पीछे नहीं बल्कि कैमरे की भाषा बोलने वाले, हर फ्रेम में जीवन और संवेदना कैद करने वाले जिंदादिल इंसान थे। गजब की साफगोई थी उनमें। आज जब उनके निधन का समाचार आया तो पत्रकारिता ही नहीं समाज के हर तबके में शोक की लहर छा गई। विश्वास ही नहीं हुआ कि हंसता मुस्कुराता हुआ चेहरा अचानक कैसे दुनिया को क्लिक करते हुए यादों के फ्लैश बेक में यूं अचानक चला गया।उनके फोटो केवल दृश्य नहीं थे बल्कि समाज की अनकही कहानियाँ, संघर्ष और छोटी-छोटी खुशियों का दस्तावेज़ थे जो बरसों बरस तक संजोए जाते रहेंगे। इतिहास में जब कभी उदयपुर की पत्रकारिता का जिक्र होगा, उनका नाम फोटो जर्नलिस्ट के रूप में हमेशा अदब के साथ लिया जाएगा। उनके जाने से ऐसा लगा जैसे जिंदगी के कैमरे का शटर बंद होकर अंधकार छा गया। अचानक सब तरफ निःशब्द कर देने वाला मौन छा गया। पत्रकारिता में जमाई धाक, जीते कई पुरस्कार कैमरे के माध्यम से जीवन साक्षात्कार करवाने वाली अनुभूतियां प्रदान करने के शिल्पकार कृष्णा तंवर ने वर्ष 2001 में राष्ट्रदूत न्यूज़पेपर से अपनी पत्रकारिता यात्रा शुरू की। उनके कैमरे ने शहर के अनकहे पहलुओं, आमजन की पीड़ा और जीवन के छोटे, असाधारण पल को पाठकों तक पहुँचाया। उन्होंने प्रातःकाल, नवज्योति और दैनिक भास्कर में सेवाएं देने के बाद 2007 से 2019 तक राजस्थान पत्रिका में फोटो जर्नलिस्ट के पद पर सेवाएं दीं। इस दौरान उनकी ख्याति इतनी ज्यादा हो गई कि पत्रिका के पर्याय बन गए थे। ऑफबीट फोटो उनकी खास पहचान थे। फील्ड से आते ही अपने साथियों को वे सबसे पहले अपनी खास तस्वीरों से उन शब्दों व भावनाओं से रूबरू करवाते थे मानों सब कुछ आस पास ही फिर से घटित हो रहा हो। एक चित्र हजारों शब्दों से बढकर होता है मगर कृष्णा के क्लिक किए गए फोटो लाखों शब्दों को एक साथ बयां कर देते थे। फील्ड में रहते हुए दिन-रात कैमरे की आंखों से अच्छे चित्रों की तलाश ने उन्हें अपनी विधा का इतना महारथी बना दिया था कि हर कोई उनका मुरीद था। कोरोना काल से पहले कृष्णा ने फोटो जर्नलिज्म के साथ ही पत्रिका के ऑनलाइन पोर्टल व न्यूज सेक्शन को भी अपनी मेधा से परिमार्जित और समृद्ध किया। कोरोना के बाद गिरते स्वास्थ्य व पत्रकारिता के थेंकलेस जॉब की चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने अपना अपना बिजनेस शुरू किया और अंतिम दिनों तक इसी में जुटे रहे।कृष्णा अपने मिलनसार, शांत और जिंदादिल स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उनके कैमरे में हमेशा जीवन की धड़कन, संघर्ष और मानवता की संवेदना झलकती थी। उनके साथ काम करना साथी पत्रकारों के लिए सीखने और महसूस करने का अनुभव था। वे अपने पीछे दो छोटे बच्चों और परिवार को छोड़ गए हैं। उनके अचानक चले जाने से परिवार और पत्रकारिता समाज में गहरा शोक है। अंतिम यात्रा और श्रद्धांजलि कृष्णा तंवर की अंतिम यात्रा आज शाम 4 बजे, उनके निवास स्थान खारा कुआं से अशोक नगर मोक्षधाम तक जाएगी। साथी पत्रकार, मित्र और शुभचिंतक वहां पहुँचकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि देंगे। साथी पत्रकारों ने गहरा शोक जताते हुए कहा कि कृष्णा ने कैमरे के माध्यम से जीवन की धड़कन को महसूस करना सिखाया। उनकी तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं थीं, बल्कि कैमरे की भाषा में जीवित कहानियाँ थीं। उनका जाना हमारे बीच एक खालीपन छोड़ गया। कृष्णा! तुम्हें हम कभी नहीं भूल पाएंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर में दशहरे पर यातायात व्यवस्था बदली, जानिए नए रूट सांसद डॉ रावत पुन: कोल, माइंस, स्टील विषयक संसद की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य मनोनीत